​​​​​​​नेहरू के विचार दक्षिणपंथी विचार के राजनैतिक और दार्शनिक फैलाव में चट्टान की तरह बाधक हैं

आज राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ और भाजपा के निशाने पर नेहरू और स्वतंत्रता संग्राम की विरासत है क्योंकि इसे झुठलाये बिना संघ का कोई वजूद नहीं रह जाता...

हाइलाइट्स

नेहरू की वैज्ञानिक सोच और धर्मनिरपेक्ष विचारों से पार नही पा सकते दक्षिणपंथी

अंबेडकर नेहरू के लिए कहते हैं कि पंडितों की सरकार में एक गैरब्राह्मणवादी प्रधानमंत्री है

आज राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ और भाजपा के निशाने पर नेहरू और स्वतंत्रता संग्राम की विरासत है क्योंकि इसे झुठलाये बिना संघ का कोई वजूद नहीं रह जाता।

लखनऊ। गुजरात सेंटल यूनिवर्सिटी के असिस्टेन्ट प्रोफेसर डॉ धनंजय कुमार राय ने कहा है कि भारत में दक्षिणपंथी विचार के राजनैतिक और दार्शनिक फैलाव में पंडित जवाहर लाल नेहरू के विचार चट्टान की तरह बाधक हैं, और वो (दक्षिणपंथी) कितनी भी कोशिश करें नेहरू की वैज्ञानिक सोच और धर्मनिरपेक्ष विचारों से पार नही पा सकते।

डॉ धनंजय कुमार राय जन विचार मंच द्वारा “वर्तमान राजनैतिक संदर्भ और नेहरू” विषय पर यहां कैफ़ी आज़मी सभागार में आयोजित संगोष्ठी में अपने विचार व्यक्त कर रहे थे।

उन्होंने कहा कि अगर दक्षिणपंथ की इन कोशिशों का प्रगतिशील ताकतों को मुकाबला करना है तो 1947 से पहले के नेहरू के आधुनिकता के विचारों को आगे बढ़ाना होगा, 1947 के बाद के नेहरू के आधुनिकीकरण से नही। आधुनिकता का संबंध मूल्यों से है जो संघर्ष और आंदोलन से निर्मित होता है जबकि आधुनिकीकरण केवल तकनीकी विकास तक सीमित है।

#जनविचारमंच_की_गोष्ठी।

गोष्ठी को संबोधित करते हुए लखनऊ यूनिवर्सिटी के पूर्व प्रोफेसर व राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी के नेता रमेश दीक्षित ने कहा कि पं. नेहरू ने हमेशा दिमाग की बात की है। आने वाला भारत समतावादी हो उसके लिए छात्रों, किसानों सब वंचितों की एकता ज़रूरी थी। पं. नेहरू ने हमेशा फांसीवाद के खिलाफ खुलकर बात रखी।

वक्ताओं ने कहा –

1- नेहरू ने individual को महत्व दिया। एक individual के अपने अधिकार होते हैं, उसकी अपनी political understanding और अपने मूल्य होते हैं वह किसी भीड़ का हिस्सा नहीं होता। परम्परावादी इसके उलट समुदाय को महत्व देते हैं।

2- right wing के अनुसार ज्ञान विज्ञान और सम्मान सब प्राचीन है, सारे अनुसंधान प्राचीन हैं और यहां तक कि अंधविश्वासों का भी वैज्ञानिक आधार है। नेहरू कहते थे कि हमने अन्य देशों से भी सीखा है। नेहरू जाति व्यवस्था को नकारते हैं, वे समानता के पक्षधर हैं। उनका कहना है कि समाजवाद के अलावा कोई और रास्ता नहीं है। वे वैज्ञानिक temperament की बात करते हैं। नेहरू state without religion की बात करते हैं।

3- अंबेडकर नेहरू के लिए कहते हैं कि पंडितों की सरकार में एक गैरब्राह्मणवादी प्रधानमंत्री है।

4- right wing के अनुसार #भारत_का_संविधान anti Hindu है क्योंकि यह conversion को मान्यता देता है।

5- modern and modernization में फर्क है। आधुनिक होने का मतलब समानता के मूल्यों पर विश्वास करना जबकि आधुनिकीकरण का मतलब तकनीक से है। नेहरू आधुनिक मूल्यों पर विश्वास रखते थे।

6- 1936 में लखनऊ कांग्रेस अधिवेशन में नेहरू के क्रान्तिकारी भाषण के बाद 21 धन्ना सेठों ने कांग्रेस के खिलाफ बयान जारी किया क्योंकि उन्हें लगा कि नेहरू किसानों मजदूरों की बात कर रहे हैं ये धन्ना सेठों का भला नहीं करेंगे तो उस समय के उद्योगपति घनश्याम दास बिड़ला ने पत्र लिखकर धन्ना सेठों को फटकारा और कहा कि भूला भाई देसाई और सरदार पटेल भी तो कांग्रेस कार्यसमिति में हैं जो हमारे हैं।

7- नेहरू ने 1952 के चुनाव में secularism पर वोट मांगा, उनका दृढ़ विश्वास था कि हिन्दुस्तान केवल धर्मनिरपेक्षता से ही जिन्दा रह सकता है।

8- आज राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ और भाजपा के निशाने पर नेहरू और स्वतंत्रता संग्राम की विरासत है क्योंकि इसे झुठलाये बिना संघ का कोई वजूद नहीं रह जाता।

गोष्ठी की अध्यक्षता गिरी इंस्टीटूट के निदेशक प्रोफेसर सुरेंद्र कुमार ने तथा संचालन प्रोफेसर नदीम हसनैन ने किया।

 

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