9 अगस्त : मोदी सरकार की विनाशकारी नीतियों के खिलाफ आंदोलन करेंगे महाराष्ट्र, गुजरात, दादरा नगर हवेली के आदिवासी, मच्छीमार, किसान और भूमिपुत्र

मुट्ठीभर लोगों के धंधों को फायदे के लिए करोड़ों लोगों को विस्थापित करने वाली नीतियों को विकास कहे या विनाश..?? और इसकी कीमत हम आम लोगो द्वारा ही क्यों चुकायी जानी चाहिये..??...

9 अगस्त : मोदी सरकार की विनाशकारी नीतियों के खिलाफ आंदोलन करेंगे महाराष्ट्र, गुजरात, दादरा नगर हवेली के आदिवासी, मच्छीमार, किसान और भूमिपुत्र

अंग्रेजों भारत छोड़ो आंदोलन की वर्षगांठ पर आगामी 9 अगस्त को महाराष्ट्र, गुजरात, दादरा नगर हवेली के आदिवासी, मच्छीमार, किसान और भूमिपुत्र मोदी सरकार की विनाशकारी नीतियों के खिलाफ आंदोलन करेंगे।

9 अगस्त को महाराष्ट्र के पालघर जिले में तलासरी बस डिपो मैदान में दिल्ली मुंबई औद्योगिक गालियारे के प्रतिरोध में महाराष्ट्र एवं गुजरात के संघर्षरत संघठनों की तरफ से विशाल जनसभा आयोजित की जा रही है।

इस जनसभा में लगभग 30 हजार किसान, मच्छीमार, आदिवासी शिरकत करेंगे।

मोर्चे में शामिल संघर्षरत संगठन एवं समितियां पिछले 2-3 सालों से अपने-अपने क्षेत्रों में संघर्ष कर रहे हैं। सभी का एक मंच पर साथ आकर दिल्ली मुंबई औद्योगिक गलियारे के विरोध में विशाल जनसभा का यह पहला आयोजन है।

इस संबंध में जारी अपील का मूल पाठ निम्नवत् है

चलो तलासरी*              

प्रकृति एवं  समाज संवर्धन परिषद

दि. 9 अगस्त 2017.

स्थल : तलासरी बस डेपो मैदान, तलासरी, जि. पालघर.(महाराष्ट्र)

चले जावं, चले जावं DMIC, बुलेट ट्रेन, वाढवण बंदर, एक्सप्रेसवे, MMRDA, सागरी महामार्ग चले जावं ! चले जाव !

भाई और बहनों,

हम सब मेहणतकश आदिवासी,किसान, मच्छीमार तथा सभी आम भूमिपुत्रों के जीवन में अच्छे दिन आने की बजाय एक के बाद एक संकट मंडराते जा रहे हैं। विकास के नाम पर बड़े सेठ-साहूकारों,पूंजीपतियों के फायदे के लिए हम सबको हाशिए पर फेंकने वाले एवं पर्यावरण का विनाश करने वाले प्रकल्पों को लादा जा रहा है।

देशी-विदेशी पूंजीपतियों के फायदे के लिए सरकार 18 औद्योगिक कॉरिडॉर बनाने जा रही है। अकेले दिल्ली-मुंबई औद्योगिक गलियारे के निर्माण हेतु 4 लाख 36 हजार 486 स्क्वे.किलोमीटर अर्थात देश की कुल भूमि का 13.8 प्रतिशत, उसमें गुजरात 62%, महाराष्ट्र की 18 % भूमि इसके प्रभाव में आनेवाली है। हमारे देश की 17% जनसंख्या को यह प्रकल्प ध्वस्त कर देगा। इसमें महाराष्ट्र, गुजरात, मध्यप्रदेश, राजस्थान तक फैला आदिवासी क्षेत्र पूरी तरह से ध्वस्त होकर आदिवासी समूह हाशिए पर धकेल दिया जायेगा।

पहले से ही प्रदूषण के शिकार दादरा नगर हवेली केंद्रशासित प्रदेश का संपूर्ण अस्तित्व ही इस प्रकल्प की बदौलत नष्ट हो जायेगा।

इस औद्योगिक गलियारे के प्रत्यक्ष-अप्रत्यक्ष हिस्से के रूप में मुंबई-अहमदाबाद बुलेट ट्रेन, मुंबई-वडोदरा एक्सप्रेस-वे, वाढवण बंदर सागरी महामार्ग, समर्पित रेल माल यातायात मार्ग (DFC), MMRDA विकास प्रारूप, नागपूर-मुंबई समृद्धि महामार्ग भूमिपुत्रों पर लादे जा रहे हैं। इन सभी विनाशकारी प्रकल्पों के लिए केंद्र बनने जा रहा नवीनतम पालघर जिला अपना अस्तित्व ही खो देने की स्थिति में होगा एवं अपनी पहचान खो देगा।

MMMRDA विकास प्रारूप के वजह से मुंबई महानगर विस्तारित हो वसई-उत्तन तथा रायगड हरित क्षेत्र काँक्रीट के जंगल में तब्दील हो जायेगा। इन सबके के लिए पालघर, थाना जिले का सिंचाई के लिए आरक्षित पानी लुटाया जा रहा है। वाढवण बंदर एवं सागरी महामार्ग मच्छीमार, किसानो की आजीविका पर कुठाराघात साबित होने जा रहे हैं।

पर्यावरण की दृष्टि से संवेदनशील वाढवण में जेएनपीटी से भी बड़ा बंदरगाह स्थापित होने जा रहा है। जंगलों को काट, पहाडों को तोड़, समुंदर में भराव डाल बंदरगाह निर्माण हेतु 5 हजार एकड़ जमीन निर्माण का उद्देश्य है, इससे सारी समुंदर किनारा, खेतीबाड़ी, फल के बाग ध्वस्त होने वाले हैं।

उसी तरह गुजरात में नारगोल बंदरगाह के विकास एवं विस्तार के नाम पर सैंकड़ों एकड़ कृषिभूमि का अधिग्रहण किया जा रहा है। इससे हजारों मच्छीमार एवं किसान परिवार ध्वस्त होने जा रहे हैं।

मुंबई-वडोदरा एक्सप्रेस-वे के बहाने कृषि योग्य जमीन छीनकर किसान, खेतिहर मजदूर, भूमिपुत्रों को ध्वस्त करने का षडयंत्र सरकार कर रही है।

पालघर एवं थाना जिले के 44 गांव तथा गुजरात-दादरा नगर हवेली के 163 गावों की कृषिभूमि लेने का दांव खेला जा रहा है।

आम रेल यात्रियों के लोकल ट्रेन आदि को सुखदायी करने की प्राथमिकता को छोड़ 8 घंटे की रेल यात्रा को ढाई घंटे पर ले आने के नाम पर जनता का 1 लाख 10 हजार करोड़ रुपया खर्चा कर मुंबई-अहमदाबाद बुलेट ट्रेन को जनता पर लादा जा रहा है। इसकी कीमतत आदिवासियों एवं पशु-पक्षियों को अपना जंगल खोकर देनी होगी। आदिवासी समुदाय के सामाजिक-सांस्कृतिक परंपराओ के संवर्धन संवर्धन एवं आजीविका, नैसर्गिक संसाधनों के संरक्षण के लिए 9 अगस्त को अंतरराष्ट्रीय आदिवासी दिवस के रूप में मनाने का निर्णय संयुक्त राष्ट्र संघ द्वारा 1993 को लिया गया है। 13 सितम्बर 2007 के दिन आदिवासी अधिकारों के घोषणापत्र को यूएनओ की आमसभा में मंजूरी दी गयी है। इस घोषणापत्र का उल्लंघन राजकर्ताओ द्वारा किया जा रहा है।

एक तरफ संविधान के द्वारा जीने के मूलभूत अधिकारों की गारंटी, पांचवी अनुसूची तथा स्वयं निर्णय के अधिकार को ध्यान में रख विशेष संरक्षण दिया गया है। दूसरी तरफ संघर्ष के द्वारा प्राप्त एवं हम लोगों द्वारा संवर्धित जमीन,जंगल तथा पानी को राजकर्ता जमात धनपतियों के लिए हमसे छीनकर संविधान को खुलेआम पैरों तले रौन्द रही है।

सरकार का दावा है कि, यह सब देश के विकास के नाम पर किया जा रहा है।

सवाल सीधा है कि मैं मुट्ठीभर लोगों के धंधों को फायदे के लिए करोड़ों लोगों को विस्थापित करने वाली नीतियों को विकास कहे या विनाश..?? और इसकी कीमत हम आम लोगो द्वारा ही क्यों चुकायी जानी चाहिये..??

इसलिये महाराष्ट्र, गुजरात, दादरा नगर हवेली के हम सब आदिवासी, मच्छीमार, किसान, भूमिपुत्र संगठित होकर संघर्षरत है। 9 अगस्त आंतरराष्ट्रीय आदिवासी दिवस तथा अगस्त क्रांति दिवस के मौके पर तलासरी एसटी डेपो मैदान में सुबह 11 बजे इकठ्ठा होकर सभी विनाशकारी प्रकल्पो कों चले जाव का इशारा देंगे।

अपने अस्तित्व, अगली पीढ़ी के भविष्य, प्रक़ृति एवं समाज के संवर्धन हेतु प्रचंड संख्या में उपस्थित होने का आप सब से नम्र निवेदन है।

*आयोजक*

*भूमिपुत्र बचाव आंदोलन*

1  भूमि सेना

2. आदिवासी एकता परिषद

3. खेडुत समाज (गुजरात)

4. शेतकरी संघर्ष समिति

5. वाढवण बंदर विरोधी संघर्ष समिति

6. ठाणे जिल्हा मध्यवर्ती सहकारी संघ

7. महाराष्ट्र मच्छिमार कृती समिति

8. कष्टकरी संघटना

9. सुर्या पाणी बचाव संघर्ष समिति

10. पर्यावरण संवर्धन समिति, वसई

11. पर्यावरण सुरक्षा समिति, गुजरात

12.आदिवासी किसान संघर्ष मोर्चा, गुजरात

13. कांठा विभाग युवा कोळी परिवर्तन ट्रस्ट, सूरत

14.  खेडुत हितरक्षक दल, भरुच

15. भाल बचाव समिति, गुजरात

16 श्रमिक संघटना

17. प्रकृति मानव हितैषी कृषि अभियान

18. सगुणा संघटना

19. युवा भारत

(विज्ञप्ति)

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