स्वास्थ्य सेवा एवं शिक्षा के कॉर्पोरेटीकरण का बजट -सजप

सरकारी अस्पताल की जगह पर ही यह निजी अस्पताल खुलेंगे, जिन्हें चलाने के लिए राशि और मरीज सरकार की इस नई बीमा योजना से मिलेंगे। ...

नई दिल्ली। समाजवादी जन परिषद ने केंद्रीय बजट को स्वास्थ सेवा एवं शिक्षा के कॉर्पोरेटीकरण का बजट करार दिया है।

सजप की प्रदेश अध्यक्ष स्मिता और राष्ट्रीय कार्यकारणी सदस्य अनुरा मोदी ने कहा कि मोदी सरकार का अंतिम बजट ना सिर्फ किसान और गरीब के लिए निराशाजनक है, बल्कि देश में स्वास्थ्य सेवा और शिक्षा के कॉर्पोरेटिकरण को तेजी से बढ़ावा देगा और प्राथमिक स्वास्थ सेवा का स्तर और गिरेगा। इस बिल में जो न्यूनतम समर्थन मूल्य को डेढ़ गुना करने की बात है,  उसके लिए राज्य सरकार को इस मार्च में फसल खरीदी के पहले केन्द्रीय राशि ना मिलने से फिर वही म. प्र. जैसी निजी कॉर्पोरेट को सस्ती फसल उपलब्ध कराने की योजना अंतत: सामने आएगी। इसी तरह पीने के पानी से जूझते गाँवों में शौचालय बनाने की बात करना क्रूर मजाक है।

नेता द्वय ने कहा कि सरकार व्दारा सरकारी स्वास्थ सेवाओं को  मजबूत करने के बजाए, 50 करोड़ लोगों को 5 लाख तक का बीमा देना मतलब उन्हें निजी कॉर्पोरेट अस्पतालों में इलाज के लिए धकेलना है और इसके साथ हर तीन जिलों के बीच में जो बिना मानक के निजी मेडिकल कॉलेज खुलेंगे,  उनसे स्वास्थ शिक्षा का निजीकरण होगा। सरकार पहले ही मेडिकल कमीशन बिल के जरिए निजी मेडिकल कॉलेज के लिए पूर्व अनुमति को हटाने और उन्हें मनमानी फीस तय करने की सिफारिश कर चुकी है। इसी तरह, आज जब गाँव में अभी से पीने के पानी की समस्या के चलते जब वर्तमान में बने शौचालय भी लोग इस्तेमाल नहीं कर पा रहे हैं, ऐसे में पानी उपलब्ध कराने की योजना बनाने की योजना बनाने की बजाए २ करोड़ नए शौचालय बनाने की बात करना मतलब बजट की बड़ी राशि से सीमेंट और सेनेटरी का सामान बनाने वाली कम्पनीयों के जेब भरना है।

समाजवादी जन परिषद की प्रदेश अध्यक्ष स्मिता और राष्ट्रीय कार्यकारणी सदस्य अनुराग मोदी ने सवाल किया कि, जब सरकार को 50 करोड़ लोगों (यानी देश की आधी जनता) को बिना प्रीमियम के बीमा राशि से 5 लाख तक का मुफ्त इलाज देने का वायदा कर रही है, तो वो उस पैसे से अपनी स्वास्थ्य सेवा बेहतर करने में लगाने की बजाए, बीमे के नाम पर सरकारी पैसे को निजी कॉर्पोरेट अस्पतालों को लुटाने पर क्यों तुली है? ऐसे में प्राथमिक स्वास्थ सुविधा देने वाले सरकारी अस्पताल और बर्बाद होंगे।

हमें सरकार के इस बजट को इसके पहले की कुछ कवायदों से जोड़कर देखना होगा। एक तो, केंद्र सरकार नया मेडिकल कमीशन बिल लाई है, और दूसरा हर तीन-चार जिले के बीच एक जिले में सरकारी अस्पताल की जगह 100 बिस्तर वाला अस्पताल खोलने के लिए निजी लोगों को देने का प्रयोग राज्यों में शुरू हुआ है। वहीं केंद्र सरकार हर तीन जिलों के बीच एक मेडिकल कॉलेज की बात कर रही है; यह कॉलेज सरकारी होंगे ऐसा नहीं कहा है। दूसरा, केंद्र सरकार जो नया मेडिकल कमीशन बिल लाई है, इसमें मनमर्जी की फीस के साथ बिना किसी मंजूरी के निजी अस्पताल खुल सकेंगे। इसलिए अगर हम इस सबको जोड़कर देखे तो यह समझ आएगा कि सरकारी अस्पताल की जगह पर ही यह निजी अस्पताल खुलेंगे, जिन्हें चलाने के लिए राशि और मरीज सरकार की इस नई बीमा योजना से मिलेंगे। और,  कुकरमुत्ते की तरह खुले यह निजी अस्पताल और मेडिकल कॉलेज जब सरकार की बीमा योजना के दम पर स्थापित हो जाएंगे, और सरकारी अस्पताल बर्बाद, तब सरकार की बीमा योजना खत्म हो चुकी होगी और लोग निजी अस्पतालों में जाने को मजबूर होंगे।

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