पीआरपी तकनीक से शादी के 18 साल बाद माँ बनी

After 18 years of marriage with PRP technology (Platelets Rich Plasma) , she became a mother पीआरपी तकनीक से शादी के 18 साल बाद माँ बनी...

नई दिल्ली: आज दुनिया भर में प्लेटलेट्स रिच प्लाज्मा - Platelets Rich Plasma (पीआरपी - PRP) का प्रायोगिक स्तर (Experiment Level), पर बांझपन-इंफर्टिलिटी (Infertility) के उपचार के लिए इस्तेमाल हो रहा है। लेकिन अभी इसका कहीं पर भी यह स्थापित प्रक्रिया-इस्टैबलिश्ड प्रोसीजर (Established processor) के तौर पर नहीं इस्तेमाल हो रहा है। वास्तव में अब पीआरपी की मदद से इन्फर्टिलिटी का इलाज (Infertility treatment with the help of PRP) संभव हो पाया है।

यह जानकारी इंदिरा आईवीएफ हॉस्पिटल (Indira IVF Hospital) में आयोजित एक सेमिनार में आईवीएफ विशेषज्ञ डा. सागरिका अग्रवाल (IVF specialist Dr. Sagarika Agarwal) ने दी। उनके अनुसार एक महिला पूजा (बदला हुआ नाम) की यूट्रस की लाइनिंग (Uterus lining) कमजोर और पतली थी, जिसकी वजह से वह मां नहीं बन पा रही थी। डॉक्टरों ने प्लेटलेट्स रिच प्लाज्मा (पीआरपी) तकनीक अपना कर उनकी इन्फर्टिलिटी दूर करने में सफलता प्राप्त की है। यह महिला शादी के 18 साल बाद इस तकनीक के द्वारा मां बनी।

डॉ. सागरिका अग्रवाल ने बताया कि शादी के 18 साल बाद भी पूजा मां नहीं बन पा रही थीं। मेडिकल जांच में पाया गया कि उनके यूट्रस की लाइनिंग पतली है, जिस वजह से गर्भ नहीं ठहर रहा है लेकिन यूट्रस की लाइनिंग को मोटी बनाने के तमाम प्रक्रिया और दवा अपनाने के बाद भी जब फायदा नहीं हुआ तो डॉक्टरों ने उन्हें सरोगेसी की सलाह दी। लेकिन पूजा अपने बच्चे की मां बनना चाहती थीं। तब डॉक्टरों ने प्लेटलेट्स रिच प्लाज्मा (पीआरपी) तकनीक अपनाने की सलाह दी।

कितनी होती है गर्भाशय की मोटाई What is the thickness of uterus

आमतौर पर यूट्रस की मोटाई सात से बारह एमएम के बीच होनी चाहिए। इस मरीज के यूट्रस की मोटाई इलाज के बाद भी छह एमएम से कम रह जा रही थी।

क्या है पीआरपी तकनीक (What is PRP technology)

डॉक्टर ने बताया कि पीआरपी एक ऐसी तकनीक है, जिसमें मरीज के शरीर से ब्लड निकाल कर उसे विशेष तकनीक की मदद से ब्लड कंपोनेंट को अलग किया गया, जिसमें प्लेटलेट्स रिच पदार्थ काफी मात्रा में होते हैं। इसमें ग्रोथ फैक्टर (Growth Factor) और हार्मोन में सुधार (Hormone improvement) की क्षमता होती है। इससे रेसिस्टेंस में सुधार होता है। मरीज को 12वें और 14वें दिन दो बार पीआरपी थेरेपी दी गई। उसकी एंडोमेट्रियल लाइनिंग (Endometrial lining) धीरे-धीरे 6.2 से बढ़कर 6.8 हो गई। 18 वें दिन, उसकी मोटाई 7.4 एमएम तक पहुंच गई जो प्रेग्नेंट होने के लिए पर्याप्त थी। इसके बाद हमने आईवीएफ तकनीक (IVF technology) की मदद ली और महिला प्रेग्नेंट हो गई।

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