60 नौनिहालों की मौत : यूपी के मुख्यमंत्री पर हत्या का मुक़दमा चले

क्या पिछली सरकारों के कार्यकाल या पिछले अगस्त महीने में होने वाली मौतों का आंकड़ा देने से इस सरकार के कार्यकाल या इस अगस्त महीने में होने वाली मौतों की ज़िम्मेदारी कम हो हो जाती है?   ...

हाइलाइट्स

अगर बच्चों की मौत आक्सीज़न की कमी से नहीं अन्य कारणों से हुई, जैसा कि स्वास्थ्य मंत्री कहते हैं, तो क्या अन्य कारणों से मौत रोकना सरकार की ज़िम्मेदारी नहीं है? क्या पिछली सरकारों के कार्यकाल या पिछले अगस्त महीने में होने वाली मौतों का आंकड़ा देने से इस सरकार के कार्यकाल या इस अगस्त महीने में होने वाली मौतों की ज़िम्मेदारी कम हो हो जाती है?   

Death of 60 children UP chief minister sued for murder

 

नई दिल्ली। सोशलिस्ट पार्टी (इंडिया) ने कहा है कि गोरखपुर मेडिकल कॉलेज में 60 नौनिहालों की मौत सामान्य लापरवाही का मामला नहीं है। यह 60 बच्चों की हत्या का आपराधिक मामला है। माननीय उच्चतम न्यायालय को तुरंत संज्ञान लेकर यूपी के मुख्यमंत्री और स्वास्थ्य मंत्री पर हत्या का मुक़दमा चलाना चाहिए।

पार्टी अध्यक्ष डॉ. प्रेम सिंह ने कहा कि सोशलिस्ट पार्टी (इंडिया) गोरखपुर के बाबा राघवदास (बीआरडी) अस्पताल में 5 दिनों में इंसेफलाइटिस (दिमागी बुखार) से पीड़ित 60 बच्चों की मौत के मामले में उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री को सीधे जिम्मेदार मानती है। योगी आदित्यनाथ पिछले कई लोकसभा चुनावों में गोरखपुर से सांसद रहे हैं। (दिमागी बुखार) का प्रकोप गोरखपुर इलाके में पिछले कई सालों से जारी है। फिलहाल वे यूपी के मुख्यमंत्री हैं। उन्होंने घटना के दो दिन पहले ही अस्पताल का दौरा किया था। इसके बावजूद ऑक्सीजन की कमी से इतने नौनिहालों की मौत हो गई।

Photo with courtesy https://pbs.twimg.com/media/DHGkco2V0AEp5Wx.jpg:large

डॉ. प्रेम सिंह ने कहा कि सवाल है कि क्या योगी के दौरे के दौरान स्वास्थ्य महकमे के अधिकारियों ने या अस्पताल प्रबंधक ने उन्हें अस्पताल में ऑक्सीजन की कमी के बारे में नहीं बताया था? क्या सूबे के स्वास्थ्य मंत्री सिद्धार्थनाथ सिंह ने उस चिट्ठी का जिक्र नहीं किया था जो ऑक्सीजन सप्लाई करने वाली कंपनी पुष्पा सेल्स प्राइवेट लिमिटेड ने स्वास्थ्य मंत्री को लिखी थी? चिट्ठी में साफ तौर पर लिखा था कि कंपनी आगे अस्पताल में ऑक्सीजन की सप्लाई नहीं कर पाएगी। (भुगतान केवल 60 लाख रुपयों का था। इस रकम से कहीं ज्यादा तो मुख्यमंत्री ने मुख्यमंत्री आवास का 'शुद्धिकरण' कराने में खर्च कर दिया होगा.) इसके बावजूद मुख्यमंत्री और स्वास्थ्य मंत्री आक्सीज़न की सप्लाई सुनिश्चित नहीं करते. ऊपर से मुख्यमंत्री और स्वास्थ्य मंत्री दोनों पूरे मामले में निर्लज्जतापूर्वक लीपापोती और गलतबयानी करते हैं.

अगर बच्चों की मौत आक्सीज़न की कमी से नहीं अन्य कारणों से हुई, जैसा कि स्वास्थ्य मंत्री कहते हैं, तो क्या अन्य कारणों से मौत रोकना सरकार की ज़िम्मेदारी नहीं है? क्या पिछली सरकारों के कार्यकाल या पिछले अगस्त महीने में होने वाली मौतों का आंकड़ा देने से इस सरकार के कार्यकाल या इस अगस्त महीने में होने वाली मौतों की ज़िम्मेदारी कम हो हो जाती है?   

Photo with courtesy https://pbs.twimg.com/media/DHGZGf4XsAAwXAt.jpg:large

ज़ाहिर है, यह सामान्य लापरवाही का मामला नहीं है. सोशलिस्ट पार्टी मानती है कि यह 60 बच्चों की हत्या का आपराधिक मामला है. उच्चतम न्यायालय को तुरंत संज्ञान लेकर यूपी के मुख्यमंत्री और स्वास्थ्य मंत्री पर हत्या का मुक़दमा चलाना चाहिए. या फिर जनहित में किसी नागरिक संगठन अथवा वकील द्वारा यह मुक़दमा दायर किया जाना चाहिए. ताकि इवेंट और इमेज मैनेजमेंट को ही राजनीति मानाने वालों को कड़ा सबक और बच्चों के मता-पिता व परिजनों को न्याय मिल सके.

हस्तक्षेप से जुड़े अन्य अपडेट लगातार हासिल करने के लिए हमें
facebook फेसबुक पर फॉलो करे.
और
facebook ट्विटर पर फॉलो करे.
"हस्तक्षेप"पाठकों-मित्रों के सहयोग से संचालित होता है। छोटी सी राशि से हस्तक्षेप के संचालन में योगदान दें।