भारतीय मूल के वैज्ञानिकों ने की शराब को बर्दाश्त करने वाले मस्तिष्क प्रोटीन की पहचान

भारतीय मूल के वैज्ञानिकों ने की शराब को बर्दाश्त करने वाले मस्तिष्क प्रोटीन की पहचान...

भारतीय मूल के वैज्ञानिकों ने की शराब को बर्दाश्त करने वाले मस्तिष्क प्रोटीन की पहचान

नई दिल्ली, 7 जून। वैज्ञानिकों ने एक मस्तिष्क प्रोटीन की पहचान की है, जो व्यक्ति के शराब पीने की क्षमता से जुड़ा हुआ है। इन वैज्ञानिकों में एक भारतीय मूल का भी है। इस शोध से शराब की लत से परेशान लोगों के इलाज का मार्ग प्रशस्त हो सकता है।

शोधकर्ताओं के दल ने पाया कि एमयूएनसी 13-1 मस्तिष्क प्रोटीन, शराब पीने की क्षमता के विकास में एक महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। यह शोध साइंस डेली में प्रकाशित हुआ है। शोधकर्ताओं में भारतीय मूल के जयदीप दास व सत्यब्रत पानी भी शामिल हैं। जयदीप दास टेक्सास के ह्यूस्टन विश्वविद्यालय के कॉलेज ऑफ फार्मेसी में औषधीय रसायन विज्ञान में असिस्टेंट प्रोफेसर हैं, जबकि सत्यब्रत पानी भी ह्यूस्टन विश्वविद्यालय के कॉलेज ऑफ फार्मेसी में रिसर्च एसोसिएट हैं उन्होंने National Centre For Cell Science, Pune से शिक्षा प्राप्त की है।

Joydip Das, Ph.D. Associate Professor of Medicinal Chemistry
Joydip Das, Ph.D.
Associate Professor of Medicinal Chemistry University of Houston College of Pharmacy

अन्य शोधकर्ताओं में जॉयदीप दास व सत्यब्रत पानी के अलावा षियु सु, केविन बैनी, ख़दीजा तरीके, ओला -अल-हातिम, कैथलीन गजेव्स्की, ज. लेइ लेझ, व ग्रेग्ग रोमन शामिल हैं।

शोधकर्ताओं के मुताबिक,

"शराब की लत दुनिया भर में सबसे महत्वपूर्ण मानसिक स्वास्थ्य समस्याओं में एक है। लत में पड़ने के दौरान एथेनाल या शराब व्यक्ति के व्यवहार व दिमाग में कैसे बदलाव लाते हैं, यह समझना एक बड़ी चुनौती है।"

शोधकर्ताओं के मुताबिक इस अवस्था में इसके प्रति सहनशीलता विकसित होना एक महत्वपूर्ण कदम है।

शोधकर्ताओं के मुताबिक

"यदि कोई व्यक्ति एक बार शराब पीकर उसे बर्दाश्त कर सकता है तो वह दूसरी बार और फिर पीता है। यदि हम शराब को एमयूएनसी13-1से बंधने से रोक सकें तो यह शराबियों में शराब को बर्दाश्त करने की क्षमता घटाने में मददगार होगा। यदि हम शराब बर्दाश्त करने की क्षमता घटा सकें, तो शराब की लत लगने से भी रोक सकते हैं।"

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