मेलॉडी किसी भी गीत की रूह होती है - जान कुमार सानू

पिता की तरह, जो मेलोडी पर भारी भरोसा रखते थे, जान कुमार सानू भी मानते हैं कि "मेलोडी एक गाने की आत्मा है।...

(न्यूज़ हेल्पलाइन)

प्रसिद्ध गायक कुमार सानू के पुत्र जान कुमार सानू, जो अपने पिता के सदाबहार गीत 'अकेले हम अकेले तुम' के सदाबहार गीत को अपने अंदाज़ में पेश कर के गायक के तौर पर डेब्यू कर रहे है, मानते है की किसी भी गीत की रूह या उसकी आत्मा उसकी मेलोडी होती है।

पिता की तरह, जो मेलोडी पर भारी भरोसा रखते थे, जान कुमार सानू भी मानते हैं कि "मेलोडी एक गाने की आत्मा है। मेरा मुख्य लक्ष्य गीतों में मेलोडी को वापस लाना है, वह मेलोडी जिस ने बॉलीवुड पर कभी राज किया था” जान के पिता कुमार सानु ने '1942: ए लव स्टोरी' और 'आशिकी' जैसी फिल्मों के रोमांटिक गानों से अपने समय में धूम मचा दी थी।

एक स्टार के बेटे के लिए अपने मशहूर पिता के नक्शेकदम पर चलना आसान नहीं हैं, खासकर जब आपके पिता एक सिंगिंग लीजेंड हो. 90 के दशक के मेलोडी किंग, कुमार सानू के बेटे जान कुमार सानू की कहानी भी कुछ ऐसी ही हैं, जान कुमार सानू को पता था कि जब वो सिंगिंग डेब्यू करेंगे तो उन पर काफी प्रेशर होगा. हालांकि, इस युवा गायक को अपने सिंगिंग टैलेंट पर काफी भरोसा हैं.

उन्होंने अपने पिता के सदाबहार रोमांटिक गीत, 'दिल मेरा चुराया क्यूँ' को रिक्रिएट किया हैं, जो की फिल्मकार मंसूर खान निर्देशित सुपर हिट फिल्म 'अकेले हम अकेले तुम' का खुबसूरत गाना हैं.

गाने के विडियो में मिस्टर इंडिया रोहित खंडेलवाल और फेमिना मिस इंडिया इंटरनेशनल 2011, अंकिता शोरी ने काम किया हैं.

अपने रिलीज के हफ्ते भर में गाना वायरल हो गया हैं, यू-टियूब पर गाना 20 लाख से ज्यादा बार सराहा जा चूका हैं, गाने में जान कुमार भी पियानो बजाते नजर आते हैं! 'दिल मेरा चुराया क्यों' भी दिल को छुने वाला गाना हैं. जान कुमार सानु की मखमली आवाज इस गाने में और मधुरता और रोमांस घोलती हैं.

हिंदी संगीत में आने से पहले, जान कुमार सानू एक बंगाली गाना रिकॉर्ड कर चुके हैं, जिसका शीर्षक 'चिरो द्नी तूमी जे अमर' है, जिससे उन्होंने किशोर कुमार को श्रद्धांजलि अर्पित की थी।

जान कुमार सानू निर्देशकों के साथ वार्तालाप भी कर रहे हैं और जल्द ही अपने बॉलीवुड प्लेबैक कैरियर की शुरुआत करेंगे। "मै बॉलीवुड संगीत को एक नए स्तर पर ले जाना चाहता हूं,"जान ने कहा, जो एक प्रशिक्षित शास्त्रीय गायक भी हैं।

उनकी मां रीटा भट्टाचार्य ने भी अपने बेटे की प्रशंसा करते हुए कहा “जान ने छोटी उम्र से ही गायन शुरू किया था। वह गिटार और पियानो बजा सकता है. उन्हें रींकु दासगुप्ता और प्रसिद्ध गायक पंडित रतन मोहन शर्मा ने प्रशिक्षित किया है”

हिन्दुस्तानी शास्त्रीय संगीत के अलावा, जान पश्चिमी संगीत का भी भलीभांति ज्ञान रखते है. उन्होंने बचपन में शांतनु मोइत्रा और शंकर-एहसान-लॉय के लिए कई जिंगल्स गाए हैं. जान ने आमिर खान निर्देशित तारे जमीन पर (2000) के सोंग 'बम बम बोले' में भी काम किया हैं. उन्होंने आठ साल की उम्र में सोनू निगम और बाबुल सुप्रियो के साथ 'एस्केप टू तालिबान' (2003) में भी गाना गाया है।

कॉलेज ख़तम करने के बाद, जान ने बॉलीवुड प्लेबैक सिंगिंग पर अपना सारा ध्यान केंद्रित करने के बारे में सोचा! जान को अहसास हैं की हर कदम पर उनकी तुलना उनके पिता कुमार सानू से होने वाली हैं. लेकिन वह अपने आलोचकों को गलत साबित करने के लिए तैयार हैं। वह जानते है कि उनमें वो काबिलियत और दम हैं जो उनकी पहचान बनाने के लिए ज़रुरी है.

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(अ-संपादित विज्ञप्ति)

 

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