जानते हैं क्यों बेअसर हो रही हैं दवाएं ?

मानव और पशु स्वास्थ्य और कृषि उद्योग में एंटीमिक्राबियल दवाओं के उपयोग को अनुकूलित करें...

जानते हैं क्यों बेअसर हो रही हैं दवाएं ?

मानव और पशु स्वास्थ्य और कृषि उद्योग में एंटीमिक्राबियल दवाओं के उपयोग को अनुकूलित करें

Optimize the use of antimicrobial medicines in human and animal health and agricultural industry

क्या आपको भी लगता है कि जो दवा पहले चमत्कारी होती थी वह अब बेअसर हो रही है? जी हाँ ऐसा हो रहा है।

विश्व स्वास्थ्य संगठन के मुताबिक एक संक्रमण के शिकार व्यक्ति में एंटी माइक्रोबियल थेरेपी इलाज, मृत्यु और जीवन के बीच के अंतर को कम कर सकती है। दुर्भाग्यवश एंटीमाइक्रोबायल्स के उपयोग और दुरुपयोग ने प्रतिरोधी सूक्ष्मजीवों के निरंतर विस्तार को प्रेरित किया है जिससे इन "चमत्कारी दवाओं" के असर करने की क्षमता में कमी आती है।

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विश्व स्वास्थ्य संगठन के मुताबिक एंटीमाइक्रोबायल्स के असर को बढ़ाने के लिए नैदानिक, फार्मेसी और पशु चिकित्सा में अनावश्यक वितरण समाप्त करना होगा।

विश्व स्वास्थ्य संगठन के मुताबिक वैश्विक समुदाय को रोगियों और कृषि उद्योग में एंटीमाइक्रोबायल एजेंटों के अनुचित और अनियमित उपयोग को रोकना होगा।

एंटी-माइक्रोबियल रेसिस्टेंस के कारण 7 लाख लोग प्रति वर्ष मृत्यु को प्राप्त होते हैं और यदि इसको रोकने के कारगर कदम न उठाये गए, तो यह संख्या आने वाले वर्षों में 1 करोड़ तक बढ़ने की संभावना है।

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हस्तक्षेप पर ही प्रकाशित एक लेख के मुताबिक पशु एवं कृषि में एंटीबायोटिक दवाओं का तर्कहीन उपयोग तत्काल बंद कर देना आवश्यक है. इन दवाओं का प्रयोग फसल अथवा दूध आदि उत्पाद बढ़ाने के लिए बिलकुल नहीं करना चाहिए। इसके अलावा जिन एंटीबायोटिक दवाओं को विश्व स्वास्थ्य संगठन ने आरक्षित श्रेणी में रखा है उनको पशुओं में उपचार के लिए प्रयोग नहीं करना चाहिए तथा मनुष्यों में भी सावधानी से इस्तेमाल करना चाहिए।

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इसके अलावा इस बात पर भी ध्यान देना होगा कि एंटीबायोटिक दवाएं पानी और मिट्टी को प्रदूषित न कर सकें ताकि प्रतिरोधी म्युटेशन वातावरण में स्थित दूसरे जीवाणुओं तक न फैल सकें। साथ ही सभी स्वास्थ्य केंद्रों में संक्रमण नियंत्रण विधियों का समुचित पालन होना भी अति आवश्यक है।

अतः दूध बढ़ाने के लिए गाय-भैंस को जबर्दस्ती इंजेक्शन न भोंकें। पेड़-पौधों पर एंटीबायोटिक दवाओं का प्रयोग न करें, इसके लिए नजदीक के सरकारी कृषि विज्ञान केंद्र पर कृषि वेज्ञानिक से संपर्क करें।

कहीं आप भी खुद के डॉक्टर बनकर एंटीमाइक्रोबायल प्रतिरोध को दावत तो नहीं दे रहे ?

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