मोदी की भाजपा के लिए प्रायोजित सर्वे कराकर माहौल बनाने की साज़िश

मोदी की भाजपा के लिए प्रायोजित सर्वे कराकर माहौल बनाने की साज़िश...

मोदी की भाजपा के लिए प्रायोजित सर्वे कराकर माहौल बनाने की साज़िश

Conspiracy to create an environment by conducting sponsored surveys for Modi's BJP

रायपुर से तौसीफ़ क़ुरैशी

रायपुर। पाँच राज्यों में हो रहे चुनाव के चलते मतदाताओं को विचलित करने के लिए पिछले काफ़ी दिनों से चुनावों से पूर्व प्रायोजित सर्वे कराने का सिलसिला जारी है। लोकसभा चुनाव 2019 के लिए देश में कई सर्वे कम्पनियां प्रायोजित सर्वे करा रही हैं, जिसमें पहले विपक्ष को काफी आगे बताया जाता है, फिर कांटे की टक्कर और अंत में जब चुनाव करीब आ जाएँगे तो मोदी की भाजपा को बढ़ती दिखाई जाएगी, ताकि जनता ये न कह सके कि आप किसी एक दल के लिए काम कर रहे हैं।

ओपिनियन पोल नहीं ओपिनियन मेकिंग पोल

No Opinion Poll, Opinion Making Poll

इसे हम ओपिनियन पोल के बजाय ओपिनियन मेकिंग पोल कहते हैं। भाजपा को उसका लाभ भी मिल रहा है। अब यह बात अलग है कि जनता को बाद में उस टाइम की गई ग़लतियों का अहसास होता है परन्तु तब बहुत देर हो चुकी होती है। ऐसा ही अब किया जा रहा है।

पाँचो राज्यों राजस्थान, मध्य प्रदेश, छत्तीसगढ़, तेलंगाना व मिज़ोरम के चुनावों को मोदी की भाजपा के पक्ष में प्रभावित करने के लिए इस बार भी प्रयास किया जा रहा है।

असल में यह सारा षड्यंत्र आगामी लोकसभा चुनाव में मोदी की भाजपा को नुक़सान न हो, इस लिए भी कराया जा रहा है क्योंकि इन पाँचो राज्यों के चुनाव आगामी लोकसभा चुनाव 2019 को भी प्रभावित करेंगे इससे इंकार नहीं किया जा सकता है ख़ासकर मध्य प्रदेश, छत्तीसगढ़ व राजस्थान के चुनाव।

अगर मोदी की भाजपा हारती है तो यकीनी तौर पर कहा जा सकता है कि आगामी लोकसभा चुनाव की डगर मुश्किल हो जाएगी। उसी से बचने के लिए यह सब किया जा रहा है।

छत्तीसगढ़ में हार रही है मोदी की भाजपा ?

Modi's BJP is losing in Chhattisgarh ?

छत्तीसगढ़ के हालात देखने से तो नहीं लग रहा कि यहाँ मोदी की भाजपा व रमन सिंह की सरकार चौथी बार बनने जा रही है। मुक़ाबला बहुत बढ़िया और मज़बूती से कांग्रेस करती दिख रही है।

लोगों का दावा है कि इस बार कांग्रेस की सरकार छत्तीसगढ़ में बन जाएगी क्योंकि कोई और पार्टी है ही नहीं जो मुक़ाबला कर रही हो।

अजित जोगी की छत्तीसगढ़ जन कांग्रेस व बसपा चुनाव तो सभी सीटों पर लड़ रही है, पर चार-पाँच सीटों को छोड़कर कहीं भी मुक़ाबले में नहीं दिखाई दे रही है। यह बात देखने लायक है कि इस बार भी क्या प्रायोजित सर्वे अपने पूर्व की भाँति काम कर पाएँगे या नहीं। जैसे हालात ज़मीन पर देखने को मिल रहे हैं, उससे तो नहीं लगता कि झूठ की बुनियाद पर टिके यह सर्वे इस बार काम कर रहे हैं।

लोगों में सरकार के प्रति बहुत रोष देखने को मिल रहा है। हमने इसको लेकर लोगों से बात करने की कोशिश की। पामगढ़, अकलतरा व जैजेपुर विधानसभा के लोगों का मिज़ाज जानने की कोशिश की गई। कोटीमल, राम अवतार, ध्यान सिंह,हरद्वारी लाल, बच्चन बाबा गरगोटे लाल, धन्नों बाई, मीरा बाई, राम लखन आदि बहुत से लोगों और गृहणियों से बातचीत की। हमको यह मालूम नहीं कि सर्वे क्या होत हे हम तो इतना जानत हे कि हमरी सरकार सही नहीं है। हमको वोट डालन जानत है। उसको हरान को हमार सरकार कुछ न करित है सब ग़लत बोलत है कब तक यह चलत हम नहीं जानत इस बार लगत है यह सरकार जावत हैं।

यह हाल है छत्तीसगढ़ का। इसके बाद हम मध्य प्रदेश भी ज़मीन पर देखेंगे कि वहाँ क्या हो रहा है और सर्वे करने वाले पहले मोदी की भाजपा को कमज़ोर दिखाते हैं और जब चुनाव की तारीख़ नज़दीक आ जाती है तो उसको बढ़ते हुए पेश किया जाता है। यह हमने पहले भी कई चुनावों में देखा है। इस काम को गोदी मीडिया बड़ी ख़ूबसूरती से पेश करता है, जिससे लोग विचलित हो जाएं। आमतौर पर यह बात लोगों के दिमाग़ में घर कर गई है कि यह खेल गोदी मीडिया जानबूझकर करता है ताकि उस दल को फ़ायदा हो जिसने उसे ख़रीदा है। जनता को गुमराह करने के लिए यही से एक सवाल यह भी उठता है कि जब मोदी की भाजपा का चुनावी मैजिक जनता के सर चढ़कर बोल रहा है तो फिर देश भर में अधिकांश उप चुनाव क्यों हारती है। अभी तक हमने छत्तीसगढ़ की लगभग बीस विधानसभा क्षेत्रों में जा कर देखा। मतदाताओं से बातचीत के आधार पर हम कह सकते हैं कि मतदाताओं में सरकार के प्रति रोष व्याप्त है और वह बूथ पर सरकार को बदलने के लिए भारी तादाद में जाएगा।

बातचीत करने से यह भी पता चला कि सरकार के ख़िलाफ़ नाराज़गी का क्या कारण है। महँगाई भ्रष्ट्राचार बड़ी वजह तो है ही लोगों का कहना यह भी है कि सरकार में आम लोगों की सुनवाई नहीं है।

स्थानीय मुद्दे हावी

local politics

हमने यह भी जानने की कोशिश की कि क्या राफ़ेल में किया गया घोटाला कृषि बीमा घोटाले या सीबीआई में रही गड़बड़ी का भी कोई असर है, तो ज़्यादातर लोग स्थानीय मुद्दे ही को लेकर बात करते हैं। ऐसा भी नहीं वह इसको नकार रहे हैं, इन सबको लेकर भी रोष है। उनका कहना है कि हमने सरकार को विकास भ्रष्टाचार को खतम करने के लिए चुना था, यह सब करने के लिए नहीं चुना था जो वह कर रही है।

बहुत से लोगों ने हमसे कहा कि ओ हो यह भी होत है हमको धोखे में रखत है इ सरकार ये लखनऊ से आएत बाबू बताईत है।

तो यही कहा जा सकता है कि लोकल मुद्दे के साथ-साथ केन्द्रीय सरकार की कार्यशैली सरकार की नाक में नकेल डाले है जिसकी वजह से रमन सरकार जा सकती है। आगे परिणाम आने के बाद पता चलेगा कि क्या होगा सरकार रहेगी या जाएगी।

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