देश में चल रहा विकास मॉडल कॉरपोरेट्स व मुठ्ठी भर लोगों के विकास का हिंसक मॉडल है - हिमांशु कुमार

समाज के बहुसंख्यक अवाम के हिस्से भूख-बेरोजगारी-फटेहाली-विस्थापन व अधिकारों से बेदखली आ रही है। अम्बानी-अडानी की संपत्ति दिन-दूनी, रात-चौगुनी बढ़ रही है।...

डॉ. मुकेश कुमार

भागलपुर, 12 जुलाई। चर्चित मानवाधिकार कार्यकर्त्ता एवं गांधीवादी विचारक हिमांशु कुमार ने कहा है कि देश में चल रहा विकास मॉडल कॉरपोरेट्स व मुठ्ठी भर लोगों के विकास का मॉडल है। यह हिंसक मॉडल है।

उक्त बातें हिमांशु कुमार ने भागलपुर में न्याय मंच द्वारा आयोजित 'संविधान और लोकतंत्र पर बढ़ते हमले' विषयक परिचर्चा को संबोधित करते हुए कहीं।

उन्होंने कहा कि समाज के बहुसंख्यक अवाम के हिस्से भूख-बेरोजगारी-फटेहाली-विस्थापन व अधिकारों से बेदखली आ रही है। अम्बानी-अडानी की संपत्ति दिन-दूनी, रात-चौगुनी बढ़ रही है।

गांधीवादी विचारक ने कहा कि वर्तमान विकास मॉडल संगीनों के साये में आगे बढ़ रहा है। छत्तीसगढ़ से झारखण्ड तक आदिवासियों-किसानों को जंगल व जमीन से बलात बेदखल किया जा रहा है। कॉरपोरेट्स के लिए जंगल व जमीन लूटने के लिए सरकारें संविधान-लोकतंत्र व मानवाधिकारियों की धज्जियां उड़ा रही हैं। सरकार ने अपनी ही जनता के ख़िलाफ़ युद्ध छेड़ दिया है। पूरे देश में आपातकाल जैसी स्थिति है। सत्ता विरोध के तमाम स्वर को खामोश कर रही है। विपक्षी पार्टियां विपक्ष की भूमिका अदा करने में नाकाम हैं।

छत्तीसगढ़ में लंबे समय तक आदिवासियों के बीच काम कर चुके हिमांशु कुमार ने कहा कि छत्तीसगढ़ सहित खनिज संसाधनों से परिपूर्ण राज्यों में बड़े पैमाने पर सुरक्षा बलों को उतार दिया गया है।

छत्तीसगढ़ पर चर्चा करते हुए उन्होंने कहा कि वहां अर्द्ध सैनिक बलों व पुलिस सैकड़ों गांवों से आदिवासियों को खदेड़ चुकी है। हत्या-बलात्कार का बर्बर इतिहास अर्धसैनिक बल व पुलिस रच रही है। छत्तीसगढ़ की जेलें आदिवासियों से भर दी गई हैं। पत्रकारों व सामाजिक कार्यकर्ताओं पर भी हमले लगातार जारी हैं। उन्होंने कहा कि नरेंद्र मोदी के केंद्र की सरकार में आने के बाद तो देश अघोषित आपातकाल के दौर से गुजर रहा है। राष्ट्रवाद, गौरक्षा, विकास, माओवाद जैसे शब्दों के बहाने लोकतांत्रिक आवाज का गला घोंटा जा रहा है।

उन्होंने कहा कि कांग्रेसी हुकूमत भी संविधान व लोकतंत्र की हत्या के मामले में पीछे नहीं थी।

मोदी सरकार की नीतियों पर बोलते हुए उन्होंने कहा कि मोदी सरकार ने प्रति वर्ष दो करोड़ युवाओं को रोजगार देने का वादा किया था किंतु पिछले तीन वर्षों में दो लाख से भी कम लोगों को रोजगार मिल पाया। इस बीच लाखों लोगों को रोजगार से हाथ अवश्य धोना पड़ गया है। इन बुनियादी प्रश्नों से ध्यान भटकाने के लिए गाय, गोबर और देशभक्ति जैसे मामलों में उलझाया जा रहा है।

उन्होंने लोकतांत्रिक शक्तियों एवं आम-आवाम से एकजुट होकर संविधान व लोकतंत्र की रक्षा के लिए खड़ा होने की जरूरत बतायी।

इस मौके पर डॉ. चंद्रेश, डॉ. योगेंद्र, रामशरण, रिंकु, डॉ. मुकेश कुमार, गौतम कुमार प्रीतम, रामानंद पासवान, उदय, सौरभ कुमार, रंजीत कुमार, सोनम राव, संतोष कुमार झा, संजीव कुमार, राजीव कुमार, शांति रमण, रूपेश, ब्रजेश, महेश यादव, अर्जुन शर्मा, सार्थक भरत, महमूद, जयंत जलद, अक्षय कुमार, प्रभाकर कुमार, विभूति भूषण सिन्हा, मनोहर मंडल, शुभम, प्रियरंजन, संजय कुमार सहित दर्जनों लोग मौजूद थे।

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