बेटी बचाओ, बेटी पढ़ाओ, लाडली योजना, सेल्फी वीथ बेटी का ढिंढोरा तब भी महिला अपमानित और असुरक्षित

झारखंड की लड़कियां ट्रैफिकिंग की ज्यादा शिकार हो रही हैं। और इसमें भी बड़ी संख्या नाबालिग बच्चियों की होती है।...

अतिथि लेखक

महिला हिंसा के खिलाफ एकदिवसीय राज्यस्तरीय सम्मेलन

विशद कुमार

रांची: 17 मार्च 2018 को महिला गरिमा अभियान की ओर से महिला हिंसा के खिलाफ एकदिवसीय राज्यस्तरीय सम्मेलन एचआरडीसी, रांची में आयोजित किया गया। सम्मेलन में बतौर मुख्य अतिथि श्री संतोष आनंद, सिविल जज, सीनियर डिवीजन कम डिपुटी सेक्रेटरी, झालसा, विशिष्ट अतिथि डा. रोज केरकेट्टा, वरिष्ठ समाजसेवी प्रभावती तिवारी, दीपिका कुमारी, रांची महिला थाना प्रभारी एवं डा. शरद कुमारी,एक्शन एड, पटना उपस्थित थे।

कार्यक्रम में विषय प्रवेश एवं कार्यक्रम के संबंध में श्रावणी ने कहा- 14 फरवरी से पूरे राज्य के 8 जिले में16 संगठनों के द्वारा उमड़ते सौ करोड़ अभियान के तहत महिला हिंसा के खिलाफ कार्यक्रम किए गए। झारखंड में महिलाओं पर होने वाले हिंसा के बढ़ते ग्राफ को लेकर चिंता जताते हुए उन्होंने कहा कि सरकार एवं कानून के द्वारा महिलाओं को सुरक्षा एवं सम्मान देने की तमाम घोषणाओं के बाद भी महिलाएं अपने आपको असुरक्षित और अपमानित ही पा रही हैं। इस वर्ष उमड़ते सौ करोड़ की थीम अन्याय के खिलाफ एकजुटता है। आजका कार्यक्रम भी उठो, विरोध करो, एकजुट हो के साथ महिला हिंसा की रोकथाम और कानूनी प्रावधान पर केंद्रित है।

विभिन्न जिलों में आयोजित कार्यक्रम के दौरान 8 केस का चयन किया गया जिसकी प्रस्तुति रेशमा ने की। इन केसों में महिला हिंसा के तमाम प्रकार सम्मिलित किये गये। इन्हीं केसों पर मुख्य अतिथि संतोष आनंद ने उनके। निवारण, प्रावधान और प्रक्रिया की जानकारी दी। साथ ही उन्होंने संबंधित संस्था, आयोग, महिला थाना एवं महिला मुद्दे पर काम करने वाले संगठन, संस्थाओं को जागरूकता पर विशेष ध्यान देना चाहिए।

विशिष्ट अतिथि प्रभावती तिवारी ने कहा कि महिलाओं पर हिंसा का बढ़ना, देश के लिए शर्म की बात है। एक तरफ बेटी बचाओ, बेटी पढ़ाओ, लाडली योजना, सेल्फी वीथ बेटी का ढिंढोरा पीटा जाता है और कानून भी बहुत है तब भी महिला अपमानित और असुरक्षित है। इसलिए आज के समय में महिलाओं को स्वयं कानूनों की जानकारी लेकर उनको लागू करने के लिए सामूहिक दबाव बनाना होगा।

रांची महिला थाना प्रभारी दीपिका प्रसाद ने कहा कि हर जिले में एक ही महिला थाना का होना काफी नहीं है। एफआईआर बहुत होते हैं लेकिन हमारी कोशिश होती है कि काउंसलिंग के माध्यम से समाधान किया जाय इसमें हम 90 प्रतिशत सफल हैं। उन्होंने आह्वान किया कि हम महिलाओं को एकदूसरे को सम्मान करना होगा। साइबर क्राइम के बारे में आगाह करते हुए उन्होंने कहा कि सोशल मीडिया में युवतियों के फोटोग्राफस के तेजी से गलत इस्तेमाल हो रहे हैं अतः अपने निजी फोटो डालने से बचे। उन्होंने रांची महिला थाना हेल्प लाइन नम्बर साझा किया।

डा. रोज केरकेट्टा ने कहा कि महिला हिंसा से बचने के लिए हमें अपने कानूनी जानकारी का दायरा बढ़ाना होगा और डायन जैसे मामलों की गहन तहकीकात करनी होगी क्योंकि यह सिर्फ महिलाओं के प्रताड़ित करने का बहाना नहीं होता है उसके पीछे सम्पत्ति का मामले के साथ और कई बातें जुड़ी होती हैं। शराबबंदी जैसे मामलों में सामूहिक प्रयास करने होंगे।

शरद कुमारी ने कहा कि  झारखंड की लड़कियां ट्रैफिकिंग की ज्यादा शिकार हो रही हैं। और इसमें भी बड़ी संख्या नाबालिग बच्चियों की होती है। महिला संगठनों के द्वारा हमेशा पंचायत को जवाबदेह बनाने की बात कही जाती रही है जिसे हमेशा नजरंदाज कर दिया जाता है। पंचायत को यदि महिलाओं और नाबालिग बच्चियों के बाहर जाने की सूचना या जानकारी रहेगी तो निगरानी आसानी से की जा सकेगी और उन्हें मुसीबतों से बचाया जा सकेगा।

कार्यक्रम की शुरूआत में कोर्दूला कुजूर ने स्वागत गीत गाया। अतिथियों का स्वागत शम्पा दास ने किया। आशा संस्था के बच्चों ने डायन हिंसा पर नुक्कड़ नाटक की प्रस्तुति दी। संचालन रोजालिया तिर्की और धन्यवाद ज्ञापन आलोका कुजूर ने किया।

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