सवर्ण आरक्षण और 13 प्वाइंट रोस्टर के खिलाफ बहुजन छात्रों का जुझारु प्रतिरोध मार्च

Demonstration against 13 point roster of departmental teachers in the appointment of teachers .... 13प्वाइंट रोस्टर के जरिए उच्च शिक्षा में द्रोणाचार्यों का दबदबा बढ़ेगा....

अतिथि लेखक

भागलपुर (बिहार)। सवर्ण आरक्षण (General reservation) और विश्वविद्यालयों में शिक्षक नियुक्ति में विभागवार 13 प्वाइंट रोस्टर (13 point roster of departmental teachers in the appointment of teachers) के खिलाफ तिलकामांझी भागलपुर विश्वविद्यालय परिसर के बहुद्देश्यीय प्रशाल से बहुजन छात्रों का जोरदार प्रतिरोध मार्च निकला.

Demonstration against 13 point roster of departmental teachers in the appointment of teachers

मार्च के दरम्यान विश्वविद्यालय प्रशासनिक भवन के सामने छात्रों ने प्रर्दशन किया और कुलपति को यूजीसी के नाम 13 प्वाइंट रोस्टर के खिलाफ ज्ञापन सौंपा.

फिर प्रतिरोध मार्च शहर के मुख्य सड़क मार्ग से गुजरते हुए आयुक्त कार्यालय समक्ष आकर प्रदर्शन में तब्दील हो गया. सभा के साथ समाप्त हुआ.

आयुक्त कार्यालय को सवर्ण आरक्षण और 13 प्वाइंट रोस्टर को रद्द करने, 200 प्वाइंट रोस्टर फर अध्यादेश लाने, संख्यानुपात में प्रतिनिधित्व की गारंटी के लिए दलितों-आदिवासियों-पिछड़ों के आरक्षण की सीमा राष्ट्रीय स्तर पर 50% से बढ़ाकर 69% करने, न्यायपालिका व निजी क्षेत्र में आरक्षण देने और 1990 से बैकलॉग भरने की गारंटी के साथ तमाम सरकारी रिक्त पदों पर नियुक्ति करने की मांगों से संबंधित ज्ञापन सौंपा गया.

मार्च का नेतृत्व अंजनी, अजय कुमार राम, वीरेंद्र गौतम, सौरव राणा, मिथलेश विश्वास, विभूति, सोनम, हीरालाल, रवि कुशवाहा, अमित, राजेश, सौरभ कुमार, सुधांशु, संजीव, सार्थक भारत, अभिषेक आनंद कर रहे थे.

इस मौके पर आयुक्त कार्यालय के समक्ष सभा को संबोधित करते हुए सामाजिक न्याय आंदोलन, बिहार के कोर कमिटी सदस्य अंजनी और बिहार फुले-अंबेडकर युवा मंच के अजय कुमार राम ने कहा कि नरेन्द्र मोदी सरकार संविधान और सामाजिक न्याय पर लगातार हमला बोल रही है. संविधान संशोधन के जरिए सवर्ण आरक्षण लागू कर इस सरकार ने मनुविधान थोपने की दिशा में कदम बढ़ाया है. शासन-सत्ता की संस्थाओं पर सवर्णों की गिरफ्त को मजबूत बनाने का काम किया है.इसे कतई बर्दाश्त नहीं किया जा सकता है.

सौरव राणा और मिथलेश विश्वास ने कहा कि विश्वविद्यालयों में विभागवार 13 प्वाइंट रोस्टर के जरिए शिक्षक नियुक्ति में दलितों-आदिवासियों-पिछड़ों का आरक्षण खत्म किया जा रहा है. एक तरफ सवर्णों को आरक्षण दिया जा रहा है और दूसरी ओर दलितों-आदिवासियों-पिछड़ों का आरक्षण खत्म किया जा रहा है.

13प्वाइंट रोस्टर के जरिए उच्च शिक्षा में द्रोणाचार्यों का दबदबा बढ़ेगा.

अमित यादव और सार्थक भरत ने कहा कि केन्द्र सरकार अविलंब विश्वविद्यालयों में शिक्षक नियुक्ति में अध्यादेश लाकर 13 प्वाइंट रोस्टर रद्द करते हुए 200 प्वाइंट रोस्टर को लागू करे. विभाग के बजाय विश्वविद्यालय को यूनिट बनाए.

विभूति और रवि कुशवाहा ने कहा कि सवर्ण आरक्षण दलितों-आदिवासियों-पिछड़ों के आरक्षण पर हमला है.केन्द्र सरकार सवर्ण आरक्षण व संविधान संशोधन को अविलंब रद्द करे.

राजेश रौशन और अभिषेक आनंद ने कहा कि लोकतंत्र को मजबूत बनाने के लिए सत्ता-शासन की संस्थाओं में दलितों-आदिवासियों-पिछड़ों की संख्यानुपात में भागीदारी की गारंटी के लिए आरक्षण की सीमा 50प्रतिशत से बढ़ाकर 69 प्रतिशत करने की गारंटी होनी चाहिए.

सोनम राव और रंजन कुमार ने न्यायपालिका व निजी क्षेत्र में आरक्षण लागू करने के साथ 1990 से बैकलॉग भरने की गारंटी के साथ तमाम सरकारी रिक्तियों को भरने की मांग की.

मार्च में प्रमुख तौर पर शामिल थे- अंशदेव, सुंदन, अमन, उत्तम, रघुनंदन, अखिलेश रमण, नसीब रविदास, प्रीतम, पवन, दिनेश, विनय, रवि, साजन, विपिन, विजय, लक्ष्मण, गोलू, सन्नी, मिंटु, पंकज, संजीव, रूपेश विश्वास, भाष्कर, दीपक प्रभाकर, प्रमोद राम सहित.

छात्रों की एकजुटता में सामाजिक न्याय आंदोलन, बिहार के कोर कमिटी सदस्य रिंकु यादव और पीस सेंटर-परिधि के राहुल राजीव भी प्रतिरोध मार्च में शामिल थे.

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