गर्म “शेफ” का ठंडा खाना

अपने सबसे छोटे बच्चे तैमूर के चलते लगातार सुर्ख़ियों में बने सैफ अली खान फ़िलहाल अपने रेस्टोरेंट की वजह से सुर्ख़ियों में हैं. ...

हाइलाइट्स

इसी के साथ निर्देशक मिलिंद धैमेंढे की फिल्म तू है मेरा संडे रिलीज़ हुई जिसमें वरुण सोबती, शाहना गोस्वामी, मानवी दुग्गल और विशा मल्होत्रा जैसे कलाकार हैं. यह फिल्म है उन लोगो की जो अपनी ही ज़िन्दगी की परेशानियों से जूझ रहे हैं और हर किसी की अपनी अपनी दिक्कते हैं।

यूं तो अभिनेता सैफ अली खान की फ़िल्में इन दिनों कोई खास कमाल नहीं कर रहीं लेकिन अपने सबसे छोटे बच्चे तैमूर के चलते सैफ लगातार सुर्ख़ियों में बने हुए हैं. खुद सैफ को पिछले दिनों कहना पड़ेगा कि मीडिया तैमूर को हीरो बना कर छोड़ेगा. फ़िलहाल सैफ अपने रेस्टोरेंट की वजह से सुर्ख़ियों में हैं. देखते हैं फिल्म समीक्षक सुनील पाराशर की ये रिपोर्ट   

सैफ की निजी ज़िंदगी की बात करें तो उनके तीन बच्चे हैं इब्राहिम, सारा और तैमूर हालाँकि तैमूर के आते ही उसकी ख़ूबसूरती और नाम के चर्चे आम बने हुए हैं और उसकी थोड़ी सी भी झलक लोग देखना चाहते है और दूसरी तरफ देखें तो सैफ की फ़िल्में इन दिनों कोई कमाल नहीं कर रही हैं और उनके एक्शन को लोग ज्यादा पसंद भी नहीं करते फिर भी एक्शन और कॉमेडी से थोड़ा दूर इस सप्ताह उनकी फिल्म शेफ रिलीज़ हुयीं, जो एक बिखरते हुए परिवार की कहानी है लेकिन वो अपने बेटे की ज़िन्दगी को खुशगवार बनाना चाहते हैं, निर्देशक राजा कृष्ण मेनन की इस फिल्म में सैफ अली खान के साथ स्वर कामले, मिलिंद सोमण, पदम् प्रिया, चन्दन राय सान्याल हैं।

निर्देशक राजा कृष्ण मेनन का कहना है कि एयरलिफ्ट के बाद यह मेरी अगली फिल्म है जिसमें मैंने इमोशन और पारिवारिक जीवन को मुख्य आधार बनाया है और सैफ ने वाकई इस फिल्म में बहुत संजीदगी से काम किया है, वैसे यह फिल्म हॉलीवुड की फिल्म से प्रेरित है।

फिल्म की कहानी की बात करें तो रोशन कालरा यानि सैफ एक जाना माना शेफ है जो दिल्ली जैसे शहर में अपनी पहचान बनाता हुआ न्युयोर्क चला जाता है जहाँ लोग उसके खाने को काफी पसंद करते हैं  लेकिन एक दिन खाने में कुछ गड़बड़ी होने की वजह से एक ग्राहक उससे कुछ बदतमीजी करता है और वो उसे एक दो घूँसे जड़ देता है, जिसकी वजह से उसे अपनी नौकरी से हाथ धोना पड़ता है. रोशन कालरा यानि सैफ को लगता है की वो इतना काबिल है कि उसके साथ उसका बाकी स्टाफ भी काम छोड़ देगा, लेकिन ऐसा नहीं होता. सब अपनी ज़िन्दगी में रमे हुए हैं और सैफ काफी निराश होकर भारत आ जाता है, जहाँ उसकी पत्नी राधा यानि पदमप्रिय जिससे उसका तलाक हो चुका है और 10 -11 साल का उसका बेटा अरमान यानि स्वर कामले के साथ रहता है।

राधा की ज़िन्दगी में बीजू यानि मिलिंद सोमण आ चुका है जो उसको आईडिया देता है कि तुम एक चलता फिरता रेस्टोरेंट खोलो जिससे तुम नई जगह भी देख सकते हो और नई चीज़े बना भी सकते हो, और रोशन कालरा यानि सैफ एक पुरानी बस खरीदकर उसे अपने मन मर्जी मुताबिक बनाकर काम शुरू करता है, उस गाड़ीनुमा रेस्टोरेंट में वो अपने बेटे को लेकर गोवा, मुंबई कई जगह होता हुआ वो दिल्ली पहुँचता है और अब उसकी ज़िन्दगी में उसे नया रास्ता मिल चुका है और रिश्तो को समझना भी उसे आ गया है।

पूरी फिल्म में सैफ और उनका बेटा स्वर छाए हुए हैं लेकिन यह फिल्म उतना मजा नहीं दे पाती जितना हो सकता था। बाकि सभी कलाकारों का कार्य सामान्य लगा है और मिलिंद सोमण को काफी समय बाद देखकर अच्छा लगता है फ़िल्म का एन्ड टिपिकल हिंदी फिल्मो जैसा ही है।

इसी के साथ निर्देशक मिलिंद धैमेंढे की फिल्म तू है मेरा संडे रिलीज़ हुई जिसमें वरुण सोबती, शाहना गोस्वामी, मानवी दुग्गल और विशा मल्होत्रा जैसे कलाकार हैं. यह फिल्म है उन लोगो की जो अपनी ही ज़िन्दगी की परेशानियों से जूझ रहे हैं और हर किसी की अपनी अपनी दिक्कते हैं। जैसे अरुण आनंद यानि वरुण सोबती जो कॉर्पोरेट जगत में नौकरी करता है और वहां से हटना चाहता है और शादी के नाम से उसे चिढ़ सी है वही डोमनिक यानि विशा मल्होत्रा जो अपनी जॉब से तो संतुष्ट है लेकिन उसका बड़ा भाई उसके हर काम में टांग अड़ाता है वही राशिद यानि अविनाश तिवारी एक दिल फेंक आशिक के रूप में है जिसे हर लड़की से प्यार हो जाता है जैसे पांच छः किरदार है जो दोस्त है और जिनको संडे का इंतज़ार रहता है क्योकि संडे को वो समुंद्र के पास जाकर फुटबॉल खेलते है और वो उनकी ज़िन्दगी का अहम हिस्सा है। इसी बीच उनकी ज़िन्दगी में एक बुजुर्ग आता है जो उनकी वजह से अपनी याद्दाश्त खो चुका है और उसकी बेटी काव्य रंगनाथन यानि शाहना गोस्वामी इनके संपर्क में आती है जो उनके जीवन को एक नयी दिशा देती है यानि एक सोशल काम से जुड़कर वो फुटबॉल खेलने जाते है और खेलने से पहले उस जगह को साफ़ करते है और साफ़ सफाई की मुहीम को आगे बढ़ाते है, धीरे धीरे उनकी ज़िन्दगी में परेशानियों की जगह आ जाती है खुशिया।

वैसे यह फिल्म रिलीज़ से पहले ही कई अवार्ड जीत चुकी है और साथ ही कई बड़े कलाकारों ने इस फिल्म को सराहा है।

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