ई-वेस्ट के सबसे बड़े उत्पादकों में पांचवें स्थान पर है भारत

देश में उत्पन्न पूरे ई-वेस्ट का केवल 1.5 प्रतिशत सही तरह से रीसाइकल किया जाता है... अनुमान है कि वर्ष 2020 तक, भारत लगभग 52 लाख मीट्रिक टन ई-वेस्ट का उत्पादन करेगा।...

ई-वेस्ट के सबसे बड़े उत्पादकों में पांचवें स्थान पर है भारत

ई-वेस्ट डिस्पोज़ल एंड मैनेजमेंट के लिए कैम्पेन

 मुरादाबाद, 28 सितम्बर, 2018: इलेक्ट्रॉनिक्स और सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय (एमईआईटी वाई) के संरक्षण में, आरएलजी एवं मैन्यूफैक्चरर इन्फॉर्मेशन टेक्नालजी संघ (एमएआईटी) ने साझेदारी कर भारत में एमईआईटी वाई के इलेक्ट्रॉनिक वेस्ट के पर्यावरणीय खतरों पर जागरूकता अभियान को बढ़ावा देने के लिए क्लीन टू ग्रीन कैम्पेन चलाया है। यह कैम्पेन इलेक्ट्रॉनिक वेस्ट का ज़िम्मेदारी से डिस्पोसल और मैनेजमेंट के जरिए एमईआईटी वाई के उद्देश्य को आगे बढ़ाने का प्रयास करता है। क्लीन टू ग्रीन कैम्पेन में 26 राज्यों और 4 केंद्र शासित प्रदेशों में 30 शहरों को शामिल किया जाएगा।

पर्यावरण पर प्रतिकूल प्रभाव पर ध्यान देना

इलेक्ट्रॉनिक वेस्ट के पर्यावरणीय खतरों पर जागरूकता कार्यक्रम का प्राथमिक ध्यान पर्यावरण पर प्रतिकूल प्रभाव को कम करने के लिए विभिन्न स्टेक्होल्डर (स्कूल, कॉलेज, आरडब्ल्यूए, थोक उपभोक्ता, डीलर, रिफर्बिशर, अनौपचारिक क्षेत्र और निर्माताओं सहित) के बीच जागरूकता पैदा करना है, जिससे ई-वेस्ट के अनुचित डिस्पोसल के कारण स्वास्थ्य एवं पर्यावरण पर पड़ रहे खराब प्रभाव को कम किया जा सके।

डिजिटल इंडिया और स्वच्छ भारत मिशन के तहत यह कार्यक्रम ई-वेस्ट का ठीक तरह से डिस्पोसल और रीसाइक्लिंग को बढ़ाने का लक्ष्य रखता है जिससे पर्यावरणीय और स्वास्थ्य संबंधी खतरों को कम किया जा सके।

वर्तमान में, भारत दुनिया भर में ई-वेस्ट के सबसे बड़े उत्पादकों में से पांचवें स्थान पर है (इसने 2016 में 2 मिलियन टन ई-वेस्ट उत्पादन किया है****), और देश में उत्पन्न पूरे ई-वेस्ट का केवल 1.5 प्रतिशत सही तरह से रीसाइकल किया जाता है ; यह ई-वेस्ट रीसाइक्लिंग के बारे में जागरूकता की कमी, और असंगठित क्षेत्र और वेस्ट कलेक्शन और रीसाइक्लिंग के प्रति लापरवाही हो सकती है*****। ऐसा अनुमान है कि वर्ष 2020 तक, भारत लगभग 52 लाख मीट्रिक टन ई-वेस्ट का उत्पादन करेगा। वर्तमान में, यह आंकड़ा 18 लाख मीट्रिक टन* अनुमानित है। इसके अलावा, भारत में लगभग 76% ई-वेस्ट वर्कर्स श्वसन बीमारियों** से ग्रस्त हैं  और भारत का ई-वेस्ट सालाना 30%*** बढ़ता जा रहा है। ई-वेस्ट के सुरक्षित और सही रीसाइक्लिंग से वायु, मिट्टी और जल प्रदूषण कम हो जाता है, और यह संसाधन दक्षता और सर्क्युलर अर्थव्यवस्था की दिशा में एक कदम है।

एमएआईटी के सीईओ अनवर शिरपुरवाला ने कहा-  

"भारत में ई-वेस्ट मैनेजमेंट एक बेहद असंगठित क्षेत्र है। इस कार्यक्रम के माध्यम से, एमएआईटी देश के 17 राज्यों और 3 केंद्र शासित प्रदेशों में 20 शहरों तक पहुंचने और स्थायित्व सुनिश्चित करने के लिए कार्यक्रम के प्रारंभिक चरण में शामिल 10 शहरों को कवर करके विभिन्न स्टेक्होल्डर के बीच जागरूकता पैदा करना चाहता है। भारत भर में सरकार और गैर-सरकारी एजेंसियों के साथ काम कर रहे अग्रणी, प्रभावशाली और गतिशील संगठन होने के नाते, एमएआईटी समाज और राष्ट्र के विकास और सुधार से संबंधित जानकारी और ज्ञान एकत्रित करने, संसाधित करने और प्रसारित करने के लिए प्रतिबद्ध है।”

क्लीन टू ग्रीन कैम्पेन ई-वेस्ट का ज़िम्मेदारी से डिस्पोसल और रीसाइक्लिंग को सुनिश्चित करने के लिए इलेक्ट्रॉनिक्स उद्योग और कॉर्पोरेट निकायों के साथ एक सहयोगी प्रयास है।

कार्यक्रम में उनकी भागीदारी पर टिप्पणी करते हुए आरएलजी इंडिया की मैनेजिंग डायरेक्टर राधिका कालिया ने कहा-

 "इलेक्ट्रॉनिक्स का सही डिस्पोसल और रीसाइक्लिंग एक राष्ट्रीय प्राथमिकता है और सरकार ने ऐसी नीति शुरू की है जो इस मुद्दे की गंभीरता को प्रदर्शित करती है। क्लीन टू ग्रीन कैम्पेन में शामिल होने के बाद, हम जागरूकता पैदा करना चाहते हैं और उपभोक्ताओं को रीसाइक्लिंग के लिए सही डिस्पोसल इलेक्ट्रॉनिक्स और सेफ प्रैक्टिस पर संवेदनशील बनाना चाहते हैं। भारत सरकार द्वारा शुरू किए गए ई-वेस्ट मैनेजमेंट नियम, 2016 के साथ, हम पर्यावरण के सुधार और समाज की भलाई के साथ-साथ उत्पादकों और निर्माताओं के नियमों के दायित्वों को पूरा करने के लिए काम करने पर ध्यान केंद्रित कर रहे हैं।"

स्थान एवं स्टेक्होल्डर का विवरण

दिनांक

स्टेक्होल्डर

स्टेक्होल्डर संगठन (स्कूल /कॉलेज /आरडब्लूए  आदि )

पता

संख्या

21/8/2018

कॉलेज

गिरंद सिंह मेमोरियल कॉलेज

पिलकपुर श्यारामम, दिलारी, ठाकुरद्वारा, मुरादाबाद, उत्तर प्रदेश 244001

1100

25/8/2018

स्कूल

सूर्यन्श पब्लिक स्कूल

रामपुर रोड

मुरादाबाद, उत्तर प्रदेश
 

1700

25/8/2018

अनौपचारिक क्षेत्र

 करुला

पीयर बाजार करुला, मुरादाबाद

50

25/8/2018

   ऑफिस क्लस्टर

साई कॉम्प्लेक्स

 हिमगिरि कॉलोनी

265

10/9/2018

ऑफिस क्लस्टर

बीएसएनएल

आगंबाड़ी केंद्र

50

29/8/2018

    आरडब्लूए

इंपीरियल ग्रीन

नचिकेता इंस्टीट्यूट

320

30/8/2018

स्कूल

शांति निकेतन इंटर कॉलेज

हतमा बस्ती

450

30/8/2018

आरडब्लूए

परसनाथ प्रतिभा

इगरु तोली

800

1/9/2018

आरडब्लूए

 स्टार पैसिफिक

शिवाजी नगर  

600

1/9/2018

अनौपचारिक क्षेत्र

 हिमगिरि कॉलोनी

हिमगिरि कॉलोनी, कंठ रोड, पी.ओ. सोनकपुर हार्थला, मुरादाबाद (यूपी)

50

4/9/2018

स्कूल

संत राजिंदर सिंह

लेमखुजम

450

5/9/2018

रिफर्बिशर/रीसाइकलर

 हिमगिरि

लक्ष्मी विहार के पास, हिमगिरी कॉलोनी, हर्थला, मोरादाबाद, उत्तर प्रदेश 244014

60

क्या है एमईआईटी वाई

भारत सरकार के इलेक्ट्रॉनिक्स और सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय (एमईआईटी वाई) ने नागरिकों को सशक्त बनाने, इलेक्ट्रॉनिक्स, आईटी और आईटीईएस उद्योगों के समावेशी और टिकाऊ विकास को बढ़ावा देने, इंटरनेट शासन में भारत की भूमिका को बढ़ाने, एक बहुआयामी दृष्टिकोण को अपनाने के लिए ई-गवर्नेंस को बढ़ावा देने का कार्य सौंपा गया है। मानव संसाधनों का विकास, आर एंड डी और इनोवेशन को बढ़ावा देना, डिजिटल सेवाओं के माध्यम से दक्षता में वृद्धि करना और एक सुरक्षित साइबर स्पेस सुनिश्चित करना है।

क्या है एमएआईटी

एमएआईटी की स्थापना 1982 में वैज्ञानिक, शैक्षिक और आईटी इंडस्ट्री प्रमोशन के लिए की गई, यह संगठन 30 वर्षों में एक प्रभावशाली और गतिशील संगठन के रूप में उभरा है। भारतीय आईटी इंडस्ट्री के हार्डवेयर, प्रशिक्षण, आर एंड डी और हार्डवेयर डिजाइन और अन्य संबंधित सर्विस सेगमेंट का प्रतिनिधित्व, एमएआईटी का चार्टर वैश्विक स्तर पर प्रतिस्पर्धी भारतीय आईटी इंडस्ट्री को विकसित करना, भारत में आईटी के उपयोग को बढ़ावा देना, राष्ट्रीय आर्थिक विकास में आईटी की भूमिका को मजबूत करना है, अंतरराष्ट्रीय गठबंधन के माध्यम से व्यापार को बढ़ावा देना, आईटी इंडस्ट्री में गुणवत्ता को बढ़ावा देना और भारतीय आईटी उद्योग को विश्व स्तरीय उद्योग में बदलना, जिससे विश्व स्तर में इसके उपयोग और मार्केट साइज़ में वृद्धि हो।

क्या है आरएलजी इंडिया

दी रिवर्स लॉजिस्टिक्स ग्रुप (आरएलजी) एक 145 मिलियन यूरो ग्लोबल 4PL सेवा प्रदान करता है जो प्रोडक्ट टेक-बैक और रिटर्न्स मैनेजमेंट के सभी पहलुओं के लिए तैयार एंड-टू-एंड सल्युशंस के डिजाइन और संचालन में विशेषज्ञता प्राप्त करता है। आरएलजी क्लीन टू ग्रीन कैम्पेन का हिस्सा है जो उपभोक्ताओं और अन्य स्टेक्होल्डर में जागरूकता फैलाता है कि ज़िम्मेदारी से इलेक्ट्रॉनिक्स का डिस्पोसल किया जाए। यह जन जागरूकता कार्यक्रम देश के 30 शहरों में लोगों तक पहुंचाया जाएगा, इन शहरों में अनौपचारिक क्षेत्र क्लस्टर के अलावा 390 स्कूल, 170 आरडब्ल्यूए और 120 कार्यालय भी शामिल होंगे।

(विज्ञप्ति)

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