"भाजपा - भारत छोड़ो" – 9 अगस्त के राष्ट्रव्यापी आंदोलन को माकपा ने दिया समर्थन

भाजपा और मोदी ने चुनावों के दौरान इस देश और छत्तीसगढ़ के मजदूर-किसानों, दलित-आदिवासियों, सैनिकों व कमजोर तबकों से 'अच्छे दिन' लाने का वादा किया था, लेकिन सब 'जुमले' साबित हुए....

"भाजपा - भारत छोड़ो" – 9 अगस्त के राष्ट्रव्यापी आंदोलन को माकपा ने दिया समर्थन

रायपुर, 05 अगस्त। मार्क्सवादी कम्युनिस्ट पार्टी ने मजदूर-किसान-दलितों व पूर्व सैनिकों के संगठनों द्वारा 9 अगस्त को "भाजपा – भारत छोड़ो" के नारे पर आहूत राष्ट्रव्यापी आंदोलन का समर्थन किया है. इस दिन दलित-आदिवासी संगठन जहां 'भारत बंद' करेंगे, वहीं सीटू, किसान सभा, आदिवासी अधिकार मंच, अखिल भारतीय अंबेडकर महासभा और भारतीय पूर्व-सनिक आंदोलन की अगुआई में पूरे देश में लाखों लोग मोदी सरकार की जनविरोधी नीतियों के खिलाफ 'सत्याग्रह व जेल भरो' आंदोलन में हिस्सा लेंगे. 

यह जानकारी माकपा राज्य सचिवमंडल ने अपने एक बयान में दी.

माकपा राज्य सचिव संजय पराते ने बताया कि भाजपा और मोदी ने चुनावों के दौरान इस देश और छत्तीसगढ़ के मजदूर-किसानों, दलित-आदिवासियों, सैनिकों व कमजोर तबकों से 'अच्छे दिन' लाने का वादा किया था, लेकिन सब 'जुमले' साबित हुए. बेरोजगार काम पाने के लिए भटक रहे हैं, तो मजदूर न्यूनतम वेतन पाने की लड़ाई रहे हैं. सार्वजनिक क्षेत्र के उद्योग कॉर्पोरेटों की लूट-खसोट के लिए खोले जा रहे हैं. किसान स्वामीनाथन आयोग की सी-2 फार्मूले पर आधारित लाभकारी समर्थन मूल्य से वंचित हैं और कर्जमुक्ति के लिए लड़ रहे हैं. दलितों-आदिवासियों पर अत्याचार बढ़ा है, उनके लिए संवैधानिक सुरक्षा के प्रावधान कमजोर किए गए हैं और आरक्षण ही खतरे में हैं. आदिवासी जल-जंगल-जमीन से वंचित होकर विस्थापित हो रहे हैं और वनाधिकार क़ानून, पेसा और 5वीं अनुसूची के प्रावधानों पर अमल के लिए आवाज उठाने वालों को राजकीय दमन का शिकार बनाया जा रहा है. सेवानिवृत्त सैनिक आज भी 'वन रैंक-वन पेंशन' के लिए लड़ रहे हैं, जबकि रक्षा क्षेत्र में अरबों रुपयों के घोटाले उजागर हो रहे हैं.

माकपा ने कहा है कि 9 अगस्त का दिन सांप्रदायिक-फासीवादी ताकतों के खिलाफ आम जनता की एकजुटता का और देश के बेहतर भविष्य के लिए संघर्षों का दिन होगा. पार्टी ने अपनी सभी ईकाईयों को इस आंदोलन में हर संभव मदद देने के निर्देश दिए हैं.

 

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