पर्यावरण के मित्र हैं मिट्टी के दिए और मोमबत्तियां

रोजमर्रा की व्यस्त जीवनशैली के बीच एक बदलावपूर्ण माहौल बनाते हैं। दिवाली के इस मौके को ईको फ्रेंडली तरीके से सेलिब्रेट करके सेहतमंद त्योहार मनाएं।...

यशोदा सुपरस्पेशलिटी हॉस्पिटल, कौशाम्बी में श्रद्धा और उल्लास से मनाई गई दीपावली

कौशाम्बी (गाजियाबाद) 8 नवंबर 2018 । यशोदा सुपर स्पेशलिटी हॉस्पिटल, कौशाम्बी, गाज़ियाबाद की डायरेक्टर श्रीमती उपासना अरोड़ा एवं वरिष्ठ समाज सेवी डॉ. पी. एन. अरोड़ा ने दीपावली के अवसर हॉस्पिटल के स्टाफ, मरीजों एवं उनके तीमारदारों के साथ दीपावली का त्‍योहार पूरे पारंपरिक श्रद्धा एवं हर्षोल्लास के साथ मनाया।

इस अवसर पर हॉस्पिटल प्रांगण में स्थापित मंदिर में पूजा अर्चना की गई और दिए जलाए गए। हॉस्पिटल की लॉबी में भारत के मानचित्र की रंगोली बनाकर उसके आस पास दिये जलाए। 

श्रीमती उपासना अरोड़ा ने सभी को ग्रीन दीवाली मनाने का आग्रह करते हुए कहा कि हम सब पटाखे न फोड़ें, इससे वातावरण में प्रदूषण फैलता है,  तथा हॉस्पिटल के सभी स्टाफ को दिवाली की बधाई दी।

डॉ पी. एन. अरोड़ा ने बुराई पर अच्छाई की जीत के प्रतीकात्मक दीपावली पर्व पर गाजियाबाद एवं सभी देशवासियों को बधाई दी।

उन्होंने कहा कि ‘यह त्योहार हमारे देश के सभी वर्गों के लोगों के लिए खुशियां और समृद्धि लेकर आए।’

श्री अरोड़ा ने कहा,

‘मैं सभी भारतीयों से दीपावली का त्योहार प्रदूषण मुक्त तरीके से मनाने की अपील करता हूं।’

ग्रीन दीवाली मनाने का आग्रह करते हुए डॉ. अरोड़ा ने कहा कि सभी जनप्रतिनिधि व गणमान्य लोगों से अपील है कि वे हरित दीपावली मनाने को लेकर लोगों को जागरुक करें।

उन्होंने कहा कि माननीय सर्वोच्च न्यायालय के आदेशानुसार पटाखे संध्या आठ बजे से दस बजे तक जलाएं, डूप्लीकेट पटाखे से सावधानी बरतें, इससे प्रदूषण की समस्या बढ़ती है। त्योहार हमें खुशमिजाज और उत्साहित बनाए रखते हैं। रोजमर्रा की व्यस्त जीवनशैली के बीच एक बदलावपूर्ण माहौल बनाते हैं। दिवाली के इस मौके को ईको फ्रेंडली तरीके से सेलिब्रेट करके सेहतमंद त्योहार मनाएं।

Green Festival i.e. Eco Friendly Festivals

ग्रीन फेस्टिवल यानी ईको फ्रेंडली त्योहार मनाने का क्रेज इन दिनों सभी जगह तेजी से बढ़ रहा है। गणेश चतुर्थी, नवरात्र के बाद अब लोग दिवाली भी पर्यावरण को नुकसान पहुंचाए बगैर मनाने की योजना बना रहे हैं। तो फिर क्यों न आप भी मनाएं इस बार खास दिवाली।

पटाखों से स्वास्थ्य व पर्यावरण को होने वाला नुकसान

Health and environmental damage from firecrackers

डॉ. अरोड़ा ने कहा कि विषैले तत्त्वों से सुरक्षा हेतु कई शोधों में यह बात साबित हो चुकी है कि पटाखों की भयानक आवाज न केवल बुजुर्गों की श्रवण क्षमता को कमजोर करती है, वहीं इससे हार्ट अटैक के मामलों में भी वृद्धि हुई है। ऐसे में पटाखों के विकल्प के तौर पर सूखे पत्ते, घास और डालियां जैसी चीजों से बोनफायर जला कर रोशनी के इस त्योहार को किसी खुली जगह पर सबके साथ मनाएं। अगर बच्चे पटाखे जलाने की जिद करें तो उन्हें प्राकृतिक पटाखे जलाने के लिए दें। ये पटाखे रिसाइकिल पेपर से बनते हैं और इनसे शोर बहुत कम होता है। अगर फिर भी बच्चे बाजार के पटाखे जलाने के लिए जिद करें तो आप कई बच्चों का एक समूह बनाकर किसी मैदान या खुली जगह पर अपनी देखरेख में पटाखे जला सकते हैं, आतिशबाजी कर सकते हैं। इस तरह आप बच्चों को पटाखों के खतरे से तो बचाएंगे ही और उन्हें एक जिम्मेदार नागरिक भी बनाएंगे।

डॉ. अरोड़ा ने कहा कि इस मौके पर बनने वाली रंगोली के लिए कृत्रिम रंगों की बजाय प्राकृतिक रंगों से रंगोली बनाएं। सफेद रंग चावल के पाउडर से बनाएं। पीले रंग के लिए हल्दी या दाल का इस्तेमाल करें। भूरे रंग के लिए लौंग या दालचीनी का, हरे रंग के लिए सौंफ और लाल रंग के लिए कुमकुम का इस्तेमाल करें। इसके अलावा फूलों से भी रंगोली बनायी जा सकती है।

Give recyclable gift as gift

रिसाइक्लेबल गिफ्ट के प्रचलन को बढ़ावा देने के लिए डॉ. अरोड़ा ने कहा कि दिवाली के मौके पर उपहार देने का भी चलन है। बाजार में कई ऐसे सामान बिकने लगे हैं, जो नष्ट नहीं होते हैं। ऐसे सामान को नॉन-रिसाइकल्ड सामान कहते हैं। जैसे-प्लास्टर ऑफ पेरिस की बनी मूर्तियां, पॉलीथिन से बने गिफ्ट आदि। ये नॉन-रिसाइकल्ड सामान वर्षों तक कचरे के रूप में यूं ही पड़े रहते हैं। इसलिए कोशिश करें कि मिट्टी की मूर्तियां, ईकोफ्रेंडली लैंप आदि रिसाइक्लेबल गिफ्ट ही उपहार के रूप में दें।

पर्यावरण के मित्र हैं मिट्टी के दीए और मोमबत्तियां

Soil Lamps and Candles are friends of the environment

डॉ. अरोड़ा ने कहा कि दीपावली पर मिट्टी के दीपक जलाने का रिवाज रहा है लेकिन बदलती जीवनशैली के चलते इनकी जगह अब इलेक्ट्रिक दीयों ने ले ली है, जिससे बिजली की ज्यादा खपत होती है। ऐसे में मिट्टी के दीए और मोमबत्तियां पर्यावरण के मित्र का काम करते हैं। सस्ते होने के साथ ये स्वाभाविक तरीके से नष्ट भी हो जाते हैं साथ ही घर को भी पारंपरिक लुक देती हैं। अगर आप बिजली   की झालर आदि का इस्तेमाल करना चाहते हैं, तो सादा लाइट के बजाय एलईडी लाइट का इस्तेमाल कर सकते हैं। इससे ऊर्जा की खपत भी कम होगी, रोशनी भी ज्यादा मिलेगी।

एक व्यक्ति कितने डेसिबल तक आवाज सुन सकता है

How many decibels sounds can hear a person

डॉ अरोड़ा ने बताया कि सामान्यत: एक व्यक्ति 60 डेसिबल तक आवाज सुन सकता है। इसके बाद हर 3 डेसिबल आवाज की वृद्धि खतरनाक होती है। कई पटाखों जैसे रस्सी बम आदि से शोर 115 डेसिबल से भी ज्यादा होता है। एक अध्ययन के मुताबिक दिवाली के दौरान ज्यादा शोर श्रवण शक्ति को क्षति पहुंचाता है।

पटाखों से होने वाले नुकसान

Damage caused by firecrackers

विश्व स्वास्थ्य संगठन के अध्ययन के अनुसार दुनिया के सबसे प्रदूषित वायु वाले 20 शहरों में देश के 13 शहर हैं। दिवाली के दिनों में तो वायु प्रदूषण कई गुना बढ़ जाता है। साथ ही दूसरे दिन शहर की सड़कों पर कई मीट्रिक टन अतिरिक्त कचरा भी मिलता है। पटाखों के प्रदूषण से अस्थमा, मिर्गी और कैंसर का खतरा बढ़ता है। हाई ब्लडप्रेशर व हृदयरोग के मरीज पटाखे फूटने से असहज हो जाते हैं। इसमें भरा जाने वाला सीसा व पारा किडनी, फेफड़ों व नर्वस सिस्टम को क्षति पहुंचाता है। पटाखों से खांसी का अटैक होता है। आंखों में एलर्जी होने से पानी निकलने की समस्या हो सकती है। पटाखों का शोर छोटे बच्चों को विचलित करता है। उनके नर्वस सिस्टम को नुकसान होता है। 

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