इतिहास का एक नया मोड़ साबित होगा कल का भारत बंद!

यह राजनीतिक गोलबंदी महज चुनावी गोलबंदी नहीं...

इतिहास का एक नया मोड़ साबित होगा कल का भारत बंद!

यह राजनीतिक गोलबंदी महज चुनावी गोलबंदी नहीं

-अरुण माहेश्वरी

कल का भारत बंद इतिहास का एक नया मोड़ साबित होगा !

कल दिल्ली के रामलीला मैदान के मंच पर कांग्रेस सहित विपक्ष की अनेक पार्टियों के नेताओं की उपस्थिति में राहुल गांधी ने कहा कि ‘हम सबकी विचारधारा एक है’।

वामपंथी दलों ने दिल्ली के जंतर मंतर पर अलग धरना प्रदर्शन किया था। रामलीला मैदान के बाद कांग्रेस के कई नेता जंतर-मंतर पर वामपंथियों के प्रदर्शन में जाकर बैठे।

यह सब एक बहुत बड़े राजनीतिक घटनाचक्र का संकेत है।

यह सही है कि राहुल गांधी ने यह भी कहा कि हम सब मिल कर मोदी को हरायेंगे। लेकिन यह राजनीतिक गोलबंदी महज चुनावी गोलबंदी नहीं है। इसमें भावी भारत के नये, जनोन्मुखी, विमर्शकारी जनतांत्रिक पथ के संकेत मिल रहे हैं।

चुनावों के बाद विपक्ष की ओर से प्रधानमंत्री पद का उम्मीदवार कौन होगा ?

चुनावों के बाद कौन नेता होगा ? विपक्ष की ओर से प्रधानमंत्री पद का उम्मीदवार कौन होगा ? इस प्रकार के ढपोरशंखी प्रश्नों को पूरी तरह से निरर्थक मान इन्हें दरकिनार करके चलने की नीति को अपना कर कांग्रेस दल ने जिस राजनीतिक परिपक्वता का परिचय दिया है, वह सारी दुनिया के सामने सांप्रदायिक और दक्षिणपंथी फासीवाद को धूलिसात करने में भारत के एक और ऐतिहासिक योगदान की भूमिका अदा करेगा।

भारत की आजादी ने दुनिया से उपनिवेशवाद के अंत का रास्ता खोला था। सांप्रदायिक फासीवाद के खिलाफ भारत की जनता की यह लड़ाई दुनिया के कोने-कोने में सर उठा रही दक्षिणपंथी फासीवादी ताकतों के अंत का रास्ता दिखायेगी।

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