चीन ने अपनी दूसरी स्वच्छ वायु कार्ययोजना लागू की, भारत में राष्ट्रीय स्वच्छ वायु कार्ययोजना लागू करने का ही हो रहा इंतजार

चीन में 2013 में पांच साल के लिये पहला स्वच्छ वायु कार्ययोजना को लागू किया गया था। इस योजना के लागू होने के बाद 74 महत्वपूर्ण शहरों के पीएम 2.5 स्तर में 33% तक की कमी आई।...

चीन ने अपनी दूसरी स्वच्छ वायु कार्ययोजना लागू की, भारत में राष्ट्रीय स्वच्छ वायु कार्ययोजना लागू करने का ही हो रहा इंतजार

 

नई दिल्ली। 6 जूलाई 2018। जहां एक तरफ चीन ने वायु प्रदूषण से अपनी लड़ाई को तेज करते हुए अपना दूसरा स्वच्छ वायु कार्ययोजना की घोषणा की वहीं दूसरी तरफ भारत अभी तक पहले राष्ट्रीय स्वच्छ वायु कार्ययोजना को ही लागू करने का इंतजार कर रहा है। चीन ने 2013 में ही अपना पहला स्वच्छ हवा कार्ययोजना लागू कर दिया था।

उत्सर्जन लक्ष्य

17 अप्रैल को पर्यावरण मंत्रालय द्वारा जनता के फीडबैक के लिये जारी राष्ट्रीय स्वच्छ वायु कार्यक्रम के ड्राफ्ट में भी उत्सर्जन के लक्ष्य और समय-सीमा को स्पष्ट रूप से शामिल नहीं किया गया था। इसमें सबसे बड़े प्रदूषको जैसे थर्मल पावर प्लांट और उद्योग से निकलने वाले उत्सर्जन पर कोई बात ही नहीं की गयी थी। थर्मल पावर प्लांट से निकलने वाला उत्सर्जन वायु प्रदूषण की बड़ी वजहों में से एक है। इन उत्सर्जन की वजह से भारत में प्राथमिक और माध्यमिक कण पदार्थों के स्तर में काफी वृद्धि हो रही है।

दिसंबर 2015 में पर्यावरण मंत्रालय ने थर्मल पावर प्लांट को दो सालों के भीतर उत्सर्जन मानको को पूरा करने की अधिसूचना जारी की थी, जो अभी तक लागू नहीं हो पाया है। जबकि वर्तमान में 300 से अधिक थर्मल पावर प्लांट यूनिट उत्सर्जन मानकों का पालन नहीं कर रहे हैं।

ग्रीनपीस और दूसरे कई नागरिक संगठनों, किसानों और पर्यावरण समूहों के नेटवर्क क्लीन एयर कलेक्टिव ने राष्ट्रीय स्वच्छ वायु कार्यक्रम (एनसीएपी) के ड्राफ्ट पर अपने सुझाव पर्यावरण मंत्रालय को दिया था।

ग्रीनपीस इंडिया के सीनियर कैंपेनर सुनील दहिया कहते हैं,

“पर्यावरण मंत्रालय द्वारा जारी एनसीएपी के ड्राफ्ट में उत्सर्जन कम करने के लिये स्पष्ट समय सीमा और लक्ष्य नहीं निर्धारित किया गया था। हमें उम्मीद है कि पर्यावरण मंत्रालय हमारे द्वारा दिये गए सुझावों को एनसीएपी में शामिल करेगी और इस कार्यक्रम को व्यापक और तय समय-सीमा के भीतर सभी प्रदूषक कारको से निपटने वाली योजना बनायेगी।”

सुनील आगे जोड़ते हैं, “हालांकि चीन को अभी भी वायु प्रदूषण से निपटने के लिये बहुत लंबा सफर तय करना है। फिर भी धीरे-धीरे वे लोग इस राह पर आगे बढ़ रहे हैं। वहां पिछले वर्षों में स्थानीय, समय सीमा के भीतर विभिन्न प्रदूषको से निपटने की योजना और प्रशासन की जवाबदेही तय करके, कठोर उत्सर्जन मानकों को लागू करके तथा स्वच्छ ऊर्जा की तरफ बढ़कर इस समस्या से निपटने की सकारात्मक कोशिश की जा रही है। भारत सरकार को भी इन कार्य-योजनाओं से सीख लेते हुए बिना किसी देरी के राष्ट्रीय स्वच्छ वायु कार्ययोजना को लागू करना चाहिए।”

पहली कार्ययोजना के बाद चीन में पीएम 2.5 में आयी गिरावट

चीन में 2013 में पांच साल के लिये पहला स्वच्छ वायु कार्ययोजना को लागू किया गया था। इस योजना के लागू होने के बाद 74 महत्वपूर्ण शहरों के पीएम 2.5 स्तर में 33% तक की कमी आई। कठोर उत्सर्जन मानको को लागू करने और नये थर्मल पावर प्लांट को अनुमति नहीं देने जैसे कदमों की वजह से बहुत बड़ा प्रभाव पड़ा है।

चीन के नये स्वच्छ वायु कार्ययोजना में कई नये क्षेत्रों को केन्द्र में रखा गया है जिसमें संरचनात्मक संक्रमण, कोयला उद्योग और परिवहन जैसे प्रदूषक कारको से निपटना शामिल है।

इस नये कार्ययोजना में उन शहरों को भी शामिल किया गया है जिन्हें 2013 में केन्द्र में नहीं रखा जा सका था या जहां पिछले पांच साल में सबसे खराब वायु गुणवत्ता रही है। हालांकि, 2015 से 2020 के बीच पीएम 2.5 के स्तर को 18% कम करने के लक्ष्य का उन शहरों पर कम ही प्रभाव पड़ेगा जहां 2015 से 2017 के बीच वायु गुणवत्ता में सुधार हुआ है। इन चिन्हित शहरों के लिये विशेष और महत्वाकांक्षी योजना बनाने की जरुरत है।

पूरी दुनिया में स्वास्थ्य के लिये एक गंभीर खतरा बनता जा रहा है वायु प्रदूषण

सुनील आगे बताते हैं, “भारत, चीन और दुनिया भर में, हमें लगातार वायु प्रदूषण के निदान को लेकर प्रभावी तरीके से काम करने की जरुरत है। इसमें तय समय सीमा का लक्ष्य बनाकर, कठोर उत्सर्जन मानकों को तय करके और प्रदूषित स्रोतो से शिफ्ट करने वाली योजना बनाने की जरुरत है। वायु प्रदूषण पूरी दुनिया में स्वास्थ्य के लिये एक गंभीर खतरा बनता जा रहा है और जिससे निपटने की तत्काल जरुरत है।”

हस्तक्षेप से जुड़े अन्य अपडेट लगातार हासिल करने के लिए हमें
facebook फेसबुक पर फॉलो करे.
और
facebook ट्विटर पर फॉलो करे.
"हस्तक्षेप"पाठकों-मित्रों के सहयोग से संचालित होता है। छोटी सी राशि से हस्तक्षेप के संचालन में योगदान दें।