70 साल में पहली बार ... अलीमुद्दीन हत्याकांड में  11 आरोपी गौआंतकियों को आजीवन कारावास

भाजपा नेता नित्यानंद महतो, विक्की साव, सिकंदर राम, कपिल ठाकुर, रोहित ठाकुर, राजू कुमार, विक्रम प्रसाद व उत्तम राम को भी दोषी करार दिया गया है....

रांची

गोरक्षा और बीफ ले जाने के नाम पर रामगढ़ में हुए अलीमुद्दीन हत्याकांड में बुधवार को कोर्ट ने फैसला सुनाया. फास्ट ट्रैक कोर्ट एडीजे-दो ओमप्रकाश की अदालत ने 11 आरोपियों को आजीवन कारावास की सजा सुनायी. 16 मार्च को अदालत ने कुल 11 आरोपियों को दोषी करार दिया था. जिन आरोपियों को सजा सुनायी गयी है, उनमें दीपक मिश्रा, छोटू वर्मा और संतोष सिंह समेत 11 लोग शामिल हैं. सुनवाई के दौरान रामगढ़ जिला कोर्ट परिसर में भारी भीड़ थी. कोर्ट परिसर में भाजपा, विश्व हिंदू परिषद, बजरंग दल समेत शहर के लोग फैसले का इंतजार कर रहे थे.

पिछले सप्ताह (शुक्रवार को) रामगढ़ की फास्ट ट्रैक अदालत ने सभी  11 आरोपियों को भारतीय दंड संहिता की धारा 147, 148, 427/149, 435/149, 302/149 के तहत दोषी करार दिया था. कोर्ट ने दीपक मिश्रा, छोटू वर्मा व संतोष सिंह को मुख्य अभियुक्त करार दिया है. इन्हें अन्य धाराओं के साथ-साथ 120बी के तहत भी दोषी पाया गया है. इनके अलावा भाजपा नेता नित्यानंद महतो, विक्की साव, सिकंदर राम, कपिल ठाकुर, रोहित ठाकुर, राजू कुमार, विक्रम प्रसाद व उत्तम राम को भी दोषी करार दिया गया है.

सुनवाई के दौरान अभियोजन पक्ष ने 19 गवाह प्रस्तुत किये, 59 दस्तावेज व 20 वस्तुएं कोर्ट में पेश की. रामगढ़ सीओ द्वारा तैयार सीडी की जांच केंद्रीय प्रयोगशाला चंडीगढ़ से करा कर उसे साक्ष्य के रूप में न्यायालय में प्रस्तुत किया गया. बचाव पक्ष ने भी एक गवाह को पेश किया.

अलीमुद्दीन की मौत के बाद भड़की हिंसा का फाइल फोटो.

यहां बताना प्रासंगिक होगा कि 29 जून, 2017 को सुबह 10 बजे हेसला निवासी अलीमुद्दीन प्रतिबंधित मांस लेकर अपने मारुति वैन से चितरपुर की ओर से आ रहा था. इसी क्रम में बाजारटांड़ स्थित हिंदुस्तान गैस एजेंसी के पास आरोपी व अन्य लोगों ने अलीमुद्दीन को घेर लिया. भीड़ ने लाठी-डंडों से अलीमुद्दीन की पिटाई की और उसकी गाड़ी में आग लगा दी.

इलाज के लिए रांची ले जाने के क्रम में अलीमुद्दीन की मौत हो गयी. अलीमुद्दीन की पत्नी मरियम खातून ने इस मामले में नामजद प्राथमिकी दर्ज करायी. बजरंग दल और विश्व हिंदू परिषद के लोगों पर सुनियोजित तरीके से अलीमुद्दीन की हत्या करने का आरोप लगा. सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले की प्रतिदिन सुनवाई के लिए एडीजे द्वितीय आरबी पाल की अदालत में फास्ट ट्रैक कोर्ट का गठन किया गया. हाइकोर्ट की निगरानी में पूरे मामले की सुनवाई चली.

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