आत्मिक शक्ति को दें बढ़ावा – असाइ गुरुजी

यक्ति के भीतर की आत्मिक शक्ति ही उसे कार्य करने के लिए उत्‍साहित और प्रोत्‍साहित करती है। वर्तमान में नया करने की ऊर्जा के लिए हमें आत्मिक शक्ति को बढ़ावा देना चाहिए।...

वर्धा, 20 फरवरी 2018 : किसी भी कार्य को सम्‍पन्‍न करने के लिए आत्‍म बल की अधिक जरूरत होती है। व्‍यक्ति के भीतर की आत्मिक शक्ति ही उसे कार्य करने के लिए उत्‍साहित और प्रोत्‍साहित करती है। वर्तमान में नया करने की ऊर्जा के लिए हमें आत्मिक शक्ति को बढ़ावा देना चाहिए।

उक्‍त विचार जापान में जापान-भारत सर्वोदय मैत्री संघ के कार्यकर्ता, वर्धा स्थित शांति स्‍तूप के संरक्षक असाइ गुरुजी ने व्‍यक्‍त किये। उन्‍होंने हाल ही में महात्‍मा गांधी अंतरराष्‍ट्रीय हिंदी विश्‍वविद्यालय में भेंट देकर विश्‍वविद्यालय के प्रतिकुलपति प्रो. आनंद वर्धन शर्मा के साथ चर्चा की तथा भाषा विद्यापीठ में विद्यार्थी तथा अध्‍यापकों के साथ बातचीत की। इस अवसर वे बोल रहे थे। उनके साथ अशोक मेहरे, डॉ. हेमचंद्र वैद्य और विवि के जनसंपर्क अधिकारी बी. एस. मिरगे थे। उन्‍होंने जापान में शिक्षा और संस्‍कृति का उल्‍लेख करते हुए कहा कि जापान में बुद्ध धर्म के साथ संस्‍कृति का विकास हुआ है।

असाइ गुरुजी ने इ-शिक्षा पर जोर देते हुए बताया कि इससे दुनिया के किसी भी कोने में शिक्षा और संस्‍कृति का आसानी से पहुचांया जा सकता है। अहिंसा और सेवा एक ही सिक्‍के के दो पहलू है और यह विचार बुद्ध और महात्‍मा गांधी के दर्शन के केंद्रीय तत्‍व है। इसी का प्रचार हम जापान-भारत सर्वोदय मैत्री संघ के माध्‍यम से कर रहे है।

विश्‍वविद्यालय में प्रथम आगमन पर उनका स्‍वागत प्रतिकुलपति प्रो. शर्मा ने विश्‍वविद्यालय के प्रकाशन भेंट कर किया। बाद में उन्‍होंने भाषा विद्यापीठ में जापानी, स्‍पेनिश, चीनी और फ्रेंच भाषा के विद्यार्थियों के साथ चर्चा की। उन्‍होंने डॉ. भदंत आनंद कौसल्‍यायन बौद्ध अध्‍ययन केंद्र को भी भेंट दी। उन्‍होंने केंद्र के प्रभारी निदेशक डॉ. सुरजीत कुमार सिंह के साथ बौद्ध साहित्‍य और पालि भाषा को लेकर चर्चा की। इस अवसर पर डॉ. अनिर्बाण घोष, डॉ. रवि कुमार, डॉ. सन्‍मति जैन, डॉ. संदीप कुमार, अमन ताकसांडे सहित विद्यार्थी उपस्थित थे।  

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