भीमसिंह की अपने सभी दोस्तों से अनुच्छेद 35(ए) पर विचार-विमर्श करने की अपील

उन्होंने कहा कि भारतीय संविधान कहता है कि अनुच्छेद 35(ए) जम्मू-कश्मीर के लोगों की खुशहाली और राजनीतिक संरक्षण के लिए है। ...

भीमसिंह की अपने सभी दोस्तों से अनुच्छेद 35(ए) पर विचार-विमर्श करने की अपील

नेशनल पैंथर्स पार्टी के सुप्रीमो एवं स्टेट लीगल एड कमेटी के कार्यकारी चेयरमैन प्रो.भीमसिंह ने आज एक वक्तव्य में कहा कि मैंने अनुच्छेद 35(ए) के सम्बंध में कई कश्मीर के गणमान्य लोगों के, जिनमें से मेरे कई पुराने दोस्त हैं, राजनीतिक वक्तव्यों को देखा और सुना है और अभी भी मेरे कुछ दोस्त अनुच्छेद 35(ए) के सम्बंध में टिप्पणी कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि भारतीय संविधान कहता है कि अनुच्छेद 35(ए) जम्मू-कश्मीर के लोगों की खुशहाली और राजनीतिक संरक्षण के लिए है।

उन्होंने कहा कि मैं उन सभी लोगों से जो इसकी रक्षा कर रहे हैं, कहना चाहता हूं कि अनुच्छेद 35(ए) के इतिहास का अध्ययन करें, जिससे उन्हें पता चलेगा कि इस अनुच्छेद से जम्मू-कश्मीर में भारतीय नागरिकों को उनके मौलिक अधिकारों से वंचित रखने के लिए लागू किया गया था, जिनकी हर भारतीय नागरिक को भारतीय संविधान में गारंटी दी गयी है। मैं अपने दोस्तों से कुछ सवाल करना चाहता हूं कि अनुच्छेद 35(ए) को किसने बनाया? राष्ट्रपति को इसको लागू करने की क्या संवैधानिक शक्ति प्राप्त थी? अनुच्छेद 35(ए) के क्या दुष्प्रभाव हैं? किस तरह एक राष्ट्रपति अध्यादेश जम्मू-कश्मीर में रहने वाले भारतीय नागरिकों को 70 वर्ष तक उनके मौलिक अधिकारों से वंचित रख सकता है?

उन्होंने कहा कि मैं सभी दोस्तों से विनती करना चाहूंगा कि वे अनुच्छेद 35(ए) के प्रभावों का अध्ययन करें। आश्चर्य की बात है कि जो लोग भारतीय संविधान पर विश्वास नहीं करते हैं और भारतीय संविधान का विरोध करते हैं, वे जम्मू-कश्मीर के पूर्व शासकों की अनुच्छेद 35(ए) की रक्षा करने के लिए समर्थन करते हैं। उन्होंने कहा कि वे सभी दोस्तों के साथ अनुच्छेद 35(ए) के फायदे और नुकसान के सम्बंध में मिल-बैठकर विचार-विमर्श करने के लिए हर समय तैयार हैं।

उन्होंने कहा कि कश्मीर के कुछ अवसरवादी राजनीतिक समूह इस सत्तावादी, गैरकानूनी और असंवैधानिक अनुच्छेद 35(ए) के नाम पर जम्मू-कश्मीर के लोगों को गुमराह कर रहे हैं।

उन्होंने कहा अनुच्छेद 35(ए) असंवैधानिक है, क्योंकि यह उस व्यक्ति ने लागू किया जो उसका कोई अधिकार प्राप्त नहीं था। उन्होंने कहा कि अनुच्छेद 35(ए) जम्मू-कश्मीर सरकार को राज्य के लोगों को मौलिक अधिकारों से वंचित करने का अधिकार देता है। उन्होंने वकील समुदाय, सामाजिक कार्यकर्ता और राजनीतिक दलों से अनुरोध किया कि वे अनुच्छेद 35(ए) का अध्ययन करके अपनी राय दें कि अनुच्छेद 35(ए) जम्म्मू-कश्मीर में रहने वाले भारतीय नागरिकों के मौलिक अधिकारों पर हमला नहीं है।

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