लालकिला डालमिया घराने को सौंपने के विरोध में सोशलिस्ट पार्टी का धरना

​​​​​​​फैसला वापस हो नहीं तो सरकार को परास्त किया जाए - डॉ. प्रेम सिंह...

फैसला वापस हो नहीं तो सरकार को परास्त किया जाए - डॉ. प्रेम सिंह

 नई दिल्ली, 04 मई। केंद्र सरकार द्वारा 'अडॉप्ट ए हेरिटेज' योजना के तहत दिल्ली के ऐतिहासिक लालकिला को डालमिया भारत बिज़नेस समूह को सौंपने के फैसले के खिलाफ सोशलिस्ट पार्टी के कार्यकर्ताओं ने दिल्ली में राजघाट पर शाम 5 बजे से 8 बजे तक धरना दिया. धरने की अगुआई पार्टी की राष्ट्रीय उपाध्यक्ष रेणु गंभीर ने की. उन्होंने कहा सोशलिस्ट पार्टी राष्ट्रीय धरोहरों का प्रबंधन व्यापारिक घरानों को देने का मोदी सरकार का फैसला भारत की राष्ट्रीय पहचान को मिटाने का प्रयास है. लालकिला को प्राइवेट हाथों में सौंपना राष्ट्रीय सुरक्षा के नज़रिए से भी बहुत संवेदनशील मामला है. इस मौके पर सोशलिस्ट पार्टी के अध्यक्ष डॉ. प्रेम सिंह ने कहा कि सरकार ने करीब 100 ऐतिहासिक इमारतों को प्राइवेट हाथों में सौंपने का फैसला किया है. शुरुआत लालकिले से करके सरकार ने अपने आज़ादी के राष्ट्रीय आंदोलन विरोधी चरित्र का खुद ही सबूत दे दिया है. लालकिला 1857 के पहले स्वतंत्रता संग्राम का केंद्र रहा है. 10 मई को मेरठ में क्रांति की शुरुआत करके सिपाही 11 मई को दिल्ली यानि लालकिला पहुंचे थे और बादशाह बहादुरशाह ज़फर से स्वंतंत्रता आंदोलन का नेतृत्व करने का आग्रह किया था. आज़ाद हिन्द फौज के सेनानियों पर लालकिला में ही मुकद्दमा चलाया गया था, जिसकी पैरवी जवाहरलाल नेहरू ने की थी. 15 अगस्त 1947 में आज़ादी मिलने पर हर साल भारत के प्रधानमंत्री लालकिला की प्राचीर से राष्ट्र-ध्वज फहरा कर राष्ट्र को संबोधित करते हैं. सोशलिस्ट पार्टी भारत के समस्त नागरिक समाज, खासकर नौजवानों, राजनीतिक पार्टियों तथा सामाजिक संगठनों से अपील करती है कि वे सरकार को यह फैसला वापस लेने के लिए बाध्य करें. अगर सरकार यह राष्ट्र-विरोधी फैसला वापस नहीं लेती है तो अगले आम चुनाव में उसे परास्त करके सत्ता से हटाया जाये.

 दिल्ली प्रदेश के कार्यकारी अध्यक्ष सैयद तहसीन अहमद ने कहा कि सरकार का यह फैसला बताता है कि आरएसएस/भाजपा का राष्ट्रवाद किस कदर खोखला है. जो सरकार राष्ट्रीय स्मारकों का कुशलता से इंतज़ाम नहीं कर सकती उसे सत्ता में रहने का अधिकार नहीं है. पूर्व विधायक वरिष्ठ समाजवादी नेता डॉ. सुनीलम ने कहा कि राष्ट्रीय संसाधनों को तो सरकार करापोरेट घरानों और बहुराष्ट्रीय कंपनियों को बेच ही रही थी, अब उसने राष्ट्रीय धरोहरों को भी प्राइवेट हाथों में देने का फैसला कर लिया है. इसके खिलाफ संघर्ष होगा और सरकार को फैसला वापस लेना होगा. वरिष्ठ समाजवादी नेता श्याम गंभीर ने कहा कि उन्हें सरकार के इस फैसले पर ज़रा भी आश्चर्य नहीं हुआ है. आरएसएस/भाजपा का देश के साथ गद्दारी का पुराना इतिहास है. उसने आज़ादी के आंदोलन में गद्दारी की थी और अब राष्ट्रीय धरोहरों को बेच कर गद्दारी कर रहे हैं.

 खुदाई खिदमतगार के राष्ट्रीय अध्यक्ष फैज़ल खान ने कहा कि धरोहर बचने का संघर्ष समाज के बीच ले जाना होगा. उन्होंने बताया कि सोशलिस्ट पार्टी और खुदाई खिदमतगार 1857 के शहीदों की याद में 10-11 मई 2018 को मेरठ से लालकिला तक 'राष्ट्रीय धरोहर बचाओ मार्च' निकालेंगे. 11 मई को शाम 5 बजे खुनी दरवाज़े से लालकिला तक मशाल जलूस निकला जाएगा. सोशलिस्ट पार्टी (चंद्रशेखर) की युवा इकाई के अध्यक्ष सादत अनवर ने कहा कि पूरे देश में सरकार के फैसले के विरोध में जनमत बनाने का काम सभी साथियों को करना चाहिए.    

  धरने में सोशलिस्ट युवजन सभा के राष्ट्रीय अध्यक्ष नीरज कुमार, दिल्ली प्रदेश के अध्यक्ष रामनरेश, एसवाईएस सदस्य विशाल जोशी, प्रदीप शाह, खुदाई खिदमतगार के सक्रिय सदस्य कृपाल सिंह मंडलोई, समाजवादी साथी पुरुषोत्तम, तुलसी शर्मा, कृष्ण कुमार भदौरिया, एडवोकेट शौकत मलिक समेत कई सामाजिक-राजनीतिक कार्यकर्ताओं ने हिस्सा लिया.

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