एक सनक भरा तुगलकी फैसला था नोटबंदी

मोदी सरकार द्वारा पिछले वर्ष 8 नवम्बर को लागू की गयी नोटबंदी की बरसी पर वामपंथी पार्टियों के देशव्यापी आह्वान पर लखनऊ में गांधी प्रतिमा जी0पी0ओ0 पर विरोध सभा की गयी।...

वामपंथी पार्टियों के देशव्यापी आह्वान पर विरोध दिवस का आयोजन

लखनऊ, 08 नवंबर। मोदी सरकार द्वारा पिछले वर्ष 8 नवम्बर को लागू की गयी नोटबंदी की बरसी पर वामपंथी पार्टियों के देशव्यापी आह्वान पर लखनऊ में गांधी प्रतिमा जी0पी0ओ0 पर विरोध सभा की गयी।

विरोध सभा को सम्बोधित करते हुए वक्ताओं ने कहा कि मोदी सरकार द्वारा पिछले वर्ष जारी की गयी नोटबंदी एक सनक भरा तुगलकी फैसला था, जो एक साल के बाद पूरी तरह साफ हो गया है वो हर तरह से असफल रहा। इस फैसले के चलते आम जनता ने बड़ी मुसीबतों का सामना किया। 200 लोगों के अपनी जान से हाथ धोना पड़ा। डेढ़ लाख से ज्यादा लोग बेरोजगार हो गया। तमाम लघु और कुटीर उद्योग बन्द हो गये, जिसके चलते लोग भुखमरी की कगार पर हैं। मोदी सरकार का यह फैसला बड़े पूंजी पतियों को कर्जमाफी से बैंको में धन की कमी को आम जनता के पैसे से पूरा करने की साजिश थी जिसका पूरा फायदा बड़े पूंजी पति घरानों को मिला है। इस कदम में भारत की अर्थव्यवस्था को चैपट कर दिया है। मोदी सरकार द्वारा इसको लागू करते समय घोषणा की थी कि इससे कालेधन पर रोक लगेगी, आतंकवाद कम होगा तथा भ्रष्टाचार पर भी लगाम लगेगी। आज एक साल बाद यह स्पष्ट हो गया है कि तीनों की उद्देश्यों में नोटबंदी विफल रही। रिजर्व बैंक से प्राप्त आंकड़ों के आधार पर यह स्पष्ट है कि नोटबंदी के बाद 99 प्रतिशत नोट बैंको में वापस आ गये।

विरोध सभा को प्रमुख रूप से भारत की कम्युनिस्ट पार्टी के जिला मंत्री मो0 खालिक, भारत की कम्युनिस्ट पार्टी (माक्र्सवादी) के जिला सचिव प्रदीप शर्मा, भारत की कम्युनिस्ट पार्टी (माक्र्सवादी-लेनिनवादी) के जिला प्रभारी रमेश सिंह सेंगर, जिला किसान सभा लखनऊ से छोटेलाल पाल, फारवर्ड ब्लाक से डाॅ0 एस0पी0 विश्वास, एस0यू0सी0आई0 से जय प्रकाश, जनवादी महिला समिति से सीमा राना, महिला फेडरेशन से आशा मिश्रा, एपवा से मीना सिंह, एस0एफ0आई0 से प्रवीन पाण्डेय, आइशा से नितिन राज, किसान सभा से प्रवीन सिंह आदि ने सम्बोधित किया।

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