उत्तर प्रदेश में दलितों को सबक सिखाने पर उतारू है योगी सरकार- दारापुरी

प्रशासन द्वारा चन्द्रशेखर को कोर्ट में सरेंडर करने से रोकने को प्रतिष्ठा का प्रश्न बना लेना दलित विरोधी मानसिकता का प्रतीक नहीं है? ...

लखनऊ, 28 मई, 2017

पूर्व आई.जी. तथा संयोजक, उत्तर प्रदेश जनमंच एस.आर. दारापुरी ने कहा है कि योगी सरकार सहारनपुर में पीड़ित दलितों को सबक सिखाने पर उतारू है।

उन्होंने कहा है कि एक तरफ सरकार भीम आर्मी के नाम पर तीन दर्जन दलित युवकों को गिरफ्तार करती है जिन में 80% छात्र हैं, दूसरी तरफ शब्बीरपुर में 5 मई को दलितों पर हमले के दोषियों में से केवल 9 लोगों को ही गिरफतार करती है तथा इसके साथ ही हमले के शिकार 9 दलितों को भी गिरफ्तार कर लेती है तथा उसके बाद कोई गिरफ्तारी नहीं करती है।

यह भी ज्ञातव्य है कि 9 मई को भीम आर्मी की प्रशासन के साथ झड़प भी प्रशासन की ही गलत कार्रवाई का परिणाम थी, क्योंकि उस दिन जिला प्रशासन द्वारा ही भीम आर्मी के सदस्यों को शब्बीरपुर के मामले में पीड़ितों को मुआवजा घोषित न करने तथा हमलावरों की गिरफ्तारियां न करने को लेकर रविदास छात्रावास में शांतिपूर्ण ढंग से की जाने वाली मीटिंग न करने देने, उन्हें गाँधी पार्क में भेजने तथा वहां पर भी उन पर लाठी चार्ज करके खदेड़ देने के कारण ही हुयी थी। इसके बाद जिला प्रशासन ने शब्बीरपुर के दलितों पर हमले के मामले में न तो शीघ्रता से मुयाव्ज़े की घोषणा की और न ही हमलावरों की गिरफ्तारियां ही कीं. इससे दलितों को आभास हुआ कि प्रशासन दलितों के प्रति उपेक्षापूर्ण रवैया तथा हमलावरों के प्रति नर्म रुख अपना रहा है।

कल उत्तर प्रदेश के गृह सचिव का यह बयान कि “भीम आर्मी के संस्थापक चन्द्र शेखर के सरेंडर करने के मंसूबों को पूरा नहीं होने दिया जायेगा” भी योगी सरकार का दलितों को सबक सिखाने की कार्रवाई का ही प्रतीक है। यह सर्विदित है कि किसी भी आरोपी को पुलिस अथवा कोर्ट के सामने सरेंडर करने का अधिकार है। क्या इस मामले में प्रशासन द्वारा चन्द्रशेखर को कोर्ट में सरेंडर करने से रोकने को प्रतिष्ठा का प्रश्न बना लेना दलित विरोधी मानसिकता का प्रतीक नहीं है? जहाँ तक उसकी पुलिस द्वारा गिरफ्तारी का प्रश्न है उसने तो 21 मई को दिल्ली में उत्तर प्रदेश पुलिस के सामने गिरफ्तारी हेतु आत्मसमर्पण किया ही था। तब उसकी गिरफ्तारी क्यों नहीं की गयी?

एक तरफ जहाँ शब्बीरपुर में दलित लड़कियों की शादी में राजपूतों की हिस्सेदारी उनके गाँव में जातीय सौहार्द को पुनर्स्थापित करने के प्रयास का प्रतीक है वहीँ प्रशासन द्वारा भीम आर्मी की आड़ में दलितों का उत्पीड़न करना तेजी से लौट रहे जातीय सौहार्द को बिगाड़ने का प्रयास है। अतः जनमंच जोगी सरकार से यह मांग करता है कि सहारनपुर में भीम आर्मी की आड़ में दलितों को सबक सिखाने के लिए की जा रही उत्पीड़न की कार्रवाही को तुरंत रोका जाये, शब्बीरपुर के दोषियों को गिरफ्तार किया जाये, स्थिति को सही ढंग से सँभालने में चूक करने वाले अधिकारियों को दण्डित किया, जातीय नव सामंतों के बढ़े हुए मनोबल पर रोक लगाई जाये तथा हमले में घायल लोगों के उचित इलाज़ की व्यवस्था की जाये।

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