भारत का अतीत बहुत काला है, भगवा झंडा मुल्क को बांटने की कोशिश कर रहा है

​​​​​​​आरएसएस ने आजादी की लड़ाई में हिस्सा लेने के बजाय अंग्रेजों की मदद की। सुभाष चन्द्र बोस के आजाद हिंद फौज के खिलाफ आरएसएस हिंदुओं को अंग्रेजी फौज में भर्त्ती करा रहा था।...

डॉ. मुकेश कुमार

दुमका (झारखण्ड) । साम्प्रदायिकता और जल, जंगल, जमीन की लूट के खिलाफ लोकतंत्र व जल-जंगल -जमीन बचाने के सवाल पर महाजुटान सम्पन्न हुआ। महाजुटान का आयोजन झारखण्ड मुक्ति वाहिनी, इंसाफ इंडिया, अम्बेडकर स्टूडेंट्स यूनियन एवं अम्बेडकर विचार मंच के तत्वावधान में उक्त महाजुटान का आयोजन दुमका के जोहार भवन में सम्पन्न हुआ।

महाजुटान को संबोधित करते हुए छत्तीसगढ़ के चर्चित मानवाधिकार कार्यकर्त्ता हिमांशु कुमार ने कहा कि भारत का अतीत बहुत काला है। हिन्दू गौरव की पुनर्स्थापना के लिए प्रयत्नशील आरएसएस-बीजेपी के लोग अतीत का झूठा गौरवगान करते हैं। आरएसएस ने आजादी की लड़ाई में हिस्सा लेने के बजाय अंग्रेजों की मदद की। सुभाष चन्द्र बोस के आजाद हिंद फौज के खिलाफ आरएसएस हिंदुओं को अंग्रेजी फौज में भर्त्ती करा रहा था। आरएसएस ने आजादी के ठीक बाद गांधी की हत्या की थी। उन्होंने कहा कि देश को समानता की दिशा में जाने से रोकने के लिए नफरत फैलाने की राजनीति शुरू की है। आज आरएसएस ने अपने स्कूलों के जरिये नई पीढ़ी के दिमाग में जहर भर दिया है।

आगे उन्होंने कहा कि भारत की जड़ अन्याय की नींव पर टिकी हुई है। यहां काम करने वाला नीच और काम नहीं करने वाला उच्च माना गया है। भारत के नौजवानों का ध्यान भारत के अन्याय से भटकाने के लिए पाकिस्तान की तरफ केंद्रित कर दिया गया है। देश के सामाजिक, आर्थिक, राजनीतिक अन्याय से युवाओं का ध्यान चालाकी से हटाकर पाकिस्तान की तरफ मोड़ दिया गया है।

उन्होंने कहा कि आज विकास का मतलब हो गया है कि गरीब से ले लो और अमीरों को दे दो। गरीबों की जमीन उद्योगपतियों के हवाले किया जा रहा है। जब जमीन का मालिक गरीब जब अपनी जमीन देने से इनकार करता है तो उसे लाठी-गोली और जेल मिलती है।

हिमांशु कुमार ने बताया कि आज सबसे ज्यादा पारा मिलिट्री फोर्स छत्तीसगढ़, झारखंड, उड़ीसा और पश्चिम बंगाल में तैनात कर दिया गया है। यह आदिवासियों की रक्षा के लिए न होकर उनकी जमीन पर कब्जे के लिए तैनाती हुई है। यह एक किस्म का गृह युद्ध है। सत्ता ने आज आदिवासियों के खिलाफ युद्ध छेड़ रखा है। इसी से ध्यान भटकाने हेतु गाय, गौमाता और देशभक्ति का राग अलापा जा रहा है। देश में जितने कत्लखाने हैं, जिनमें गायें कटती हैं, वे सभी बीजेपी नेताओं के ही हैं। उन्होंने कहा कि छत्तीसगढ़ में सुरक्षा बल आदिवासी महिलाओं के साथ बलात्कार कर रहे हैं। रेडक्रॉस सोसाइटी को छत्तीसगढ़ के जेलों में जाने की इजाजत तक नहीं है। निर्दोष आदिवासियों को मारने और जेलों में डालने वाले पुलिस अफसरों को सरकार इनाम दे रही है। जबकि न्याय की भावना से काम करने वाले सुकमा के दलित जज को डिसमिस कर दिया गया है। उन्होंने छत्तीसगढ़ की सुप्रसिद्ध आदिवासी कार्यकर्त्ता सोनी सौरी के साथ हुए बर्बर व शर्मनाक दमन का जिक्र करते हुए कहा कि इस हरकत को अंजाम देने वाले एसपी को राष्ट्रपति पुरस्कार दिया जाता है और पिछले सात वर्ष में सुप्रीम कोर्ट तक इस शर्मनाक मामले पर कोई कार्रवाई नहीं कर पाता है।

उन्होंने कहा कि सत्ता ने आज आदिवासियों के सुरक्षा व सम्मान के साथ जीने के तमाम रास्ते बंद कर दिए हैं। आज आदिवासियों के साथ न तो कोई सरकार खड़ी है और न ही न्यायालय और मीडिया ही खड़ी है। आदिवासियों का भविष्य उनके अपने ही हाथ में है। पूरे देश में आदिवासी आज बंटे हुए हैं। इन्हें आज अपने भविष्य के लिए एकसाथ आना होगा।

महाजुटान को संबोधित करते हुए जेएनयू छात्र संघ के अध्यक्ष मोहित कुमार पांडेय ने कहा कि भगवा झंडा मुल्क को बांटने की कोशिश कर रहा है। झारखंड में आज हरे झंडे को रिप्लेस कर जगह-जगह भगवा झंडा लहराया जा रहा है। बीजेपी-आरएसएस साम्प्रदायिक आधार पर नफरत फैलाते हुए जनता के अहम सवालों पर पर्दा डालने की कोशिश कर रही है। भीड़ को व्यवस्थित ढंग से हिंसक बनाया जा रहा है। प्रधानमंत्री मोदी इन सवालों पर अफसोस जाहिर कर अपनी जिम्मेदारी से भाग रहे हैं।

महाजुटान को संबोधित करते हुए बिहार के नवादा से आये नौशाद जुबेर मालिक ने कहा कि झारखण्ड बनने का फायदा यहां के आम आदमी को नहीं मिल पाया। आज झारखण्ड के खनिज संपदा पर कॉरपोरेट घरानों की नजर है। ये कॉरपोरेट घराने राजनीतिक पार्टियों को मोटी रकम चंदे के रूप में देती हैं और बदले में ये पार्टियां कॉरपोरेटों की सेवा करती हैं। आगे उन्होंने कहा कि जनता के बुनियादी प्रश्नों से भागते हुए सत्ता संरक्षित आतंकवाद आज चरम पर है। समाज में साम्प्रदायिकता का जहर घोला जा रहा है। देश में सड़कों पर फैसला करने की प्रवृत्ति को बढ़ावा दिया जा रहा है। इसने न्यायालय, पुलिस के औचित्य पर सवालिया निशान लगा दिया है।

रांची के विस्थापन विरोधी जनविकास आंदोलन के राज्य समन्वयक दामोदर तुरी ने कहा कि सत्ता एक साजिश के तहत जल, जंगल और जमीन केके लिए संघर्ष करने वालों को माओवादी करार दिया जा रहा है। साम्प्रदायिक नफरत फैलाकर अल्पसंख्यकों पर हमले किये जा रहे हैं। झारखण्ड की खनिज संपदा को लूटने का षड़यंत्र रचा गया है। मोमेंटम झारखण्ड उसी षड़यंत्र का हिस्सा है। पूंजीपतियों को खनिज संसाधनों और जमीन को सौंपा जा रहा है। इसके खिलाफ एकजुट होकर खड़ा होना होगा।

जेएनयू के छात्र सादत हुसैन ने कहा कि देश के लोकतंत्र पर ब्राह्मणवादी शक्तियों का कब्जा है। आदिवासी, दलित व अल्पसंख्यकों की जगह जेलों में बना दी गई है। आज जनसंख्या अनुपात से ज्यादा फीसदी की संख्या में दलित, आदिवासी, अल्पसंख्यकों को जेलों में डाल दिया गया है। न्यायालयों से भी इन्हें इंसाफ नहीं मिल पा रहा है। जल, जंगल, जमीन को बचाने की लड़ाई लड़ने वालों को विकास विरोधी ठहराकर उनकी आवाज को दबाया जा रहा है। पूरे देश में आदिवासी, दलित व अल्पसंख्यक पर हमला कर उन्हें खौफ़जदा करने की कोशिश चल रही है। यह डर पैदा करने का षड़यंत्र है, हमें इस डर पैदा करने के षड़यंत्र के खिलाफ अपने हक-अधिकार के लिए एकजुट होकर निर्भीक होकर खड़ा होना होगा।

सभा का संचालन जेएनयू के छात्र नेता बीरेंद्र कुमार ने और आभार ज्ञापन अनुराग ने किया। अध्यक्षता प्रो. सुरुन सोरेन ने किया।

महाजुटान को सुरेंद्र मोहली, मुन्ना बड़ाइक, रंजीत कुमार, डॉ. मुकेश कुमार, टी प्रवीण, श्यामदेव, मनमीत, मोहन मुर्मू, विक्रम कुमार, रामचन्द्र मांझी, मुकर्रम अंसारी सहित अन्य ने संबोधित किया। उक्त अवसर पर झारखण्ड के विभिन्न जिलों से सैकड़ों लोग उपस्थित हुए।

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