सावधान ! 'रिवेंज पॉर्न' पर अब होगी कड़ी सज़ा

रिवेंज पॉर्न विडियो' पोस्ट करने जैसे साइबर अपराधों के मामलों के देखते हुए केंद्र सरकार कानून में बदलाव करने पर विचार कर रही है, जिसके तहत अपराधियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई को सुनिश्चित किया जा सके।...

देशबन्धु
हाइलाइट्स

Now, strict action in 'revenge porn' crimes

अक्सर आपने सुना होगा कि किसी लड़के ने अपनी पूर्व प्रेमिका से बदला लेने के लिए अपनी निजी तस्वीरें या कोई वीडियो सोशल मीडिया पर डाल दिया हो या फिर किसी ने अपने पार्टनर का कत्ल करवा दिया हो। इंटरनेट की दुनिया में बदला लेने की इस प्रवृत्ति को रिवेंज पोर्न कहा जाता है। जिसकी घटनाएं लगातार बढ़ती जा रही हैं। खासतौर पर सोशल मीडिया से ऐसी खबरें ज्यादा आती हैं। ऐसे में रिवेंज पॉर्न विडियो' पोस्ट करने जैसे साइबर अपराधों के मामलों के देखते हुए केंद्र सरकार कानून में बदलाव करने पर विचार कर रही है, जिसके तहत अपराधियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई को सुनिश्चित किया जा सके।

सूत्रों के मुताबिक महिला और बाल विकास मंत्री मेनका गांधी ऑनलाइन सेक्शुअल अब्यूज को लेकर खास गंभीर हैं क्योंकि इसका पीड़ित पर बहुत बुरा असर पड़ता है। पीड़ित को बदनामी मिलती है और यहां तक कि अपराधी के खिलाफ केस दर्ज कराने में भी उसे मुश्किलों से लड़ना पड़ता है।

मंत्रालय के अधिकारियों का कहना है कि रिवेंज पॉर्न से निपटने के लिए अलग से कानून की जरूरत नहीं है, बस आईपीसी और आईटी ऐक्ट के मौजूदा प्रावधानों को ही सख्ती से लागू किया जाए तो पर्याप्त होगा।

दरअसल मंत्रालय में यह राय है कि साइबर क्राइम जैसे मामलों से निपटने को लेकर मौजूदा कानूनों में कुछ कमियां हैं। 12 मई को अंतर मंत्रालयी समिति में विचार-विमर्श के बाद ऑनलाइन चाइल्ड सेक्सुअल एब्यूज पर लगाम लगाने के लिए अंतरिम नियम बनाए गए। इस आदेश के तहत इंटरनेट सर्विस प्रवाइडर्स को 31 जुलाई तक इंटरनेट वॉच फाउंडेशन पर उपलब्ध सूचनाओं के मुताबिक काम करना होगा। यह फाउंडेशन चाइल्ड सेक्शुअल अब्यूज से जुड़े यूआरएल और वेबसाइटों की ग्लोबल लिस्ट जारी करता है। इंटरनेट वॉच फाउंडेशन के जरिए सेक्सुअल कन्टेंट को ब्लॉक करने या उन्हें हटाने में मदद मिलेगी। फिलहाल यह अंतरिम व्यवस्था है।

अंतरमंत्रालयी समिति ऑनलाइन चाइल्ड सेक्सुअल एब्यूज से जुड़ी सामग्रियों की निगरानी के लिए एक सेंट्रलाइज्ड मकैनिजम पर काम कर रही है।

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