जी.एस.टी. के विरोध में 72 घंटे का भारत बंद : व्यापारियों का प्रदर्शन

व्यापारी कपड़े पर जी.एस.टी. का पुरजोर विरोध करता है और सरकार से अपील करता है कि वह तुरंत प्रभाव से इस काले कानून को वापिस ले ...

72 hours of shutdown in protest against GST : businessmen's movement

नई दिल्ली, 28 जून। जी.एस.टी. के विरोध में  27, 28, 29 जून, 2017 ‘‘72 घंटे का भारत बंद’’ के अंतर्गत आज  बंद के दूसरे दिन 28, जून, 2017 को दिल्ली हिन्दुस्तानी मर्कन्टाइल एसोसिएशन (रजि.) दिल्ली-06, (कपड़ा व्यापार की 124 वर्षीय र्शीषस्थ संस्था) के परचम तले चांदनी चौक के थोक कपड़ा व्यापारियों ने अपना-अपना व्यापार बंद रखकर ऐतिहासिक घण्टाघर चांदनी चौक पर विशाल धरना दिया और व्यापारी प्रतिनिधियों ने अपने-अपने संबोधन में सरकार की व्यापारियों पर ज्यादती और जी.एस.टी. थोपे जाने की घोर निंदा करते हुए अपील की कि सरकार इस काले कानून को तुरंत वापिस ले।

धरने के पश्चात हजारों की संख्या में व्यापारियों ने दिल्ली हिन्दुस्तानी मर्कन्टाइल एसोसिएशन अध्यक्ष अरूण सिंहानियां के नेतृत्व में घण्टाघर से लाल किला की ओर प्रस्थान कर जैन लाल मंदिर पर जी.एस.टी. के विरोध में प्रदर्शन किया और सरकार विरोधी नारे लगाये।

व्यापारियों ने कहा कि कपड़ा जन्म से लेकर अंतिम संस्कार तक प्रयोग होता है, जिसे गरीब से गरीब व्यक्ति भी पहनता और उपयोग करता है, तथा वर्ष 1956 में चीनी, तम्बाकू और कपड़ा को विशेष श्रेणी के अंतर्गत रख कर सरकार ने सेल्स टैक्स के स्थान पर ‘‘एडिश्नल एक्साइज ड्यूटी’’ लगा दी थी जो सरकार को कपड़े के निर्माण के प्रथम चरण में ही प्राप्त होती रही है। वर्तमान में सरकार इसे जी.एस.टी. के रूप में लेती रहे तो व्यापारियों को काई आपत्ति नहीं है।

व्यापारियों ने कहा कि

72 hours of shutdown in protest against GST businessmens movement*      कपड़ा व्यापार में सलग्न 90 प्रतिशत व्यापारी छोटा और मझौला व्यापारी है, जिसे कम्प्यूटर का कोई ज्ञान नहीं है, वह जी.एस.टी की जटिल प्रक्रिया को कैसे अपनायेगा क्या वह इस कार्य के लिए कर्मचारी नियुक्त करेगा और करेगा तो उसका आर्थिक बोझ कैसे सहेगा।

* जी.एस.टी. के अंतर्गत प्रत्येक माह तीन रिटर्न और हर वर्ष 37 रिटर्न के प्रावधान को कैसे पूरा कर पायेगा, यदि इन सब कार्यों को करेगा तो व्यापार कब करेगा।

* जी.एस.टी. के नियमों के पालन में चूक होने पर सजा का प्रावधान क्या उचित है। क्या एक छोटी सी चूक पर कोई दण्ड जुर्माना न होकर सजा का प्रावधान न्यायोचित है ?

* व्यापारी कपड़े पर जी.एस.टी. का पुरजोर विरोध करता है और सरकार से अपील करता है कि वह तुरंत प्रभाव से इस काले कानून को वापिस ले अन्यथा व्यापारी अपने व्यापार की सुरक्षा और संरक्षण के लिए किसी भी धरना-प्रदर्शन-अनशन करने से पीछे नहीं हटेगा।

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