पर्यावरणीय कारणों से होने वाले कैंसर से बचाव आसान, बता रहे हैं चिकित्सक

Cancer prevention from environmental causes, ...

एजेंसी

नई दिल्ली, 10 फरवरी। चिकित्सकों का कहना है कि कैंसर (Cancer) के कारण देश में होने वाली 22 फीसदी मौतों का कारण पैसिव स्मोकिंग (passive smoking) हैं। वहीं निम्न आयवर्ग वाले देशों में हेपेटाइटिस (hepatitis) और पेपिलोमा वायरस (papilloma virus) का संक्रमण (infection) कैंसर के 25 फीसदी मामलों का कारक हैं। चिकित्सकों ने बताया है कि कुछ उपाय अपनाकर पर्यावरणीय कारकों से होने वाले कैंसर (cancers caused by environmental factors) से बचा जा सकता है। इंद्रप्रस्थ अपोलो हॉस्पिटल्स (Indraprastha Apollo Hospitals) की सर्जिकल ओंकोलॉजी (Surgical Oncology) की सीनियर कंसल्टेंट (महिला) डॉ. रमेश सरीन ने पर्यावरणीय कारकों से होने वाले कैंसर से बचने में मददगार कुछ महत्वपूर्ण (Some important remedies helpful in preventing cancer from environmental factors) उपाय सुझाए हैं :

वायु प्रदूषण से बचें : Avoid Air Pollution

दिल्ली, कोलकाता एवं अन्य कई शहरों में प्रदूषण अपने घातक स्तर पर पहुंच गया है। अच्छा होगा कि इन शहरों में रहने वाले लोग धूल, कार एवं फैक्टरी से निकलने वाले धुएं, निर्माण स्थलों से निकलने वाली धूल, तंबाकू के धुएं (एक्टिव और पैसिव) से बचने के लिए मास्क का इस्तेमाल करें। साथ ही वायु प्रदूषण के कारणों को पहचान कर इन्हें कम करने की जरूरत है। जागरूकता के द्वारा फेफड़ों के कैंसर (Lung cancer) को कम करने के लिए जरूरी कदम उठाए जा सकते हैं।

जल प्रदूषण से बचें : Avoid Water Pollution

अच्छी सेहत के लिए साफ पानी होना बहुत जरूरी है। हमें सुनिश्चित करना होगा कि हमारे आस-पास मौजूद वाटर बॉडीज (जल निकायों) को जैविक एवं ओद्यौगिक प्रदूषकों से संदूषित न होने दिया जाए। पानी में डाले जाने वाले रसायन और व्यर्थ पदार्थ पेट एवं लिवर की बीमारियों जैसे हेपेटाइटिस का कारण बन सकते हैं और यह कैंसर का रूप भी ले सकता है।

हाल ही में पानी में आर्सेनिक का स्तर बढ़ने के कारण त्वचा के कैंसर (Skin cancer) के मामले भी बढ़ रहे हैं। ऐसे में वायु प्रदूषण (air pollution) की रोकथाम के प्रयास कैंसर के मामलों को कम करने में मददगार हो सकते हैं।

अपने काम पर ध्यान दें : Focus on your work

अगर आपका काम ऐसा है कि आप काम के दौरान हानिकर रसायनों जैसे एस्बेस्टॉस, बेंजीन एवं अन्य सॉल्वेंट्स, आर्सेनिक उत्पादों, डाई-ऑक्सिन, क्रोमियम, लेड, फाइबर आदि के संपर्क में आते हैं तो कैंसर की संभावना बढ़ती है। इसलिए उद्योगों में काम करने वालों को रोकथाम के उपाय अपनाने चाहिए।

कीटनाशकों, आर्टिफिशियल कलर एवं प्रिजर्वेटिव का इस्तेमाल न करें : Do not use insecticides, artificial color and preservatives

सब्जियों और फलों में इस्तेमाल किए जाने वाले कीटनाशक या खाद्य पदार्थों में इस्तेमाल होने वाले आर्टीफिशियल कलर, प्रिजरवेटिव आदि स्वास्थ्य के लिए खतरनाक हैं। इनका बहुत ज्यादा मात्रा में सेवन कैंसर का कारण बन सकता है। इसलिए इन चीजों से बचने की कोशिश करें, खाद्य पदार्थो के ऑर्गेनिक विकल्प अपनाएं।

गौरतलब है चार फरवरी को विश्व कैंसर दिवस (World Cancer Day) मनाया जाता है।

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