अनपरा-ओबरा में हो ईएसआई अस्पताल-वर्कर्स फ्रंट

जनपद में मात्र एक ईएसआई अस्पताल रेनूकूट में स्थित है जिसकी इन औद्योगिक क्षेत्रों से दूरी चालीस से पचास किलोमीटर है। जहां इलाज कराना इन क्षेत्रों में कार्यरत श्रमिकों के लिए बेहद असुविधाजनक व महंगा है।...

हाइलाइट्स

ईएसआई निदेशक वाराणसी से मिला प्रतिनिधिमण्डल

अनपरा, 15 जून 2017, जनपद के औद्योगिक क्षेत्र अनपरा और ओबरा में ईएसआई अस्पताल निर्मित कराने, जब तक अस्पताल निर्मित न हो तब तक परियोजना व उद्योगों के अस्पतालों में इलाज की ईएसआई सुविधा उपलब्ध कराने व श्रमिकों से ईएसआई का अंशदान काट रहे रेनूसागर जैसे उद्योगों में मजदूरों को तत्काल ईएसआई कार्ड देने के सम्बंध में वर्कर्स फ्रंट के प्रदेश अध्यक्ष दिनकर कपूर के नेतृत्व में प्रतिनिधिमण्डल ने वाराणसी में क्षेत्रीय निदेशक कर्मचारी राज्य बीमा (ईएसआई) से मुलाकात कर पत्रक सौंपा।

प्रतिनिधिमण्डल में वर्कर्स फ्रंट के महामंत्री राजेश सचान, ठेका मजदूर यूनियन के जिला उपाध्यक्ष रामनरेश यादव, रेनूसागर के नेता कुलदीप पाल, अनपरा के गोविन्दा शामिल रहे। निदेशक ईएसआई ने प्रतिनिधिमण्डल को अस्पताल निर्माण और जब तक अस्पताल नहीं बनता तदर्थ व्यवस्था के लिए परियोजना अस्पतालों से ईएसआई सुविधा के लिए कार्यवाही का आश्वासन दिया।

उन्होंने प्रतिनिधिमण्डल को बताया कि ईएसआई कार्ड देना प्रधान नियोक्ता की जिम्मेदारी है और यदि रेनू पावर डिवीजन, हिण्डालकों, रेनूसागर ने तीन माह बीतने के बाद भी यह कार्ड उपलब्ध नहीं कराया है तो इस सम्बंध में कड़ा निर्देश वह प्रबंधन को जारी करेंगे।

प्रतिनिधिमण्डल ने निदेशक को अवगत कराया कि सोनभद्र जनपद में दो प्रमुख औद्योगिक केन्द्र अनपरा और ओबरा है। अनपरा औद्योगिक केन्द्र में अनपरा तापीय परियोजना, हिण्ड़ालको का रेनुपावर डीवीजन रेनूसागर, लैंकों तापीय परियोजना, भारत सरकार की कोयला खदानें व एनटीपीसी की शक्तिनगर तापीय परियोजना है और ओबरा औद्योगिक क्षेत्र में ओबरा तापीय परियोजना, जेपी समूह की डाला सीमेन्ट फैक्ट्री, बालू व पत्थर खनन व क्रशर उद्योग है। इन उद्योगों में हजारों की संख्या में स्थायी कर्मचारी, संविदा, कैजुअल, निर्माण व खनन श्रमिक काम करते है। इन दोनों औद्योगिक क्षेत्र में कोई भी ईएसआई का अस्पताल नहीं है। जनपद में मात्र एक ईएसआई अस्पताल रेनूकूट में स्थित है जिसकी इन औद्योगिक क्षेत्रों से दूरी चालीस से पचास किलोमीटर है। जहां इलाज कराना इन क्षेत्रों में कार्यरत श्रमिकों के लिए बेहद असुविधाजनक व महंगा है।

प्रतिनिधिमण्डल की बात से सहमति जताते हुए निदेशक ने वैकल्पिक व्यवस्था करने के लिए समुचित कार्यवाही का अश्वासन दिया।

 

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