जलवायु परिवर्तन से हुई थी सिंधु घाटी सभ्यता की मौत

Climate change led to the demise of the ancient Indus valley civilisation...

जलवायु परिवर्तन से हुई थी सिंधु घाटी सभ्यता की मौत

Climate change led to the demise of the ancient Indus valley civilisation

नई दिल्ली, 15 नवंबर। क्या आप जानते हैं कि जलवायु परिवर्तन के कारण ही भारतीय उपमहाद्वीप की प्राचीनतम सिंधु घाटी सभ्यता काल के गाल में समा गई थी?

जी हाँ हालिया एक शोध में दावा किया गया है कि तेजी से हुए जलवायु परिवर्तन ने 4000 साल पहले सिंधु घाटी सभ्यता के लोगों को हिमालय की तलहटी के गांवों में विस्थापित होने को मजबूर किया और अगले 1000 वर्षों में इस सभ्यता के समूहों की मृत्यु हो गई क्योंकि उनकी जल आपूर्ति कम हो गई थी। 

अध्ययन करने वाले वैज्ञानिकों का कहना है कि जलवायु परिवर्तन ने सिंधु घाटी सभ्यता के लोगों को अपने शहरों (जो कि पूरी दुनिया में सबसे पहले कभी बनाए गए थे) से बाहर निकलने के लिए मजबूर किया, जो प्राचीन सभ्यता और इस सभ्यता के उन्नत लोगों की मृत्यु का कारण बना।

ग्लोबल वार्मिंग के कारण मौसमी बारिश न होने से सूखा पड़ गया, 4,000 साल पहले सिंधु सभ्यता को हिमालयी तलहटी के गांवों में शिफ्ट होने के लिए मजबूर होना पड़ा।

शोधकर्ताओं ने कहा कि अगले सहस्राब्दी के भीतर इन अलग-अलग गांव समूहों की मृत्यु हो गई क्योंकि उनकी जल आपूर्ति कम हो गई।

वैज्ञानिकों ने मध्य पूर्व और अफ्रीका के आधुनिक समूहों को चेतावनी दी है कि अगर वर्तमान स्थितियां नहीं सुधरीं और जलवायु परिवर्तन इसी तरह जारी रहा तो इन क्षेत्रों के नागरिकों के लिए भी विस्थापन लाजिमी हो जाएगा।

यह खबर डेली मेल में प्रकाशित हुई है।

उधर जलवायु परिवर्तन व पर्यावरण पर एक वैश्विक रिपोर्ट में खुलासा हुआ है कि जी20 में शामिल किसी भी देश की गतिविधियां वैश्विक तापमान में वृद्धि को डेढ़ डिग्री सेल्सियस से कम रखने के लक्ष्‍य के अनुरूप नहीं है। केवल भारत ही एक ऐसा देश है जो दो डिग्री के लक्ष्‍य की प्राप्ति के करीब है। दुनिया अब भी तापमान में 3.2 डिग्री की बढ़ोत्‍तरी की राह पर बढ़ रही है।

कल जारी हुई ब्राउन टू ग्रीन रिपोर्ट-2018 के सह-लेखकों में शामिल चीन के एनर्जी रिसर्च इंस्‍टीट्यूट के जिंग केजिन का कहना है कि

“हाल में जारी आईपीसीसी 1.5 डिग्री सेल्सियस रिपोर्ट से पता चलता है कि दुनिया को जलवायु परिवर्तन के मसले पर बहुत तेजी से काम करना होगा। ज्‍यादातर जी20 देशों में कोयले, तेल तथा गैस से बिजली बनाये जाने और प्रदूषणकारी परिवहन साधनों का इस्‍तेमाल किए जाने से सबसे ज्‍यादा प्रदूषण फैलता है।”

क्या यह ख़बर/ लेख आपको पसंद आया ? कृपया कमेंट बॉक्स में कमेंट भी करें और शेयर भी करें ताकि ज्यादा लोगों तक बात पहुंचे

कृपया हमारा यूट्यूब चैनल सब्सक्राइब करें

harappa sabhyata ke patan ke karan, harappa sabhyata ka vinash,

हस्तक्षेप से जुड़े अन्य अपडेट लगातार हासिल करने के लिए हमें
facebook फेसबुक पर फॉलो करे.
और
facebook ट्विटर पर फॉलो करे.
"हस्तक्षेप"पाठकों-मित्रों के सहयोग से संचालित होता है। छोटी सी राशि से हस्तक्षेप के संचालन में योगदान दें।