कंधमाल साम्प्रदायिक हिंसा के 10 साल, हिंसा के लिए जिम्मेदार कोई भी व्यक्ति आज जेल में नहीं

कंधमाल साम्प्रदायिक हिंसा के 10 साल, हिंसा के लिए जिम्मेदार कोई भी व्यक्ति आज जेल में नहीं...

कंधमाल साम्प्रदायिक हिंसा के 10 साल, हिंसा के लिए जिम्मेदार कोई भी व्यक्ति आज जेल में नहीं

Decade of Kandhamal : Call for Action on Kandhamal Day August 25th, 2018

प्रिय दोस्तों

 उम्मीद है आप सभी को याद होगा कि 2008 में स्वतंत्रता दिवस के जश्न के सिर्फ़ आठ दिनों बाद ओडिशा के कंधमाल में गंभीर सांप्रदायिक नरसंहार हुआ था। भारत पिछले कुछ सदियों में, ईसाइयों के खिलाफ सबसे बड़े संगठित सांप्रदायिक हमले का गवाह बना है। कंधमाल के स्थानीय लोगो तथा बाहर के लोगों के द्वारा प्रत्येक वर्ष की तरह इस वर्ष भी 25 अगस्त को कंधमाल दिवस का आयोजन किया गया है। 25 अगस्त 2018 को कंधमाल साम्प्रदायिक हिंसा का एक दशक का पूरा हो जायेगा।

 इस नरसंहार के दौरान लगभग 693 चर्चों, पूजा स्थलों और 6,500 घरों को नष्ट कर दिया गया, जो आदिवासी ईसाइयों और दलित ईसाइयों से संबंध रखते थे। 100 से अधिक लोग मारे गए, 40 से अधिक महिलाएं बलात्कार, छेड़छाड़ और अपमान का शिकार हुईं। कई शैक्षिक, सामाजिक सेवा और स्वास्थ्य संस्थानों को लूटा गया और नष्ट कर दिया गया। 12,000 से अधिक बच्चे शिक्षा से वंचित हो गए। 46,000 से अधिक लोग कंधमाल से पलायन को मजबूर हो गए। हिंसा के इस माहौल में संघ परिवार द्वारा आदिवासी ईसाइयों को जबरन धर्मांतरण के लिए मजबूर किया गया और जिन्हें यह करना मंजूर नहीं था उन्हें कंधमाल से पलायन करना पड़ा। वे आज भी  देश के विभिन्न हिस्सों में रह रहे हैं। वे लोग अपने गांवों में वापस नहीं आ रहे क्योंकि उन्हें डर कि जब तक वे हिंदू नहीं बन जाते उन्हें जान से मार दिया जाएगा। वे विस्थापित हैं और अपने गृह जिले के बाहर काम कर रहे हैं, वे सिर्फ ' प्रवासी मजदूर ' नहीं हैं बल्कि वे सांप्रदायिक नरसंहार के शिकार हैं।  भारत में वो शायद आप के आसपास के क्षेत्रों भी रहते हो।

कंधमाल की साम्प्रदायिक हिंसा ओडिशा के अन्य जिलों के साथ दूसरे राज्यों में भी फैल गई। यह भी ध्यान देने योग्य है कि कंधमाल में स्थानीय लोगो ने कभी हिंसा का सहारा नही लिया। हिंसा का षड्यंत्र हिंदुत्ववादी बलों द्वारा आयोजित किया गया था। कंधमाल के लोग हिंसा के माहौल में जीते हुए दस वर्षों से शांति, न्याय और सद्भाव के लिए संघर्ष कर रहे हैं।

कंधमाल के पीड़ितों को सरकार द्वारा न्यूनतम मुआवजा दिया गया। 3,300 से अधिक मामलों में से सिर्फ 820 पर ही एफ आइ आर दर्ज की गई  बाकी शिकायतों का पंजीकरण भी नहीं हुआ। इन शिकायतों के बीच सिर्फ 418 मामलों में ही चार्ज शीट दायर हो पाई। शेष मामलों को झूठी रिपोर्ट करार दे दिया गया। जिन मामलो में चार्जशीट दायर हुई उन में से 247 मामलों का निपटारा कर दिया गया बाकी मामले सत्र व दंडाधिकारी अदालतों के समक्ष लंबित हैं। कई मामलों में आरोपी पहले से ही बरी कर दिए गए। यदि आप दर्ज की गई शिकायतो को न्याय आधार माने तो उस अनुपात में ये केवल 1% है।

2 अगस्त 2016 को न्यायमूर्ति टी एस ठाकुर और न्यायमूर्ति उदय ललित ने उच्चतम न्यायालय में अपने फैसले में कहा कि कंधमाल हिंसा पीड़ितों को दिया गया मुआवजा संतोषजनक नहीं है और यह आदेश दिया कि  मुआवजा की सूची में जिन पीड़ितों के नाम नही  है उन्हें तत्काल शामिल किया जाये। इसमे मारे लोगो के परिवारों का मुआवजा भी शामिल है। मकान और संपत्तियों के विनाश, चर्चों, संस्थाओं, गैर सरकारी संगठनों और अन्य ऐसे विनाश किये गए भवनों के लिए भी मुआवजा दिया जाए।

अदालत ने यह भी पाया कि बहुत से आरोपियों को नहीं पकड़ा गया और साथ ही न्यायालय ने सांप्रदायिक हिंसा के लिए दायर किये गए 324 मामलों की समीक्षा करने का भी आदेश दिया। हाईकोर्ट का यह विचार था कि राज्य सरकार को इन 324 मामलों की समीक्षा करनी चाहिए ताकि अपराधियों को पकड़ा जा सके लेकिन अभी भी तक इस दिशा में कोई भी कार्यवाही नहीं की गई।

यह भी सुनिश्चित किया जाना चाहिए कि

1.  इन मामलों पर नजर रखने के लिए एक 'टास्क फोर्स' का गठन किया जाना चाहिए।

 2.  जिन  गवाहों को धमकियां मिल रही है उन के लिए सुरक्षा सुनिश्चित की जानी चाहिए।

3. स्वतंत्र और निष्पक्ष जांच के लिए मामलों को फिर से खोला जाना चाहिए।

इन कदमों को उठाये बिना कंधमाल हिंसा के पीड़ित को न्याय दिलाना काफी मुश्किल होगा।

कंधमाल हिंसा के लिए जिम्मेदार कोई भी व्यक्ति आज जेल में नहीं है। हत्या, बलात्कार, और लूट के आरोपी आज़ाद  घूम रहे हैं लेकिन सात बेकसूर आदिवासी ईसाई और दलित ईसाई अब भी फर्जी मामलों में जेल में सज़ा काट रहे  हैं।

धर्मनिरपेक्षता, लोकतंत्र, न्याय, शांति और समाजिक समरसता में विश्वास करने वाले

"राष्ट्रीय एकता मंच" और "कंधमाल बचाओ एसोसिएशन" के सदस्यों द्वारा आगामी 25 अगस्त 2018 को कंधमाल दिवस का आयोजन किया जा रहा है। "राष्ट्रीय एकता मंच" कंधमाल के पीड़ितो को न्याय दिलाने के लिए देश के विभिन्न भागों में काम करने की वाले 70 से अधिक संगठनों का एक नेटवर्क है। "कंधमाल बचाओ एसोसिएशन" कंधमाल हिंसा में  प्रभावित गांव में पीड़ित लोगों के साथ तत्परता से आंदोलन कर रहा है।

 हम सब आप सभी से अपील करते हैं कि कृपया आप साथ आये और निम्नलिखित मांगों पर अमल करवाने में हमारी मदद करें।

1. 2 अगस्त, 2016 के सुप्रीम कोर्ट द्वारा दिये गए  फैसले का अमल किया जाय।

2. मुज़्ज़फ्फर नगर हिंसा के मामलों में मौत का मुआवजे का 15 लाख तक दिया जाये और जिन पीड़ितों के नाम मुआवजा सूची में सूचीबद्ध नहीं है, उन्हें सूचीबद्ध किया जाय।

3. हिंसा में  बरी किये गए आरोपियों के मामलों को फिर से देखा जाना चाहिए।

4. सांप्रदायिक ताकतों के साथ गठजोड़ में शामिल लोक सेवको की भी जांच 'विशेष जांच समिति' द्वारा करायी जानी चाहिए

5. संयुक्त राष्ट्र  के विशेष दूत मिलन कोठारी के अध्ययन द्वारा 5 लाख मुआवजे के विशेष पैकेज की  सिफारिश, मकानों की मरम्मत और पुनर्निर्माण के लिए की गई थी। ये मुआवजा राशि पीड़ितों को जल्द से जल्द दी जाये और जिन लोगो ने अपना करोबार खोया है उन्हें भी मुआवजा दिया जाए। उन पीड़ितों को भी मुआवजे के लिए सूचीबद्ध किया जाय जिनका नाम किन्ही  कारणों से सूची में दर्ज नही है।

6. 'ओडिशा अल्पसंख्यक आयोग' की  तुरंत स्थापना की जाय।

7. अल्पसंख्यक योजनाओं और छात्रवृत्ति को समयबद्ध तरीके से लागू कराने और कार्यांवयन में किसी प्रकार की चूक और देरी के लिए जिम्मेदार अधिकारियों पर कार्यवाही की जाए।

8. महत्वपूर्ण प्रशासनिक संस्थाओं में अल्पसंख्यक समुदाय की उपस्थिति सुनिश्चित की जानी चाहिए, समाजिक समरसता को बढ़ाने तथा निर्णय निर्माण की प्रक्रिया में अल्पसंख्यक समुदाय को शामिल किया जाना चाहिए ताकि  पक्षपातपूर्ण निर्णय लेने से बचा जा सके।

9. ओडिशा धर्मांतरण विरोधी कानून और राष्ट्रपति आदेश 1950 पैरा 3को खत्म किया जाना चाहिए।

10. सांप्रदायिक ताकतों का प्रभावी ढंग से मुकाबला करने के लिए प्रशासन और नागरिकों को मिलाकर एक इंटरफेस का गठन किया जाये।

उपरोक्त मांगें 3 साल पहले ही भारत के राष्ट्रपति के समक्ष 8 सदस्यीय टीम रखी गई थी। इस टीम में कविता कृष्णन और वृंदा करात भी शामिल थी। इस टीम को यह आश्वासन दिया गया था कि इन मांगों पर विचार किया जायेगा। विभिन्न राजनीतिक दलों से संबंध रखने वाले नेताओं जैसे मणि शंकर अय्यर, मेधा पाटकर, अभय साहू ने भी इन मांगों का समर्थन किया और इन मांगों पर अमल करवाने के लिए काम किया लेकिन आज तक इन मांगों पर कोई कार्रवाई नहीं की गई

इसलिए हम आपसे अपील करते हैं कि

1.कंधमाल हिंसा के पीड़ितों के न्याय, शांति और सामाजिक सद्भाव के संघर्ष को अपना सहयोग और समर्थन दे एवम अपने क्षेत्र में 25 अगस्त 2018 को कंधमाल दिवस का आयोजन करें।

2. कंधमाल हिंसा के पीड़ितों को न्याय दिलाने के लिए और सामाजिक सद्भाव के लिए अपने क्षेत्र में शान्तिपूर्ण सार्वजनिक कार्यक्रमों का आयोजन करे और कैंडल मार्च निकाले।

3. कंधमाल दिवस  28 अगस्त को कंधमाल में और 29 अगस्त को भुवनेश्वर में मनाया जाएगा।  जिसमे लगभग 10,000 लोग शामिल होंगे  जो मुख्य रूप से उन समुदायों से है जो गंभीर रूप से इस हिंसा से प्रभावित है। कंधमाल में  एक सभा का आयोजन किया जायेगा। जो लोग  इस आयोजन  में शामिल होने के इच्छुक हैं कृपया धीरेंद्र पंडा, मनोज नायक या अजय कुमार सिंह को सूचित करें।

4.   अपने क्षेत्र में इस विषय पर बनी फ़िल्म की स्क्रिनिंग का आयोजन करें। इस विषय पर बनी फिल्म तथा लिखित सामग्री का वितरण करे। नीचे उल्लेख किये गए लोगों से संपर्क कर आप इस विषय पर बनी फिल्म तथा लिखित सामग्री प्राप्त कर सकते हैं

5. इस मुद्दे पर जागरूकता फैलाने  एवम अधिक लोगों तक अपनी बात पहुंचाने लिए रंगमंच प्रदर्शनो, फोटो प्रदर्शनियों, कला प्रदर्शनियों का अपने क्षेत्र आयोजन करें। ऐसे कई प्रयास पहले से ही किये जा रहे हैं आप उनकी मदद भी ले सकते है।

6. इस मुद्दे पर लोगो को जागरूक करने के लिए और अधिक  लोगों तक जानकारी साझा करने के लिए सोशल मीडिया और मुख्यधारा के मीडिया का उपयोग करें।

हमें विश्वास है कि यदि सभी मानवतावादी ताकतें इस देश में शांति, न्याय और समाजिक सद्भाव के निर्माण के लिए हाथ मिला लेंगी तो हम इस अँधेरे समय में भी हम जीत हासिल कर सकते हैं और भारतीय संविधान के मूल्यों की रक्षा कर सकते हैं ताकि भविष्य में ऐसी कोई हिंसा भारत में फिर से न हो।

आपकी प्रतिक्रियाओं का स्वागत हैं।

Ram Puniyani (Convener, National Solidarity Forum):

Dhirendra Panda (Coordinator, National Solidarity Forum):

Ajaya Kumar Singh (Founder Member/ Co-convener, National Solidarity Forum):

KP Sasi (Co-convener, National Solidarity Forum) :

Manoj Nayak (Coordinator, Kandhamal Survivors’ Association) :

Paul Pradhan (Convener, Kandhamal Survivors’ Association)

काउंटर करंट्स पर प्रकाशित मूल ख़बर का नताशा खान द्वारा अनुवाद

 

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