राष्ट्रीय एकता आंदोलन, एकमात्र उपाय न्याय व अधिकार का : भीमसिंह

हाइलाइट्स

बैठक में यह भी साफ किया गया है कि आज का संविधान या न्यायपालिका या राजनीतिक प्रणाली देश के अंदर न्याय-अधिकार दिलवाने के लिए कामयाब नहीं रहा। राजनीति और चुनाव का प्रयोग किया गया देश के अंदर जातिवाद, साम्प्रदायिकता तथा घृणा फैलाने के लिए, जिस देश के महान व्यक्तियों ने देश के उत्थान, उन्नति, न्याय व अधिकार के लिए बलिदान दिये थे, उनका मिशन भारत को जोड़ने का और भारत के शांति, उन्नति और भाईचारे के संदेश को दुनियाभर में लेजाने का था, परंतु आज राजनीतिज्ञों का मिशन संदेहास्पद लगता है।

नई दिल्ली। राजधानी दिल्ली में नेशनल पैंथर्स पार्टी के मुख्य संरक्षक प्रो. भीमसिंह की अध्यक्षता में दो-दिवसीय एक बैठक हुई, जिसमें राजनीतिक एवं सामाजिक कार्यकर्ताओं, जानेमाने लोगों ने हिस्सा लिया और वकील, पत्रकार भी मौजूद थे। इस बैठक में देश में फैल रही अराजकता के बारे में सोच-विचार किया गया और निर्णय लिया गया कि राष्ट्रीय एकता, अखंडता, भाईचारे की सशक्त करने के लिए एक नया आंदोलन चलाने की जरूरत है, जिसका लक्ष्य जन-जन तक साफ शब्दों में पहुंच सके कन्याकुमारी से कश्मीर तक और इम्फाल (मणिपुर) से लेकर द्वारका (गुजरात) तक भारत की उन्नति, एकता, भाईचारा (साम्प्रदायिकता) की मजबूती ही भारत को 21वीं सदी में प्रगति की ओर ले जा सकता है।

इस बैठक में यह भी साफ किया गया है कि आज का संविधान या न्यायपालिका या राजनीतिक प्रणाली देश के अंदर न्याय-अधिकार दिलवाने के लिए कामयाब नहीं रहा। राजनीति और चुनाव का प्रयोग किया गया देश के अंदर जातिवाद, साम्प्रदायिकता तथा घृणा फैलाने के लिए, जिस देश के महान व्यक्तियों ने देश के उत्थान, उन्नति, न्याय व अधिकार के लिए बलिदान दिये थे, उनका मिशन भारत को जोड़ने का और भारत के शांति, उन्नति और भाईचारे के संदेश को दुनियाभर में लेजाने का था, परंतु आज राजनीतिज्ञों का मिशन संदेहास्पद लगता है।

प्रो.भीमसिंह की अध्यक्षता में फैसला लिया गया कि भारत के मानवता के मिशन को प्रोत्साहित करने के लिए बनेगा नया आंदोलन-राष्ट्रीय एकता आंदोलन। इस आंदोलन का लक्ष्य चुनाव लड़ना नहीं होगा, बल्कि नई पीढ़ी को वह रास्ता दिखाना होगा, जिस रास्ते को हमारे पूर्वजों ने मानवता को उजागर करने के लिए बलिदान दिया था। यही रास्ता है भारत में राष्ट्रीय एकता को मजबूत करने का और आपसी भाईचारे को बढ़ावा देने का। यही रास्ता है जिसका उल्लेख भारतीय संविधान के अध्याय-3 में मौलिक अधिकार किया है। यही रास्ता है और यही मिशन है राष्ट्रीय एकता और मानवता को मजबूत करने का। वोट, चुनाव और अदालतें इस मिशन को पूरा नहीं सकते हैं। यह मिशन होगा नई पीढ़ी के हाथ मानवता के झंडे के साथ।

हस्तक्षेप से जुड़े अन्य अपडेट लगातार हासिल करने के लिए हमें
facebook फेसबुक पर फॉलो करे.
और
facebook ट्विटर पर फॉलो करे.
"हस्तक्षेप"पाठकों-मित्रों के सहयोग से संचालित होता है। छोटी सी राशि से हस्तक्षेप के संचालन में योगदान दें।