मोदी सरकार की कोयला उत्खनन पर्यावरण का विनाश करने वाली और आदिवासी- पर्यावरण विरोधी

कोयला उत्खनन : माकपा ने कहा, पेसा का उल्लंघन और कॉर्पोरेट घोटाले को जन्म देने की नीति...

रायपुर। मार्क्सवादी कम्युनिस्ट पार्टी ने कोयला के व्यावसायिक उत्खनन के लिए निजी कंपनियों को अनुमति प्रदान करने के मोदी सरकार के फैसले की कड़ी निंदा करते हुए सीटू व अन्य ट्रेड यूनियनों द्वारा छत्तीसगढ़ में पिछले तीन दिनों से जारी विरोध प्रदर्शनों का स्वागत करते हुए इसे और व्यापक बनाने का आह्वान किया है, ताकि राष्ट्रहित में केन्द्र सरकार को इस राष्ट्रविरोधी फैसले को पलटने के लिए बाध्य किया जा सके.

आज यहां जारी एक बयान में माकपा राज्य सचिवमंडल ने इसे मजदूरविरोधी, आदिवासीविरोधी, पर्यावरणविरोधी फैसला करार देते हुए कहा है कि सभी कोल ब्लॉक आदिवासी क्षेत्रों में स्थित है और इसलिए यह निर्णय पेसा कानून का सीधा-सीधा उल्लंघन भी है, जो प्राकृतिक संपदा के नियमन का अधिकार आदिवासी समुदाय को देता है.

पार्टी ने कहा है कि केन्द्र के इस फैसले के छत्तीसगढ़ के लिए गंभीर निहितार्थ होंगे, जहां पहले ही जल-जंगल-जमीन-खनिज व अन्य प्राकृतिक संसाधनों की बड़े पैमाने पर लूट हो रही है. इस फैसले से कोल इंडिया जैसी सार्वजनिक क्षेत्र की नवरत्न कंपनी का खात्मा होगा, लाखों मजदूरों की सुरक्षित नौकरियां दांव पर लगेगी, पर्यावरण का विनाश होगा, जंगली जानवरों का मानव समाज पर हमला व प्रकोप बढ़ेगा, आदिवासियों की आजीविका खतरे में पड़ेगी और उन्हें अपने घर-गांव-जंगल से विस्थापित भी होना पड़ेगा. इस प्रकार यह फैसला छत्तीसगढ़ में रहने वाले 90 लाख आदिवासियों और कोयला खनन में लगे 40 हजार मजदूरों के जीवन को बर्बाद करने वाला है.

माकपा ने कहा है कि पिछले ढाई दशकों से निजीकरण और उदारीकरण की नीतियों ने आर्थिक असमानता और भ्रष्टाचार को बड़े पैमाने पर बढ़ाया है. इस देश में 300 अरब टन कोयले का भंडार है और यदि प्रति किलो एक रूपये की ही हेरा-फेरी की जाएं, तो 300 लाख करोड़ रुपयों का अकल्पनीय घोटाला जन्म लेगा. निजीकरण की यह नीति जन-संपदा की लूट की कीमत पर कॉर्पोरेट घोटाले को जन्म देने की नीति है. 

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