आरक्षण ख़त्म करने का प्रयास करने वाली भाजपा सरकार बताए कि दलित और पिछड़े ही अपराधी और समाज के लिए ख़तरा हैं

बलिया में चरम पर दलित उत्पीड़न : कहीं 'मैं गाय चोर हूँ' की तख्ती पहना कर घुमाया जाता है कहीं दलित महिला को जिंदा जलाया जाता है...

आरक्षण ख़त्म करने का प्रयास करने वाली भाजपा सरकार बताए कि दलित और पिछड़े ही अपराधी और समाज के लिए ख़तरा हैं

बलिया में चरम पर दलित उत्पीड़न : कहीं 'मैं गाय चोर हूँ' की तख्ती पहना कर घुमाया जाता है कहीं दलित महिला को जिंदा जलाया जाता है

सिकंदरपुर और रतसर में हुई सांप्रदायिक घटनाओं की पुनरावृत्ति की कोशिश

शांतिप्रिय जनता सांप्रदायिक घटनाओं के खिलाफ लामबंद

रिहाई मंच द्वारा निकाली जा रही यूपी यात्रा अपने प्रथम चरण के अंतिम दौर में बलिया के नगरा, बेल्थरा, सिकंदरपुर में पहुँची, जहां यात्रा में चल रहे सामाजिक कार्यकर्ताओं ने सम्मेलन किया और बलिया में प्रेस वार्ता की।

प्रेस वार्ता को सम्बोधित करते हुए वक्ताओं ने कहा कि बलिया में दलित उत्पीड़न चरम पर है। रसड़ा में हालात इतने बदतर हैं कि रसड़ा में दो दलित युवकों को मारते पीटते "मैं गाय चोर हूँ" की तख्ती बाँध कर सरेआम घुमाया जाता है तो वहीं जजौली कला में रेशमी देवी को सामंत जिंदा जला देते हैं। साम्प्रदायिकता की आग से बलिया कभी सिकंदरपुर तो कभी रात्सर में जल जाता है, जहां खुलेआम भाजपा विधायक संजय यादव मुस्लिम समुदाय की दुकानों को लुटवाते हैं और जलवाते हैं। हत्या बलात्कार जैसे गंभीर अपराधों में भी गिरफ़्तारी तो दूर एफआईआर बहुत मुश्किल से हो पाती है।

वक्ताओं ने कहा कि मौजूदा सरकार अपने मनुवादी एजेंडे से साम्प्रदायिक जातिगत हिंसा कराकर जनता के मूल-भूत सवालों से ध्यान भटका रही है। जबकि बलिया समेत पूरे सूबे में आम जनता का जीवन दिन-ब-दिन दूभर होता जा रहा है। बलिया हो या मऊ, आजमगढ़ किसी भी जग़ह आज़ादी के 70 साल बाद भी एक विश्वविद्यालय तक नहीं बन पाया है।

यूपी यात्रा के संबंध में वक्ताओं ने पत्रकारों को बताया कि यह यात्रा उत्तर प्रदेश के उन क्षेत्रों में दौरा कर रही है, जहाँ दलित, पिछड़ा, मुस्लिम, महिला और किसानों, नवजवानों के हक़ हुक़ूक़ पर सरकारों द्वारा हमला किया जा रहा है।

वक्ताओं ने कहा कि आज उत्तर प्रदेश में 2300 से अधिक एनकाउंटर, 5600 से अधिक गिरफ्तारियां, 750 घायल हुए हैं, 62 लोग मारे गए हैं। जिनमें सबसे ज्यादा संख्या मुस्लिमों, दलितों और पिछड़ों की है। खुलेआम मुख्यमंत्री ठोक देने की बात करते हैं और भाजपा के नेता और पुलिस पैसे लेकर मुड़भेड़ के नाम पर हत्याएं कर रहीं है। सरकार बताए कि आख़िर एक साल से अधिक समय से भीम आर्मी के नेता चंद्रशेखर को क्यूँ जेल में कैद कर रखा है। पूरे प्रदेश में दलितों और मुसलमानों को रासुका के तहत निरुद्ध किया जा रहा है।

यह यात्रा इस संदेश के साथ वंचित समाज के बीच में जा रही है कि अपनों को दलितों और पिछड़ों को हिमायती कहने वाली भाजपा बताए कि उसके सरकार में क्या इसी समाज के लोग अपराधी और समाज के लिए ख़तरा हैं। सरकार अपने मनुवादी एजेंडे के तहत लगातार आरक्षण को ख़त्म करने के प्रयास में है। लगातार सर्वाजिनिक क्षेत्रों को कमज़ोर और निजी क्षेत्रों को मज़बूत किया जा रहा है कि जिसका फल है कि अडानी, अम्बानी की जेबें भर रहीं है तो वहीं मोदी, माल्या विदेश भाग जाते हैं।

यूपी यात्रा में पूर्व आई जी एस आर दारापुरी, सामाजिक कार्यकर्ता जुलेखा जबीं, यूपी यात्रा संयोजक राजीव यादव और गुफरान सिद्दीक़ी, मज़हर आज़ाद, शकील कुरैशी, सैयद फ़ारूक़, रविश आलम, शाहरुख़ अहमद, बलवंत यादव, राघवेन्द्र राम शामिल रहे।

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