रोहिंग्या पर अत्याचार मामला, एमनेस्टी ने आंग सान सू की से वापस लिया सर्वोच्च सम्मान

रोहिंग्या पर अत्याचार मामला, एमनेस्टी ने आंग सान सू की से वापस लिया सर्वोच्च सम्मान...

रोहिंग्या पर अत्याचार मामला, एमनेस्टी ने आंग सान सू की से वापस लिया सर्वोच्च सम्मान

Amnesty International withdraws human rights award from Aung San Suu Kyi

नई दिल्ली, 13 नवंबर। मानव अधिकारों की पैरवी करने वाले अंतर्राष्ट्रीय संगठन एमनेस्टी इंटरनेशनल ने म्यांमार की नेता आंग सान सू ची को झटका दिया है। म्यांमार की सेना द्वारा रोहिंग्या मुसलमानों पर हुए अत्याचार को देखते हुए एमनेस्टी इंटरनेशनल ने आंग सान सू ची को दिया गया अपना सर्वोच्च सम्मान वापस ले लिया है।

वैश्विक मानवाधिकार संगठन का मानना है कि रोहिंग्या मुसलमानों पर हुए अत्याचार पर आंग सान सू की का रवैया 'उदासीन' था।

अपने बयान में एमनेस्टी इंटरनेशनल ने कहा कि वह सू ची को दिया गया ‘ऐम्बैसडर आफ कॉन्शन्स अवार्ड’ वापस ले रहा है, जो उसने उन्हें 2009 में उस समय दिया था जब वह घर में नजरबंद थीं।

11 नवंबर को, एमनेस्टी इंटरनेशनल के महासचिव कुमी नायडू Amnesty International’s Secretary General Kumi Naidoo ने आंग सान सू की Aung San Suu Kyi को लिखा कि उन्हें संगठन 200 9 के पुरस्कार को रद्द कर रहा है।

समूह द्वारा जारी एमनेस्टी इंटरनेशनल प्रमुख कूमी नायडू द्वारा लिखे खत में कहा गया है, ‘आज हम अत्यंत निराश हैं कि आप अब आशा, साहस और मानवाधिकारों की रक्षा की प्रतीक नहीं हैं।’

एमनेस्टी इंटरनेशनल ने बार-बार रखाइन राज्य में रोहिंग्या आबादी ( जो वर्षों से भेदभाव की प्रणाली और अलगाव में जी रहे हैं) के खिलाफ सैन्य अत्याचारों के बारे में खामोश रहने के लिए आंग सान सू की और उनकी सरकार की विफलता की आलोचना की है।

कूमी नायडू ने कहा

"हम म्यांमार में उनके समर्थन के साथ या उसके बिना भी न्याय और मानवाधिकारों के लिए लड़ना जारी रखेंगे ।"

कौन हैं आंग सान सू की

आंग सान सू की म्यांमार की राजनेता, राजनयिक, लेखक, और नोबेल शांति पुरस्कार विजेता हैं। वह राष्ट्रीय लीग फॉर डेमोक्रेसी की नेता और प्रधान मंत्री के समकक्ष राज्य परामर्शदाता State Counsellor हैं।

आंग सान सू की ने भारत में दिल्ली विश्वविद्यालय से भी शिक्षा प्राप्त की है।

आंग सान सू की के नेतृत्व में ही म्यांमार में दो पत्रकारों को रोहिंग्याओं पर जुल्म की ख़बरें प्रकाशित करने के लिए सजा सुनाई गई है, जिसको लेकर म्यांमार और आंग सान सूकी की अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर आलोचना हुई।

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