सीओपीडी के मरीजों के लिए लाभप्रद हो सकता है योग

विश्व क्रोनिक ऑब्स्ट्रक्टिव पल्मोनरी रोग दिवस 21 नवंबर 2018 को मनाया जाएगा।...

सीओपीडी के मरीजों के लिए लाभप्रद हो सकता है योग

नई दिल्ली, 15 नवंबर। एक नए सर्वेक्षण के मुताबिक अमेरिका में अब अधिक तादाद में वयस्क और बच्चे ध्यान और योग (yoga and meditation) कर रहे हैं।

अमेरिका में संपन्न इस राष्ट्रीय सर्वेक्षण में यह बात सामने आई है कि मस्तिष्क और शरीर के प्रति सोच में उल्लेखनीय प्रगति हुई है।

पिछले पांच वर्षों में, सभी उम्र के अधिकतर अमेरिकी अपने योग और ध्यान कर रहे हैं। इस बड़े राष्ट्रीय प्रतिनिधि सर्वेक्षण से पता चलता है कि योग और ध्यान का उपयोग करने वाले अमेरिकी वयस्कों और बच्चों की संख्या पिछले वर्षों में काफी बढ़ गई है।

एक अन्य रिपोर्ट के मुताबिक 2018 में हुए 10 अध्ययनों, जिनमें कुल 502 प्रतिभागियों को शामिल किया गया था, पाया गया कि योग शारीरिक क्षमता (जैसे परिभाषित समय में निर्धारित दूरी पर चलने की क्षमता), फेफड़ों का कार्य, और सीओपीडी वाले लोगों में जीवन की गुणवत्ता में सुधार कर सकता है। इसलिए योग इस स्थिति वाले लोगों के लिए पुनर्वास कार्यक्रमों के लिए सहायक सहायक हो सकता है।

World Chronic Obstructive Pulmonary Disease (COPD) Day

विश्व क्रोनिक ऑब्स्ट्रक्टिव पल्मोनरी रोग दिवस 21 नवंबर 2018 को मनाया जाएगा।

विश्व क्रोनिक ऑब्स्ट्रक्टिव पल्मोनरी रोग (सीओपीडी) दिवस सीओपीडी की लोगों की समझ को बढ़ावा देने और रोगियों के लिए बेहतर देखभाल के लिए वकील को बढ़ावा देने का वैश्विक प्रयास है।

पहला विश्व सीओपीडी दिवस 2002 में आयोजित किया गया था। दुनिया भर में 50 से अधिक देशों में आयोजकों ने गतिविधियों को पूरा किया है, जिससे दिन दुनिया की सबसे महत्वपूर्ण सीओपीडी जागरूकता और शिक्षा कार्यक्रमों में से एक बन गया है।

World Chronic Obstructive Pulmonary Disease (COPD) Day 2018 Theme

विश्व सीओपीडी दिवस के लिए 2018 थीम "कभी भी जल्दी नहीं, कभी देर नहीं",  “Never too early, never too late”  होगी।

What is Chronic Obstructive Pulmonary Disease

विश्व स्वास्थ्य संगठन की एक फैक्टशीट के मुताबिक  क्रोनिक अवरोधक फुफ्फुसीय बीमारी Chronic obstructive pulmonary disease एक फेफड़ों की बीमारी है जिसकी विशेषता वायु प्रवाह की लगातार कमी है। सीओपीडी के लक्षण प्रगतिशील रूप से खराब हो रहे हैं और परिश्रम पर निरंतर सांस लेते हैं, अंततः आराम से श्वास लेते हैं। यह अव्यवस्थित हो जाता है और जीवनभर हो सकता है। इस स्थिति के लिए आमतौर पर "क्रोनिक ब्रोंकाइटिस" और "एम्फीसिमा" कहा जाता है।

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नोट - यह समाचार किसी भी हालत में चिकित्सकीय परामर्श नहीं है। यह समाचारों में उपलब्ध सामग्री के अध्ययन के आधार पर जागरूकता के उद्देश्य से तैयार की गई अव्यावसायिक रिपोर्ट मात्र है। आप इस समाचार के आधार पर कोई निर्णय कतई नहीं ले सकते। स्वयं डॉक्टर न बनें किसी योग्य चिकित्सक से सलाह लें।) 

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