भारतीय समाज में समानता और भाईचारा पूरी तरह नदारद : दिल्ली हाईकोर्ट की 2010 मिर्चपुर (हरियाणा) मामले में सख्त टिप्पणी

"जाट समुदाय ने जानबूझकर, सोच-समझकर वाल्मीकि समुदाय के लोगों पर हमला किया..."

हस्तक्षेप डेस्क
Updated on : 2018-08-24 11:50:16

भारतीय समाज में समानता और भाईचारा पूरी तरह नदारद : दिल्ली हाईकोर्ट की 2010 मिर्चपुर (हरियाणा) मामले में सख्त टिप्पणी

नई दिल्ली, 24 अगस्त। 2010 मिर्चपुर (हरियाणा) मामले की सुनवाई करते हुए दिल्ली हाईकोर्ट ने सख्त टिप्पणी करते हुए कहा है कि भारतीय समाज में समानता और भाईचारा पूरी तरह नदारद है।

वर्ष 2010 के मिर्चपुर केस में दिल्ली हाईकोर्ट ने आरोपियों की अपील को खारिज करते हुए कहा,

"जाट समुदाय ने जानबूझकर, सोच-समझकर वाल्मीकि समुदाय के लोगों पर हमला किया..."

कोर्ट ने समुदाय के उन लोगों को दोषी करार दिया, जिन्हें सत्र अदालत ने बरी कर दिया था।

दिल्ली उच्च न्यायालय का कहना है,

"जाट समुदाय ने जानबूझकर वाल्मीकि समुदाय के लोगों पर हमला किया।" अदालत ने जाट समुदाय के लोगों को भी दोषी ठहराया जिन्हें पहले सुनवाई अदालत ने बरी कर दिया था।

दिल्ली उच्च न्यायालय ने कहा,

"आजादी के 71 साल बाद, प्रमुख (dominant) जातियों के लोगों द्वारा अनुसूचित जाति के खिलाफ अत्याचार के उदाहरणों में कमी का कोई संकेत नहीं दिखाया गया है।"

वर्ष 2010 के मिर्चपुर केस में दिल्ली हाईकोर्ट ने कहा, "मिर्चपुर में 19 से 21 अप्रैल, 2010 के बीच हुई घटनाएं एक बार फिर यह कड़वा एहसास दिलाती हैं कि 'भारतीय समाज में दो चीज़ों - समानता और भाईचारा - पूरी तरह नदारद हैं...', जैसा डॉ भीमराव अम्बेडकर ने संविधान के अंतिम ड्राफ्ट में लिखा था..."

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