गोदी मीडिया को शिंजो अबे का जोर का झटका धीरे से, मोदी के सामने की पं नेहरू की जमकर तारीफ

गुरुवार को अहमदाबाद में एक व्यापारिक कार्यक्रम में जापानी प्रधानमंत्री शिंजो अबे ने पंडित जवाहर लाल नेहरू के साथ अपने पारिवारिक रिश्तों को याद किया।...

हाइलाइट्स

2007 में अपनी भारत यात्रा के दौरान जब श्री अबे ने संसद के संयुक्त सत्र को संबोधित किया था, तब भी उन्होंने इस घटना का जिक्र किया था।

श्री अबे का कहना है कि मेरे पितामह 50 के दशक में जब भारत आए, तब हम द्वितीय विश्वयुद्ध की पराजय से उबर ही रहे थे। पं. नेहरू के प्रयासों से युद्ध की भीषण त्रासदी के बाद खड़े होने की कोशिश में लगे जापान और भारत के बीच निजी रिश्ता सा बन गया।

बुलेट ट्रेन को देश की महानतम उपलब्धि बताने वाला गोदी मीडिया, दो दिनों से प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी और जापानी प्रधानमंत्री शिंजो अबे के मजबूत निजी रिश्तों की भी खूब बातें कर रहा है। यह बताया जा रहा है कि नरेन्द्र मोदी के शिंजो अबे से रिश्ते तब से प्रगाढ़ हैं, जब वे गुजरात के मुख्यमंत्री हुआ करते थे। लेकिन शिंजो अबे भारत से अपने रिश्तों की बात करते हुए 50 के दशक को और खासकर पहले प्रधानमंत्री पं.जवाहर लाल नेहरू को याद करते हैं, उन्हें क्या मालूम कि भाजपा सरकार तो नेहरू जी का नाम लेने से ही बचती है।

गुरुवार को अहमदाबाद में एक व्यापारिक कार्यक्रम में जापानी प्रधानमंत्री शिंजो अबे ने पंडित जवाहर लाल नेहरू के साथ अपने पारिवारिक रिश्तों को याद किया।

उन्होंने कहा कि मेरे पितामह, तत्कालीन प्रधानमंत्री किशी, भारत से बहुत प्यार करते थे। भारतीय जनता से उनका पहला परिचय पं.नेहरू के निजी प्रयासों से हुआ। अपने दादा की ही तरह मेरे रिश्ते भी भारतीय जनता के साथ ऐसे ही मजबूत होंगे, यह मेरी आशा है।

उनके इस संबोधन पर उपस्थित दर्शकों ने खूब तालियां बजाईं और प्रधानमंत्री मोदी भी इसकी सराहना करते नजर आए। गौरतलब है कि 1957 में प्रधानमंत्री किशी भारत यात्रा पर आए थे और पं.नेहरू ने एक जनसभा में उनका परिचय कराते हुए कहा था कि ये जापान के प्रधानमंत्री हैं, एक ऐसा देश जिसकी मैं बहुत इज्जत करता हूं।

2007 में अपनी भारत यात्रा के दौरान जब श्री अबे ने संसद के संयुक्त सत्र को संबोधित किया था, तब भी उन्होंने इस घटना का जिक्र किया था।

श्री अबे का कहना है कि मेरे पितामह 50 के दशक में जब भारत आए, तब हम द्वितीय विश्वयुद्ध की पराजय से उबर ही रहे थे। पं. नेहरू के प्रयासों से युद्ध की भीषण त्रासदी के बाद खड़े होने की कोशिश में लगे जापान और भारत के बीच निजी रिश्ता सा बन गया।

2011 की भारत यात्रा के दौरान भी श्री अबे ने इस संबंध के बारे में कहा था कि- मैं तब बच्चा था और घुटनों के बल बैठकर अपने दादाजी की बात सुन रहा था कि कैसे प्रधानमंत्री नेहरू ने उनका भरी जनसभा में परिचय कराया। मेरे पितामह का कहना था कि अपने जीवनकाल में इतनी बड़ी जनसभा उन्होंने नहीं देखी थी। एक साथ सैकड़ों-हजारों लोग उपस्थित थे।

आपको बता दें कि शिंजो अबे जापान के रसूखदार राजनीतिक परिवार से आते हैं, जिसके कई सदस्य कई बड़े पदों पर रह चुके हैं।

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