महिलाओं के लिए बेहद खतरनाक स्तन कैंसर : डॉ. वी.पी. सिंह

पिछले कुछ सालों में भारत में स्तन कैंसर की चपेट में 50 वर्ष से कम उम्र की महिलाएं ज्यादा आई हैं। भारत में स्तन कैंसर की समस्या 30 से 40 के उम्र में ज्यादा होती है, जबकि पश्चिम में यह 50 साल...

एजेंसी

महिलाओं के लिए बेहद खतरनाक स्तन कैंसर : डॉ. वी.पी. सिंह

Breast cancer is Extremely dangerous for women : Dr. V.P. Singh

पटना, 4 दिसंबर। पटना के सवेरा कैंसर एंड मल्टीस्पेशियल अस्पताल के चर्चित कैंसर रोग विशेषज्ञ डॉ. वी.पी. सिंह ने स्तन कैंसर को महिलाओं के लिए बेहद खतरनाक बताते हुए कहा है कि इससे बचाव के लिए लोगों में जागरूकता लाने की जरूरत है, जिससे समय रहते इसका निदान हो सके। उन्होंने चिंता जताते हुए कहा,

"हमारे देश में आज भी महिलाएं इसके प्रति जागरूक नहीं है।"

एजेंसी के साथ बातचीत में डॉ. सिंह बताया कि अभी हाल में किए गए एक अध्ययन के मुताकिब, 28 में से एक महिला को अपने जीवनकाल में स्तन कैंसर होता है। उन्होंने बताया कि शहरी क्षेत्रों में इस बीमारी के मरीजों की संख्या 22 महिलाओं में से एक जबकि ग्रामीण क्षेत्र में 60 में से एक महिलाएं इस बीमारी से जूझ रही हैं।

उन्होंने कहा कि स्तन कैंसर के आंकड़े के मामले में भारत पश्चिमी देशों से अलग है। उन्होंने कहा कि भारत में स्तन कैंसर की समस्या 30 से 40 के उम्र में ज्यादा होती है, जबकि पश्चिम में यह 50 साल से अधिक आयु वाली महिलाओं में होता है। भारत में इसके प्रति जागरूकता और जांच का अभाव काफी देखने को मिलता है, जो अंतिम समय में महिला और उनके परिजनों को पूरी तरह तोड़ देता है।

उन्होंने बताया,

"पिछले कुछ सालों में भारत में स्तन कैंसर की चपेट में 50 वर्ष से कम उम्र की महिलाएं ज्यादा आई हैं। इसके प्रति जागरूकता का अभाव का अंदाजा इस बात से लगाया जा सकता है कि इसकी पहचान तीसरे या चौथे स्टेज में होता है, जब यह रोग मरीज के लिए खतरनाक हो जाता है।"

उन्होंने दावा करते हुए कहा कि अगर इस बीमारी के प्रारंभिक लक्षण का पता लग जाए, तब इलाज काफी आसान हो जाता है और लगभग 80 प्रतिशत मरीज ठीक हो जाते हैं।

ऐसे मामले में मरीजों को अंधविश्वास से दूर रहने की चेतावनी देते हुए उन्होंने कहा कि ऐसे चक्कर में ओझा-गुणी से दूर रहना चाहिए। उन्होंने इसके लक्षण की बात करते हुए कहा कि स्तन कैंसर में प्रारंभिक तौर पर स्तन के अंदर दो सेंटीमीटर तक की गांठ बनती है और इससे सूजन, हल्का दर्द, शुरू हो सकता है।

उन्होंने कहा,

"अगर शुरुआती दौर में इस बीमारी का पता चल जाए, तब इसका उपचार ऑपरेशन से भी संभव है। इसके अलावा कीमोथेरेपी और रेडियोथेरेपी के जरिए भी उपचार संभव हो गया है। इसके लिए बस जागरूक होने की जरूरत है।"

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