काकोरी एक्शन की स्मृति में "आजादी की डगर पर पांव" यात्रा 7 अगस्त को काशी आएगी

बनारस उत्तर भारत का सबसे बड़ा और मजबूत क्रांतिकारी केन्द्र था, जिससे अंग्रेजी सरकार चाहकर भी यहां से एक भी मुखबिर नही निकाल सकी। जिससे शेष क्रांतिकारी हमेशा आजाद रहकर आजादी की लौ को और तेज करते रहे...

काकोरी एक्शन की स्मृति में "आजादी की डगर पर पांव" यात्रा 7 अगस्त को काशी आएगी

यात्रा का पोस्टर जारी

वाराणसी। स्वतंत्रता आन्दोलन के एक महत्वपूर्ण घटनाक्रम "काकोरी एक्शन" की 92 वीं जयंती पर कुछ उत्साही युवाओं द्वारा निकाली जा रही यात्रा "आजादी की डगर पर पाँव" 1 अगस्त को बरहज में अमर शहीद राम प्रसाद बिस्मिल की मजार से चलकर चौरी चौरा, गोरखपुर, उन्नाव, कानपूर, काकोरी, इलाहाबाद आदि ऐतिहासिक महत्व के स्थानों से होते हुए आगामी 7 अगस्त को काशी पहुंचेगी. यहाँ पहुंचने पर भारत माता मंदिर परिसर में काशी विद्यापीठ, काशी हिन्दू विश्वविद्यालय के छात्र एवं साझा संस्कृति मंच से जुड़े सामाजिक कार्यकर्ताओं द्वारा स्वागत किया जाएगा तथा कार्यक्रम आयोजित किये जायेंगे.

इस यात्रा के संयोजन समिति के सदस्य शाह आलम ने बताया कि बनारस उत्तर भारत का सबसे बड़ा और मजबूत क्रांतिकारी केन्द्र था, जिससे अंग्रेजी सरकार चाहकर भी यहां से एक भी मुखबिर नही निकाल सकी। जिससे शेष क्रांतिकारी हमेशा आजाद रहकर आजादी की लौ को और तेज करते रहे। दो बार कालापानी की सजा पाने वाले शचीन्द्रनाथ सान्याल, काकोरी ट्रेन के नायक शचीन्द्र नाथ बख्शी, बीएचयू के एम ए के छात्र राजेन्द्रनाथ लाहिड़ी और सतीश सिंह, काशी विद्यापीठ के छात्र मुरारी लाल शर्मा, बनारस के प्रसिद्द तैराक केशव चन्द्र चक्रवर्ती जिन्हे बाद में कलकत्ता के एक बम केस में सजा मिली। कुंदनलाल, मन्मथनाथ गुप्त, रामकृष्ण खत्री और चन्द्रशेखर आजाद आदि चोटी के क्रांतिकारियों का बनारस ठिकाना रहा है। यही पर आजाद पहली और आखिरी बार जेल गये थे। साधु रामकृष्ण खत्री को पार्टी में लाये थे। क्रांतिवीरों के संस्मरणो से यह बात साफ हो जाती है कि इन सबके इलावा दोनो ही विश्वविद्यालयों के छात्रों का दल पार्टी के कई एक्शनों में शामिल रहा। इस लिए हम यात्रा अगस्त क्रांति दिवस के पूर्व काशी में पहुंच रहे हैं.

यात्रा का पोस्टर जारी करते हुए साझा संस्कृति मंच के डा. आनद प्रकाश तिवारी ने कहा कि चन्द्रशेखर आजाद को पहली और अंतिम बार जेल की सजा यही काशी में हुयी थी और उनकी शहादत के बाद उनका अस्थि कलश कई दशक तक खोजवां मुहल्ले में वैद्य शिव विनायक मिश्र जी के यहाँ रखा था जिसे 1976 में तत्कालीन सरकार में मंत्री रहे शहीद भगत सिंह के भाई सरदार कुलतार सिंह जी ने प्राप्त कर लखनऊ संग्रहालय में रखवाया.

शुक्रवार को स्व.शिव विनायक मिश्रा जी के खोजवां स्थित आवास से ही "आजादी की डगर पर पांव" यात्रा का पोस्टर जारी किया गया. इस अवसर पर वल्लभाचार्य पाण्डेय, धनञ्जय, कपीन्द्र तिवारी, सतीश कुमार और संतोष मिश्र उपस्थित रहे.

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