नोटबंदी की पहली बरसी पर लालू करेंगे रैली, मोदी को घेरेंगे

नोटबंदी के एक साल पूरे होने पर मोदी सरकार की विफलताओं को गिनाने के लिए राजद सुप्रीमो लालू प्रसाद ने विशाल रैली निकालने का फैसला किया है।...

हाइलाइट्स

मोदी सरकार को आड़े हाथों लेते हुए लालू प्रसाद यादव ने कहा कि 8 नवंबर 2016 को केंद्र सरकार ने नोटबंदी का काला आदेश लागू कर देश की अर्थव्यवस्था को चौपट कर दिया। अब राजद उसी दिन बिहार के हर जिले में रैली निकालकर जनता को याद दिलाएगी... कि कैसे मोदी सरकार के नोटबंदी के फैसले की वजह से किसान, मजदूर, छात्र, नौजवान, संगठित, असंगठित क्षेत्र के कामगार, घरेलू महिलाओं को बड़ी परेशानी उठानी पड़ी।

नोटबंदी के फैसले को एक साल पूरा होने वाला है, लेकिन अब तक विपक्ष का आक्रोश खत्म नहीं हुआ है। आगामी 8 नवंबर को बिहार के पूर्व मुख्यमंत्री लालू प्रसाद यादव देश की जनता को नोटबंदी से हुए दुष्प्रभाव को बताने के लिए एक रैली करने वाले हैं। लालू इस रैली में जहां मोदी सरकार को घेरेंगे वहीं ये भी बताएंगे कि इस फैसले से कुछ पाया नहीं बल्कि खोया ही है।

नोटबंदी के एक साल पूरे होने पर मोदी सरकार की विफलताओं को गिनाने के लिए राजद सुप्रीमो लालू प्रसाद ने विशाल रैली निकालने का फैसला किया है।

लालू ने कहा कि राजद इस प्रदेशव्यापी रैली के जरिए बिहारवासियों को मोदी सरकार के इस काले आदेश के दुष्प्रभाव के बारे में बताएगी।

मोदी सरकार को आड़े हाथों लेते हुए लालू प्रसाद यादव ने कहा कि 8 नवंबर 2016 को केंद्र सरकार ने नोटबंदी का काला आदेश लागू कर देश की अर्थव्यवस्था को चौपट कर दिया। अब राजद उसी दिन बिहार के हर जिले में रैली निकालकर जनता को याद दिलाएगी... कि कैसे मोदी सरकार के नोटबंदी के फैसले की वजह से किसान, मजदूर, छात्र, नौजवान, संगठित, असंगठित क्षेत्र के कामगार, घरेलू महिलाओं को बड़ी परेशानी उठानी पड़ी। लोगों को अपना काम धंधा को छोड़कर नोट बदलवाने के लिए लंबी-लंबी लाइनों में दिन-दिन भर खड़े रहना पड़ा था। कई लोगों ने तो लाइन में ही दम तोड़ दिया। देश का उद्योग धंधा इस आदेश से तहस-नहस हो गया। हजारों कामगारों का रोजगार छूट गया। मजबूरन उन्हें नौकरी छोड़कर घर वापस लौटना पड़ा।

...इतना ही नहीं भाजपा पर लाल होते-होते लालू प्रसाद यादव ने ये तक कह दिया कि...वो भाजपा को सत्ता से हटाए बिना चैन की सांस नहीं लेंगे।

आपको बता दें कि 8 नवंबर 2016 को मोदी सरकार ने नोटबंदी का फैसला लेकर 500 और 1000 रुपये के नोट को बंद कर दिया था... इसके बाद से ही विपक्ष लगातार आरोप लगाता रहा है कि नोटबंदी तुगलकी फैसला था जिसने अर्थव्यवस्था को भी नुकसान पहुंचाया और भयंकर बेरोजगारी फैलाई।

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