डिस्टोनिया स्टॉर्म : एक दुर्लभ बीमारी का इलाज

डिस्टोनिया स्टॉर्म बीमारी जो बहुत दुर्लभ और जटिल है। इस बीमारी से पीडि़त मरीजों में शरीर के अंगों का पोश्चर बहुत ही विचित्र होता है। ...

डिस्टोनिया स्टॉर्म : एक दुर्लभ बीमारी का इलाज

What is a dystonic storm?

नई दिल्ली, 03 नवंबर। (सम्प्रेषण) न्यूरोसर्जरी तंत्रिका तंत्र, विशेष रूप से मस्तिष्क और रीढ़ की हड्डी पर की जाती है। इधर मस्तिष्क व तंत्रिका तंत्र से जुड़ी एक दुर्लभ बीमारी डिस्टोनिया होती है। यह आसानी से समझ आने वाली बीमारी नहीं है।

Who treats Dystonia

डायस्टनिया का निदान करने के लिए, आपका डॉक्टर चिकित्सा इतिहास और शारीरिक परीक्षा से शुरू होगा। यह निर्धारित करने के लिए कि क्या अंतर्निहित स्थितियां आपके लक्षण पैदा कर रही हैं, आपका डॉक्टर रक्त या मूत्र परीक्षण की सिफारिश कर सकता है।

Definitions of dystonia

डिस्टोनिया स्टॉर्म बीमारी जो बहुत दुर्लभ और जटिल है। इस बीमारी से पीडि़त मरीजों में शरीर के अंगों का पोश्चर बहुत ही विचित्र होता है। उन्हें अत्यधिक दर्द होता है और उनका पूरा शरीर मुड़ा हुआ महसूस करता है। शुरूआती अवस्थाओं में इसका इलाज नहीं कराने पर समय के बाद ऐसी विकृतियां विकसित हो जाती हैं और रोगी की स्थिति दिनोंदिन खराब होती जाती है और शरीर में चौबीसों घंटे मुवमेंट होता रहता है।

एग्रिम इंस्टीट्यूट फॉर न्यूरोसाइंसेंज, आर्टेमिस हॉस्पीटल, गुरुग्राम के डायरेक्टर, न्यूरो सर्जरी डॉ. आदित्य गुप्ता बताते हैं कि नरेंद्र खन्ना डिस्टोनियास्टोर्म नामक एक दुर्लभ बीमारी से पीड़ित थे, उनको पिछले 15 महीनों से सरवाइकल डिस्टोनिया से पीडि़त और उनके शरीर की गतिविधियां अनियंत्रित हो चुकी थीं। उसे गंभीर स्थिति में अस्पताल में भर्ती कराया गया था।

डॉ. गुप्ता बताते हैं

‘‘उन्हें आईसीयू में डिस्टोनिया नामक बहुत ही गंभीर स्थिति में भर्ती कराया गया था। यह बीमारी बहुत ही दुर्लभ है और संभावित रूप से एक घातक मूवमेंट डिसआर्डर है। कई विशेषज्ञों और अस्पतालों में दिखाने के बाद, उन्हें एम्स के डॉक्टरों ने हमारे पास भेजा था। रोगी के शरीर के गतिविधियां पूरी तरह से अनियंत्रित हो गई थी और इसलिए उनके शरीर की गतिविधियों को नियंत्रित करने के लिए सीडेशन की बहुत अधिक खुराक पर रखा गया था। यही नहीं, सीडेशन की अधिक खुराक की भरपाई करने और उनके शरीर की गतिविधियों को पूरी तरह से रोकने के लिए एक ब्रीदिंग ट्यूब लगाई गई थी। यहां तक कि उन्हें 5 दिनों तक मैकेनिकल वेंटिलेटर पर रखने के बाद भी, दवाएं पूरी तरह से शारीरिक गतिविधियों को नियंत्रित करने में सक्षम नहीं थीं और इसलिए टीम ने अगला उपचार करने का फैसला किया।’’

डॉ. आदित्य गुप्ता बताते हैं कि जब मरीज को इमरजेंसी में भर्ती कराया गया था, तो देखा गया कि रोगी ने मूत्राशय पर अपना नियंत्रण खो दिया था, उसे मूत्र संक्रमण और निमोनिया हो गया था जिसे सर्जरी से पहले कम किया जाना था। आईसीयू में दी गई दवाओं और इंजेक्शन से वह लगभग बेहोशी की अवस्था में थे। उसकी हालत स्थिर हो जाने के बाद, उससे कैनुला हटाया गया और सर्जरी के लिए तैयार किया गया।

डीप ब्रेन स्टिमुलेशन सर्जरी

Deep Brain Stimulation Surgery

डाक्टरों की टीम ने डीप ब्रेन स्टिमुलेशन सर्जरी करने का फैसला किया जो मस्तिष्क के लिए पेसमेकर की तरह है। उसके मस्तिष्क में तारों के सेट को डालने के लिए उसके मस्तिष्क की सर्जरी Cerebral surgery की गई। इस तार को त्वचा के नीचे कॉलरबोन में स्थापित पेसमेकर सेट से जोड़ा गया है।

डॉ. आदित्य गुप्ता कहते हैं कि डिस्टोनिया की ऐसी गंभीर स्थिति में डीबीएस के साथ तेजी से प्रतिक्रिया करते देखना टीम के लिए बेहद आश्चर्यजनक और विस्मयकारी था। उसकी शारीरिक गतिविधि कम होना शुरू हो गई और वह तुरंत आईसीयू से बाहर निकलने में सक्षम हो गया।

What is Primary Generalized Dystonia

मरीज की पत्नी संगीता का कहना है कि उन्हें बहुत ही दुर्लभ बीमारी थी जिसे प्राइमरी जेनरलाइज्ड डिस्टोनिया Primary Generalized Dystonia कहा जाता है। वह पिछले 2-3 सालों से इस बीमारी से पीडि़त थे। उन्होंने कई अस्पतालों, न्यूरोलॉजिस्ट और मूवमेंट डिसआर्डर स्पेशियलिस्ट से दिखाया लेकिन डिस्टोनिया मूवमेंट को नियंत्रित नहीं किया जा सका। उनके अनियंत्रित मूवमेंट को घर पर पूरी तरह से नियंत्रित करना मुश्किल हो गया था और हम लगभग उम्मीद खो चुके थे। लेकिन सर्जरी के बाद, मेरे पति अच्छी तरह से ठीक हो गए हैं और अब हमेशा की तरह सामान्य हैं। मैं डॉक्टरों की टीम की वास्तव में आभारी हूं।’’

DBS surgery in india

डीबीएस सर्जरी की जानकारी देते हुए डॉ. आदित्य गुप्ता बताते हैं डीबीएस ऐसी सर्जरी है जो डिस्टोनिया रोगियों के लिए नियमित रूप से की जाती है। लेकिन स्टेटस डास्टोनिकस वाले कई रोगी की सीधे डीबीएस नहीं की जाती है।

डॉ. आदित्य गुप्ता बताते हैं यह देखना बेहद आश्चर्यजनक और विस्मयकारी था कि सर्जरी के बाद अगले ही दिन खन्ना नींद के किसी भी इंजेक्शन या सीडेटिव के बिना ही सामान्य रूप से लेटे रहे। 2-3 दिनों के भीतर ऐसे रोगी में डीबीएस की इतनी अच्छी प्रतिक्रिया देखना बहुत ही सुखदायी और खुशी भरा क्षण था।

डॉ. आदित्य गुप्ता बताते हैं डायस्टनिया रोगियों में आम तौर पर 3-6 महीने में ऐसी प्रतिक्रिया की उम्मीद होती है।

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नोट - यह समाचार किसी भी हालत में चिकित्सकीय परामर्श नहीं है। यह समाचारों में उपलब्ध सामग्री के अध्ययन के आधार पर जागरूकता के उद्देश्य से तैयार की गई रिपोर्ट मात्र है। आप इस समाचार के आधार पर कोई निर्णय कतई नहीं ले सकते। स्वयं डॉक्टर न बनें किसी योग्य चिकित्सक से सलाह लें।)

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