झारखण्ड : दामोदर तुरी की गिरफ़्तारी - कॉर्पोरेट लूट के लिए आदिवासियों के दमन का दौर

विस्थापन नहीं, विनाश नहीं, विपन्नता नहीं, मौत नहीं, पुनर्वास नहीं, बदलाव हो-समानता और न्याय आधारित...

विस्थापन नहीं, विनाश नहीं, विपन्नता नहीं, मौत नहीं, पुनर्वास नहीं, बदलाव हो-समानता और न्याय आधारित

नई दिल्ली। विस्थापन विरोधी जन विकास आन्दोलन ने झारखंड पुलिस द्वारा बीती 15 फरवरी 2018 को विस्थापन विरोधी जन विकास आन्दोलन के केन्द्रीय संचालन समिति सदस्य दामोदर तुरी की कथित फर्जी और बेबुनियाद आरोपों के तहत की गयी गिरफ़्तारी का विरोध किया है और उन्हें तुरंत रिहा किये जाने की मांग की है.

बता दें दामोदर तुरी की गिरफ्तारी का देश भर में विभिन्न जनवादी गुट विरोध कर रहे हैं. झारखंड के विभिन्न क्षेत्रो में झारखंड सरकार के इस दमनकारी तरीके के खिलाफ जन आन्दोलन आवाज उठा रहे हैं.

विस्थापन विरोधी जन विकास आन्दोलन ने इस संघर्ष को आगे ले जाने के लिए देशभर के सभी जनवादी ताकतों से अपील की कि वे दामोदर तुरी की गिरफ्तारी के खिलाफ आवाज उठाएं और उन्हें  तुरंत रिहा करने की मांग को मजबूती के साथ रखकर पूंजीवादी मुनाफाखोरी के लिए काम कर रहे बीजेपी की ब्राम्हणी-फासीवादी झारखंड सरकार की जन विरोधी नीतियों के खिलाफ आवाज उठाएं.

विस्थापन विरोधी जन विकास आन्दोलन ने देश भर के जन संगठनों, यूनियन, लोकतान्त्रिक राजनैतिक गुट, नागरिक स्वतंत्रता समूह, मानवाधिकार समूह, बुद्धजीवियों और विद्यार्थी आंदोलनों से अपील की है कि वे इस गिरफ़्तारी के खिलाफ स्टेटमेंट जारी करें, विरोध सभाओं और चर्चाओं का आयोजन कर दामोदर तुरी की रिहाई की मांग रखे.

विस्थापन विरोधी जन विकास आन्दोलन की केन्द्रीय संयोजक समिति ने कल 20 फरवरी को एक प्रेस विज्ञप्ति जारी की है जो ईमेल के जरिए हमें मिली है। विज्ञप्ति निम्नवत् है

विस्थापन विरोधी जन विकास आन्दोलन के केद्रीय संयोजक समिति के सदस्य दामोदर तुरी इन्हें 15 फरवरी 2018 को रांची पुलिस ने फर्जी और बेबुनियाद आरोपों ते तहत गिरफतार किया है. झारखंड पुलिस द्वारा की गयी इस कार्यवाही से झारखंड सरकार का गैरलोकतांत्रिक-जनविरोधी एवं दमनकारी चेहरा स्पष्टता से उजागर हुआ है. हम विस्थापन विरोधी जन विकास आन्दोलन के कार्यकर्ता दामोदर तुरी इनकी रांची पुलिस द्वारा की गयी गिरफ़्तारी की कड़ी निंदा करते है एवं उनकें नाम पर फैलाये जा रहे झूठे आरोपों का सिरे से खंडन करते है. और मांग करते है की दामोदर तुरी इनको तुरंत रिहा किया जाये, और उनपर डाले गए सभी फर्जी आरोप और मुकदमे तुरंत वापस लिए जाये.

बहोत ही पूर्वनिधारित रननिती के तहद रांची पुलिस ने 15 फरवरी 2018 को दामोदर तुरी इन्हें गिरफ्तार किया. वे तब ‘लोकतंत्र बचाओं मंच’ द्वारा आयोजित सेमिनार में सहभागी होकर वापस लौट रहे थे. लोकतंत्र बचाओं मंच यह झारखंड के विभिन्न जनसंगठनो द्वारा निर्मित एक संयुक्त मंच है, जिसने मजदुर संगठन समिति (एम.एस.एस.) पर लगाये गए प्रतिबंध, जून 2017 में मोतीलाल बास्के इस डोली मजदुर की फर्जी मुठभेड़ में की गयी हत्या, पी.डी.एस. में आधार कार्ड की सक्ती से अनाज न मिलने से हुए मौतों, यादी मुद्दों को लेकर एक संमेलन का आयोजन 15 फरवरी 2018 को किया था.

दामोदर तुरी इनकी गिरफ़्तारी तमाम प्रगतिशील और संघर्षो के साथ जुड़े आन्दोलनों और कार्यकर्तायों को सरकार के तरफ से डराने का और दमन लादने के तरीके का एक नियोजित भाग है.झारखंड सरकार ने मजदूरो के अधिकारों के लिए संघर्ष कर रहे मजदुर संगठन समिति (एम.एस.एस.) को बेबुनियाद आरोपों के तहद प्रतिबंधित कर दिया है. और साथ ही दामोदर तुरी इनका नाम मजदुर संगठन समिति से जबरन जोड़ने का प्रयास झारखंड पुलिस कर रही है. इसके लिए बहोत पहले से अपने झूठे आरोपों को साबित करने का और सनसनी फ़ैलाने का काम झारखंड पुलिस कर रही थी. इसी जनविरोधी रणनीति के तहद 22दिसंबर 2017 को झारखंड के गृह विभाग के मुख्य सचिव द्वारा पत्रकार परिषद में मजदूर संगठन समिति (एम.एस.एस.) को प्रतिबंधित किया गया है ये घोषणा की. और उसी पत्रकार परिषद में झारखंड में आदिवासी अधिकारों और विस्थापन के मुद्दे पर काम कर रहे कार्यकर्ता दामोदर तुरी इनका नाम एम.एस.एस. के साथ जोड़ कर उनपर फर्जी केसेस डाले है. इसके पहले झारखंड के डी.जी.पी. पाण्डेय ने20 दिसंबर 2017 को प्रत्रकार परिषद (सन्दर्भ: अखबार दैनिक हिंदुस्तान एवं दैनिक जागरण) में एम.एस.एस. के उपर आरोप करते वक्त दामोदर तुरी इन्हें मजदुर संगठन समिति का संचालक बताया है. साथ कहा की दामोदर तुरी इन्हें 2008 में नक्सली साहित्य के साथ गिरफ्तार किया गया है और 2012 में तमिलनाडु के कुडुम-कुलम में गिरफ्तार कीया गया है, ये बात कही.

हमने विस्थापन विरोधी जन विकास आन्दोलन के केन्द्रीय संचालन समिति के तरफ से 22जनवरी २०१८को ही प्रेस विज्ञप्ति जारी कर यह स्पष्ट किया था की दामोदर तुरी ये विस्थापन विरोधी जन विकास आन्दोलन के कार्यकर्ता है और वे मजदुर संगठन समिति के कार्यकर्ता या किसी भी स्तर के पदाधिकारी नहीं है. झारखंड के डी.जी.पी. पाण्डेय और मुख्य सचिव द्वारा लगाये गए आरोपों का विस्थापन विरोधी जन विकास आन्दोलन तीव्र निंदा करता है और दामोदर तुरी इनपर लगाये गए आरोपों का सिरे से खंडन करता है. यहाँ ये स्पष्ट हो की झारखंड डी.जी.पी द्वारा 2008 के जिस फर्जी केस के तहत गिरफ़्तारी की बात कही है, उस केस में 19 दिसंबर 2017 को ही रांची कोर्ट ने दामोदर तुरी इन्हें आरोपमुक्त किया है. साथ ही दामोदर तुरी 2012 में तमिलनाडु के कुडुम-कुलम में परमाणु उर्जा सयंत्र के प्रभावों की जाँच करने के लिए गए राष्ट्रिय जाँच दल का भाग थे जिसमे कई राज्यों से वकील, सामाजिक कार्यकर्ता, आन्दोलनकर्मी, मानवाधिकार कार्यकर्ता, संशोधक यादी सहभागी हुए थे. परमाणु सयंत्र का विरोध कर रहे स्थानिक जनता और उन्हके समर्थन में उतरे अन्य साथियों पर तमिलनाडु सरकार ने गिरफ्तारी का दौर चलाया, उसी दमन के निति के तहत जाँच दल को भी गिरफ्तार किया गया था. पर उसके बाद तमिलनाडु सरकार ने ये सभी मुकदमे वापस लिए है.

दामोदर तुरी पर एम.एस.एस. पर प्रतिबंध लगाने के पहले तक किसी भी कोर्ट में कोई भी न्यायिक मामला लंबित नहीं था. अब उन्हके उपर एम.एस.एस. से सम्बंधित चार मुकदमों में आरोप दर्ज किये है. जिसमे क्रिमिनल लॉ (अमेंडमेंट) एक्ट 1908, जैसे जनविरोधी और कठोर कानूनों के तहद आरोप थोपे है. जिसमे अभी उन्हें न्यायिक हिरासत में भेज दिया गया है.

सभी आरोपों की वास्तविकता को जानबूझकर नजरंदाज करते हुए झारखंड की पुलिस एवं झारखंड सरकार ने दामोदर तुरी पर बेबुनियाद आरोप लगाकर की गयी उनकी गिरफ़्तारी से दामोदर तुरी और विस्थापन विरोधी जन विकास आन्दोलन की छवि ख़राब करने का और जन आन्दोलनों पर दमन लादने का प्रयास किया है.

दामोदर तुरी पिछले 20 सालो से झारखंड एवं भारत के अन्य क्षेत्रो में सरकार द्वारा किये जा रहे हिंसक विस्थापन प्रक्रिया के विरोध में जन आन्दोलनों को संगठित करने काम कर रहे है. आदिवासी क्षेत्रो के जल-जंगल-जमीन और संसाधनों की पूंजीवादी मुनाफाखोरी के लिए की जा रही लुट के खिलाफ आवाज उठाया है. आदिवासी क्षेत्रो में खदानों, बड़े डैम, बड़े कारखानों के वजह से हो रहे विस्थापन के खिलाप, शहरी क्षेत्रो में स्मार्ट सिटी और विकास के नाम मजदुर बस्तियों को उजाड़ने के खिलाप, भूमिहीनों और दलितों को जमीन के अधिकार के लिए चल रहे आन्दोलनों में दामोदर ने सक्रीय भूमिका निभाई है. जमीन और संसाधनों पे सामंती-पूंजीवादी कब्जे के प्रतिरोध में संघर्ष कर रही जनता पर राज्य द्वारा की जा रही हिंसा का दामोदर और विस्थापन विरोधी जन विकास आन्दोलन ने हमेशा से पुरजोर विरोध किया है. सरकार द्वारा समर्थित सलवा जुडूम, आपरेशन ग्रीन हंट जैसी जनविरोधी प्रक्रियायो के खिलाप के आन्दोलनों का दामोदर सक्रियतः से हिस्सा रहे है.विकास के नाम पर थोपी जा रहीविनाशकारी नीतियों के प्रतिरोध में जन केन्द्रित विकास प्रक्रिया के निर्माण के संघर्षों को आगे ले जाने में दामोदर की महत्वपूर्ण भूमिका रही है. जनता के साथ आन्दोलन में उनकी सक्रीय सहभागिताही पूंजीपरस्त राज्य व्यवस्था को चुभ रही थी, इसी कारन आज उन्हें गिरफतार कर उनकी आवाज को दबाने का असफल प्रयास सरकार द्वारा किया जा रहा है.

दामोदर की गिरफ़्तारी द्वारा विस्थापन विरोधी जन विकास आन्दोलन को भी दबानेका सरकार का मनसुबा है. विस्थापनविरोधीजनविकासआन्दोलन (वि.वि.जे.वि.ए.),2007 में विस्थापन के प्रतिरोध में आवाज उठाने वाले जनसंगठनो के सामूहिक मोर्चे के रूप में स्थापित हुआ. वि.वि.जे.वि.ए. सक्रीय रूप से मूलनिवासी एवं अन्य समुदायों पर लादे जा रहे जबर विस्थापन के विरोध में आवाज उठाकर जनता को लामबंध करने का काम कर रहा है.जल-जंगल-जमीनऔर संसाधनों पर जनता की ही मालकियत होनी चाहिए, विकास के कोई भी कार्यक्रम ये जनता द्वारा निर्धारित होने चाहिए, और जन केन्द्रीय विकास प्रक्रिया के निर्माण में वि.वि.जे.वि.ए. संघर्षरत है. नंदीग्राम, सिंगुर, पास्को प्रतिरोध आन्दोलन, नियमगिरि में वेदांत कंपनी के खिलाप के आंदोलन, पोलावर डैम के खिलाप के आन्दोलन, आंध्रप्रदेश में जनविरोधी बाक्साइट खनन, झारखंड एवं ओड़िसा में अलग अलग खनन परियोजनाओ, महाराष्ट्र में लोह खनन के प्रयासों के खिलाप के आन्दोलनों सेजुड़ेसंघर्षोंमें वि.वि.जे.वि.ए. सक्रियतासे सहभागी रहाहै। झारखंड में वि.वि.जे.वि.ए. की राज्य इकाई ने छोटानागपुरटेनेंसीएक्ट, 1908 (CNTA)औरसंथालपरगनाकाश्तकारी अधिनियम, 1949 (SPTA)मेंझारखंड सरकार द्वारा लाये गए जनविरोधी संशोधनोंके खिलाप आवाज उठाया है. संथालपरगनामेंइलेक्ट्रो स्टील प्लांट और जिंदल खनन परियोजना के लिए जबरन अमिन अधिग्रहण के खिलाप, तेनुघट पॉवर प्लांट, बोकारोस्टीलप्लांट, टाइगरप्रोजेक्टबेतला औरकुटकुबांधकेहो रहे विस्थापनकेखिलाप आन्दोलन को संगठित किया है. सरकार के द्वारा विकास के नाम पर चलाये जा रहे विनाशकारी खनन एवं परियोजनाओं के प्रतिरोध में जनता के साथ खड़े रहने के कारण ही वि.वि.जे.वि.ए. लम्बे समय से सरकारकेनिशानेपररहाहै।और सरकार द्वारा विस्थापन विरोधी जन विकास आन्दोलन को अनेकों तरीको से बदनाम करना और संगठन के प्रक्रियायोंपर दमन लादने का प्रयास किया गया है. अप्रैल 2017 मेंभारत सरकारकेगृहमंत्रालय की वार्षिक रिपोर्ट 2016-17 मेंबिना किसी भी आधार के नियमगिरि सुरक्षा समिति के साथ वि.वि.जे.वि.ए. के झारखंड इकाई को सी.पी.आई (माओवादी) का अग्रसंगठनकरार देने का प्रयास किया. भारत सरकार के इस रिपोर्ट का सभी स्तरों से विरोध हुआ, नियमगिरि सुरक्षा समिति और विस्थापन विरोधी जन विकास आन्दोलन ने सरकार के सभी बेबुनियाद आरोपों का पहले ही खंडन किया है.

झारखंड सरकार द्वारा मजदूर संगठन समिति को प्रतिबंधित किये जाने की हम विस्थापन विरोधी जन विकास आन्दोलन द्वारा कड़ी निंदा करते है. मजदुर संगठन समिति झारखंड सरकार द्वारा निबंधन प्राप्त संगठन है जो संगठित व असंगठित मजदूरों व किसानों के बिच उनके हक़ अधिकारों को दिलाने के लिए संघर्षरत है. मजदूर संगठन समिति ट्रेड यूनियन एक्ट 1926 के तहत 1989 से एक यूनियन के तौर पर निबंधन किया हुआ संगठन है. पिचले 28 सालो से मजदूर संगठन समिति मजदुर अधिकारों को लेकर काम कर रही है. झारखंड सरकार द्वारा मजदूर संगठन समिति पर लगाया गया प्रतिबंध संविधान के तहद निहित आर्टिकल 19(1)c के अनुसार इकठ्ठा आकर अपना संघ बनाने की स्वतंत्रता के मुलभुत अधिकारों का ही हनन है. मजदुर संगठन समिति हाल ही में डोली मजदूर मोतीलाल बास्के की फर्जी मुठभेड़ दिखाकर की गयी हत्या के खिलाफ आवाज उठा रही है. और मोतीलाल बास्के को न्याय मिले इसलिए चल रहे आन्दोलन का भाग है जिसमे विभिन्न राजनैतिक दल भी सहभागी है. मजदुर संगठन समिति पर लगाया गया प्रतिबंध मोतीलाल बास्के की हत्या के मुद्दे को दबाने का और मजदूरो के संघटित होते आवाजो को दबाने का प्रयास है.हम मजदूर संगठन समिति (एम्.एस.एस.) पर झारखंड सरकार द्वारा बिना किसी ग्राह्य कारण से प्रतिबंधित किये जाने का विरोध करते है. और इस प्रतिबंध को तुरंत हटाया जाये ये मांग करते है.

यह पहली बार नहीं है की सरकार ने जन संगठनों को माओवादी करार देकर उन्हें दबाने के प्रयास किया हो, बल्कि पिछले कुछ वर्षो में जन आंदोलनों को दबाने के लिए सरकार की यही कार्यप्रणाली बन गयी है. इसी के तहद संगठनों, कार्यकर्तायों और प्रभावित समुदायों पर प्रतिबंध लाना, फर्जी मुकदमो में फ़साना, उन्हपर युएपीए एवं अन्य जनविरोधी कठोर कानूनों का इस्तेमाल करना आम बात हो गयी है.

यह एक ऐसा समय है जब लोंगो की ताकत बढ़ रही है और बड़े पैमाने पर जन आन्दोलन ब्राह्मणवादी-फासीवादी सरकारों एवं उनके कोर्पोरेट एजेंडे को नाकाम कर रहे है. इस माहौल में जन आन्दोलनों को माओवादी फ्रंट या देशद्रोही यादी करार देना लोगों के आन्दोलनों को दबाने का एक तरीका है. हम सरकार के इस निति का कड़ा विरोध करते है.

यह समय है की, वास्तविकता में लोकतंत्र और संविधानिक अधिकारों का समर्थन कर रहे जन आन्दोलनों को दबाने के लिए दमनकारी तरीकों की खोज करने के बजाये सरकार ने राजनैतिक समाधानों की तलाश करनी चाहिए और अपनी नीतियों में खामियों की जाँच करनी चाहिए.

हम देश भर में फैले हुए जनसंगठनों, जनवाद पसंद राजनैतिक दलों, प्रगतिशील ट्रेड यूनियनों, मानवाधिकार संगठनो, महिला संगठनों, अध्यापक-छात्र संगठनों तथा आम जनता से अपील करते है की वे दामोदर तुरी इनकी रिहाई के लिए आवाज उठाएं, विस्थापन विरोधी जन विकास आन्दोलन को दबाने के सरकार के प्रयासों का पुरजोर विरोध करे, साथ ही मजदूर संगठन समिति पर लगाये गए प्रतिबंध को हटायें जाने की मांग रखे एवं झारखंड सरकार के इस फासीवादी-लोकतंत्र विरोधी दमन नीतियों का विरोध करे.

हम फिर से किसी भी तरह के असंतोष को दबाने के लिए लोगों के जन आन्दोलनों को लेबल करने के राज्यसत्ता के इस दमनकारी कृत्य की निंदा करते है. और हम लोगो के साथ संघर्ष में खड़े रहने की विस्थापन विरोधी जन विकास आन्दोलन की प्रतिबन्धता को फिरसे दोहराते है. जन विरोधी योजनायों के चलते हुए अन्याय के खिलाफ, हम सभी प्रकार के विस्थापन के खिल्फा हमारी एकजुट संघर्ष को आगे बढ़ाएंगे, ताकि भूमि और संसाधनों पर दलितों, आदिवासियों, किसानों, मजदूरो के अधिकार को प्रस्तापित कर जन केन्द्रित विकासप्रक्रिया के निर्माण के संघर्ष को आगे बढ़ा पाए.

जारीकर्ता:

विस्थापन विरोधी जन विकास आन्दोलन

(विस्थापन नहीं, विनाश नहीं, विपन्नता नहीं, मौत नहीं, पुनर्वास नहीं, बदलाव हो-समानता और न्याय आधारित)

केन्द्रीय संयोजक समिति,

त्रिदिब घोष, माधुरी, प्रशांत पायीकरे, जे. रमेश, दामोधर तुरी, महेश राउत

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