समलैंगिकता पर जोर देकर देश की समस्याओं से हटाया जा रहा ध्यान - जस्टिस मार्कंडेय काटजू

समलैंगिक अधिकार स्थापित करना ही देश की बड़ी समस्या नहीं है, बल्कि भारी गरीबी, बेरोजगारी, किसानों का संकट, कुपोषण, स्वास्थ्य सुविधाओं के अभाव और अच्छा शिक्षा जैसी चुनौतियों का हल ढूंढना बड़ी समस्या है।...

समलैंगिकता पर जोर देकर देश की समस्याओं से हटाया जा रहा ध्यान - जस्टिस मार्कंडेय काटजू

नई दिल्ली, 06 सितंबर। सर्वोच्च न्यायालय के पूर्व न्यायाधीश व प्रेस काउंसिल ऑफ इंडिया के पूर्व चेयरमैन जस्टिस मार्कंडेय काटजू ने कहा है कि समलैंगिकता पर जोर देकर देश की समस्याओं से ध्यान हटाया जा रहा है।

जस्टिस मार्कंडेज काटजू इस बात से सहमत हैं कि समलैंगिक संबंधों को अपराध नहीं माना जाना चाहिए। मगर उन्होंने फैसले को लेकर सवाल भी खडे़ किए हैं।

जस्टिस काटजू ने फेसबुक पर अपने आधिकारिक पेज पर पोस्ट लिखी है, जिसमें उन्होंने कहा है कि सर्वोच्च न्यायालय ने देश में समलैंगिक संबंधों को वैध बना दिया है। इस प्रकार समलैंगिकता के समर्थकों में खुशी का माहौल है। मैं सहमत हूं कि समलैंगिंकता  को अपराध नहीं माना जाना चाहिए। मेरा मानना है कि समलैंगिकों के अधिकारों पर यह अतिसंवेदनशील फैसला है।

उन्होंने लिखा कि समलैंगिक अधिकार स्थापित करना ही देश की बड़ी समस्या नहीं है, बल्कि भारी गरीबी, बेरोजगारी, किसानों का संकट, कुपोषण, स्वास्थ्य सुविधाओं के अभाव और अच्छा शिक्षा जैसी चुनौतियों का हल ढूंढना बड़ी समस्या है।

जस्टिस काटजू ने लिखा कि समलैंगिक अधिकारों पर अधिक जोर देना एक प्रकार से देश की प्रमुख समस्याओं से ध्यान भटकाने की रणनीति है।

उन्होंने लिखा कि खुशी और उत्साह के इस पल में एक लुप्तप्राय और इस खुशनुमा माहौल में खलल डालने वाली का आवाज उठाने के लिए मुझे खेद है, लेकिन मुझे लगता है कि लोगों को भावनाओं से दूर ले जाने के लिए उनके चेहरे पर कुछ ठंडा पानी फेंकने के लिए मजबूर होना पड़ता है।

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