नरेंद्र मोदी ने अविश्वास प्रस्ताव जीता, जनता का विश्वास खोया - दीपंकर भट्टाचार्य

मोदी सरकार की पहचान बन गई है बढ़ती भीड़ हिंसा और भीड़ हत्या... भगवा ब्रिगेड को न तो कानून का न ही पुलिस या सरकार का कोई डर...

नरेंद्र मोदी ने अविश्वास प्रस्ताव जीता, जनता का विश्वास खोया - दीपंकर भट्टाचार्य

लखनऊ। नरेंद्र मोदी सरकार संसद में विपक्ष द्वारा लाये गए अविश्वास प्रस्ताव में भले ही पास हो गई है, लेकिन देश और जनता से जुड़े किसी भी सवाल का जवाब देने में वह बुरी तरह फेल हुई है।

यह बात यहां भारत की कम्युनिस्ट पार्टी (माले) के राष्ट्रीय महासचिव दीपंकर भट्टाचार्य ने यूपी प्रेस क्लब में आयोजित संवाददाता सम्मेलन में कही।

दीपंकर भट्टाचार्य ने कहा कि राफेल विमान सौदे में भ्रष्टाचार के आरोपों पर जनता को विश्वास में लेने में मोदी सरकार फेल हुई है। संसद में अविश्वास प्रस्ताव के दिन ही बाहर संसद मार्ग पर देशभर से जुटे किसान न्यूनतम समर्थन मूल्य पर मोदी सरकार द्वारा किये गए धोखे व अन्य किसान प्रश्नों पर केंद्र सरकार के खिलाफ अविश्वास प्रकट कर रहे थे। उसी दिन दिल्ली के बिजली कर्मी हड़ताल पर थे। किसान हों, मजदूर हों, या फिर छात्र-नौजवान - आज हर तबका मोदी सरकार के खिलाफ लामबंद हो रहा है। चार साल के कार्यकाल में केंद्र की राजग सरकार हर मोर्चे पर असफल साबित हुई है- चाहे भ्रष्टाचार रोकने का सवाल हो, प्रतिवर्ष दो करोड़ रोजगार देने या विदेश में जमा काला धन स्वदेश ले आने या महंगाई पर रोक लगाने जैसे प्रश्न हों।

मोदी सरकार की पहचान बन गई है बढ़ती भीड़ हिंसा और भीड़ हत्या

उन्होंने कहा कि देश भर में बढ़ती भीड़ हिंसा और भीड़ हत्या मोदी सरकार की पहचान बन गई है। ठीक जिस दिन सुप्रीम कोर्ट भीड़ हिंसा की बढ़ती घटनाओं पर रोक लगाने और केंद्र सरकार से इसके लिए अलग से कानून बनाने की बात कह रहा था, उसी दिन झारखंड के पाकुड़ में मानवाधिकार व सामाजिक कार्यकर्ता स्वामी अग्निवेश हिंदुत्ववादी संगठनों के लोगों की भीड़ हिंसा के शिकार बने। यह दिखाता है कि भगवा ब्रिगेड को न तो कानून का न ही पुलिस या सरकार का कोई डर है। यही नहीं, भाजपा सरकारें भीड़ हिंसा पर रोक लगाने की जगह अभियुक्तों को सम्मानित व संरक्षण देने का काम कर रही हैं। मोदी सरकार के मंत्री जयंत सिन्हा ने हाल ही में झारखंड में भीड़ हत्या के आरोपियों को माला पहनाकर उनका सम्मान किया। हापुड़ से लेकर पाकुड़ तक की घटनाएं गवाह हैं कि मोदी राज ने लोकतंत्र को भीड़तंत्र में बदल कर रख दिया है।

माले महासचिव ने कहा कि उत्तर प्रदेश की योगी सरकार भी अपने कारनामों के चलते प्रदेशवासियों का विश्वास खोती जा रही है। इसका ठोस संकेत कैराना लोकसभा उपचुनाव में विपक्ष की उम्मीदवार तबस्सुम बेगम की जीत और उससे पहले योगी की गोरखपुर सीट पर हुए उपचुनाव में भाजपा प्रत्याशी की हार से मिला है। योगी सरकार ने मुजफ्फरनगर दंगे के आरोपी भाजपा नेताओं और पूर्व केंद्रीय मंत्री भाजपा नेता स्वामी चिन्मयानंद पर से रेप का मुकदमा वापस लेकर लोकतंत्र-विरोधी काम किया है। योगी राज में महिलाओं-बच्चियों के साथ रेप-हत्या की घटनाएं बेलगाम हुईं हैं और कानून के राज के नाम पर एनकाउंटर राज चलाया जा रहा है। भूमाफियाओं पर कार्रवाई करने की जगह गरीबों-आदिवासियों को उनकी पुश्तैनी जमीनों से उजाड़ा जा रहा है और अल्पसंख्यकों को खास निशाना बनाया जा रहा है।

उन्होंने कहा कि भाकपा (माले) उत्तर प्रदेश में मोदी-योगी सरकार जवाब दो अभियान सहित देशभर में 'भाजपा हटाओ-देश बचाओ' अभियान चला रही है। छात्र नौजवान संगठन रोजगार के सवाल पर रोजगार मांगे इंडिया अभियान संचालित कर रहे हैं। आगामी नौ अगस्त को भारत छोड़ो दिवस पर किसान महासभा और खेत व ग्रामीण मजदूर संगठन कर्जमुक्ति समेत स्वामीनाथ आयोग की सिफारिशों को लागू कराने के लिये देशव्यापी जेल भरो आंदोलन करेंगे । बिहार में 27 अगस्त को पटना में भाजपा भगाओ, लोकतंत्र बचाओ- भगत सिंह, अम्बेडकर के सपनों का भारत बनाओ रैली होगी। उन्होंने कहा कि उत्तर प्रदेश को उम्मीदों का प्रदेश कहा जाता है और गत 2018 के चुनाव में इसी प्रदेश ने भाजपा को 72 सीटें देकर केंद्र की सत्ता में भेजा था। आगामी चुनाव में इसे सत्ता से हटाने की शुरुआत इसी प्रदेश से हो चुकी है। हमलोग इसी दिशा में कोशिश कर रहे हैं।

हस्तक्षेप से जुड़े अन्य अपडेट लगातार हासिल करने के लिए हमें
facebook फेसबुक पर फॉलो करे.
और
facebook ट्विटर पर फॉलो करे.
"हस्तक्षेप"पाठकों-मित्रों के सहयोग से संचालित होता है। छोटी सी राशि से हस्तक्षेप के संचालन में योगदान दें।