सोहराबुद्दीन एन्काउंटर की सुनवाई कर रहे न्यायाधीश की रहस्यमयी हालात में मौत की जांच हो : पूर्व नौसेना प्रमुख

पूर्व नौसेना सोहराबुद्दीन प्रमुख एडमिरल एल. रामदास ने ब्रिजमोहन एच. लोया की मौत की न्यायिक जांच की मांग की है।...

मुंबई, 27 नवंबर। केंद्रीय जांच एजेंसी (सीबीआई) के विशेष न्यायाधीश ब्रिजमोहन एच. लोया की 1 दिसंबर, 2014 को नागपुर की निजी यात्रा के दौरान अचानक हुई मौत पर अब विवाद बढ़ता ही जा रहा है।

पूर्व नौसेना सोहराबुद्दीन प्रमुख एडमिरल एल. रामदास ने ब्रिजमोहन एच. लोया की मौत की न्यायिक जांच की मांग की है।

बता दें न्यायमूर्ति लोया (48) के साथ जिस समय यह हादसा हुआ उस समय वह राजनीतिक रूप से संवेदनशील ए. शेख मुठभेड़ मामले की सुनवाई कर रहे थे। नवंबर 2005 में कथित मुठभेड़ में सोहराबुद्दीन मारा गया था। इस मामले में भाजपा के मौजादा अध्यक्ष अमित शाह भी आरोपी थे लेकिन बाद में वह इससे बरी कर दिए गए थे।

पूर्व एडमिरल रामदास ने मुख्य न्यायाधीश न्यायमूर्ति दीपक मिश्रा को 24 नवंबर को लिखे अपने पत्र को सोमवार को मीडिया के लिए जारी किया। इसमें रामदास ने लिखा है,

"सोहराबुद्दीन (ए शेख) की हत्या की जांच के लिए बम्बई उच्च न्यायालय के मुख्य न्यायाधीश द्वारा नियुक्त न्यायमूर्ति लोया की नागपुर जाने के दौरान रहस्यमय परिस्थिति में मौत हुई है।"

उन्होंने लिखा है कि न्यायमूर्ति लोया को नागपुर की यात्रा पर जाने के लिए प्रेरित करने और इस दौरान उनके साथ रहने वाले दो न्यायाधीशों (न्यायमूर्ति भूषण गवई और न्यायमूर्ति सुनील शुक्रे) की चुप्पी बेहद परेशान करने वाली है।

एडमिरल रामदास ने अपने पत्र में कहा है,

"इस तरह के घटनाक्रम पर न्यायपालिका की निष्क्रियता वास्तव में आश्चर्यजनक है। यह दिवंगत न्यायमूर्ति लोया के परिवार के सदस्यों द्वारा उठाए गए सवालों के संदर्भ में हुए हालिया खुलासों से और अधिक उलझन पैदा करने वाला है जिन्होंने लोया की अचानक मौत की परिस्थितियों में गड़बड़ी की आशंका जताई है।"

उन्होंने कहा कि इस बिंदु पर एक न्यायिक जांच कम से कम परिवार द्वारा उठाए गए सवालों का जवाब देने और लोगों की नजरों में न्यायपालिका की छवि को बनाए रखने के लिए 'बहुत जरूरी' है।

एडमिरल रामदास ने कहा,

"भारतीय नौसेना के पूर्व प्रमुख के तौर पर मैं दृढ़ता से महसूस करता हूं कि इस पूरी घटना पर किसी भी संदेह को दूर करना गंभीर रूप से महत्वपूर्ण है। इसलिए देश और उसके लोगों के बड़े हित और सब से ऊपर संविधान और हमारी कानून व्यवस्था की छवि को बनाए रखने के लिए एक उच्चस्तरीय न्यायिक जांच तुरंत शुरू की जानी चाहिए।"

हस्तक्षेप से जुड़े अन्य अपडेट लगातार हासिल करने के लिए हमें
facebook फेसबुक पर फॉलो करे.
और
facebook ट्विटर पर फॉलो करे.
"हस्तक्षेप"पाठकों-मित्रों के सहयोग से संचालित होता है। छोटी सी राशि से हस्तक्षेप के संचालन में योगदान दें।