“ना जान देंगे, ना जमीन देंगे” – गडचिरोली के आदिवासी क्षेत्र की जनता ने किया खनन के खिलाफ भूमकाल का एलान

एटापल्ली: कल से लोग एटापल्ली में जमा, ठण्ड में गुजारी रात, हजारो की तादात में लोग पहुचे एस.डी.ओ. के कार्यालय, भारी संख्या में पुलिस बल तैनात....

अतिथि लेखक

आज 11 दिसंबर 2017को महाराष्ट्र विधान सभा के शीतकालीन नागपुर सत्र के पहले दिन गडचिरोली जिला के विभिन्न क्षेत्रो में लोगो ने संगठित होकर प्रस्तावित खनन परियोजनायों का, वर्त्तमान सरकार के जनविरोधी नीतियों का जोरदार विरोध किया. एवं पेसा, वन अधिकार कानून के प्रभावी अमल, ग्रामसभायों के सार्वभौमता, आदिवासी एवं अन्य समुदायों के अधिकारों की सुरक्षितता, प्रशासनिक गतिरोध और दमन को बंद किया जाये आदि महत्वपूर्ण मांगो को लेकर जोरदार प्रदर्शन कर सत्ताधारी एवं विरोधी पक्षों को स्थानीय जनता के मुख्य सवालों के तरफ ध्यान देने का किया आवाहन. साथ ही विधान सभा के विरोधी पार्टियों से आवाहन किया कि वे गडचिरोली के आदिवासी क्षेत्र के सवालों मुख्यतः जनविरोधी खनन और विस्थापन के सवाल को लेकर विधान सभा में सवाल उठाये और सरकार को घेरे.

उत्तर गडचिरोली के कोरची तहसील में वन अधिकार कानून के प्रभावी अमल की मुख्य मांग के साथ स्थानिको द्वारा रास्ता रोको आन्दोलन किया गया,वही दक्षिण गडचिरोली के एटापल्ली में सुरजागड़ के खनन के मुख्य मुद्दे के पर एटापल्ली एवं भामरागड तहसील के ग्रामीण अपने पारंपरिक वाद्य-नृत्य के साथ अपने सवालों को लेकर उप-विभागीय अधिकारी के कार्यालय का किया घेराव. 

एटापल्ली: कल से लोग एटापल्ली में जमा, ठण्ड में गुजारी रात, हजारो की तादात में लोग पहुचे एस.डी.ओ. के कार्यालय, भारी संख्या में पुलिस बल तैनात.

रोजगार और विकास के नाम पर सुरजागड़ इलाके के देव, पवित्र डोंगर-पहाड़ और वनों को नष्ट करने वाले, आदिम संस्कृति को ख़त्म करने के प्रयासों, और स्थानीय लोगो को विस्थापित करने पे तुले हुए सभी खदानों को गैर कानूनन घोषित कर उन्हें तुरंत बंद किया जाये, किए गए सभी एम्.ओ.यु. रद्द किये जाये, खनन का विरोध कर रहे स्थानिको पर किये जा रहे पुलिसिया दमन को तुरंत रोका जाये, पेसा एवं वन अधिकार कानूनों का प्रभावी अमल हो और अन्य मांगो को लेकर एटापल्ली और भामरागड तहसील के विभिन्न क्षेत्रो से हजारो की तादाद में लोग पहुचे एटापल्ली.

अलग-अलग गावो से लोगो ने कल ही उप-विभागीय अधिकारी के मुख्यालय एटापल्ली के तरफ अपना रास्ता शुरू किया. कल रात ही लोग अपने सवालों को लेकर एटापल्ली पोहचे. लोगो ने कड़ी ठण्ड में पूरी रात एटापल्ली के सामूहिक गोटुल के पास गुजारी. आज सुबह से अपने पारंपरिक ढोल-नृत्य के साथ लोगो ने एटापल्ली उप-विभागीय अधिकारी के कार्यालय का रास्ता पकड़ा.

अपने सांस्कृतिक गीतों के बीच “हम अपना पहाड़ नहीं देंगे..”, “सुरजागड़ हमारा है..”  के नारों के बीच जनता ने बड़ी रैली निकाली. लोगों ने उप-विभागीय अधिकारी के कार्यालय को घेरे हुए अपनी सभा शुरू की. प्रशासन ने भारी संख्या में पुलिस बल तैनात किया था. देर शाम तक प्रशासन के साथ वार्ता चली, स्थानीय जनता ने ये इशारा दिया कि अगर सरकार जल्द ही सुरजागड़ में चल रही खदान बंद नहीं करती है और अन्य अन्य खदानों को मंजूरी देने की प्रक्रिया को ऐसे ही आगे चलती रहती है तो पूरे क्षेत्र में जोरदार आन्दोलन शुरू किया जायेगा. स्थानीय जनता ने यह भी चेतावनी दी की आज सिर्फ दो दिनों से ग्रामीण एटापल्ली में जमा हुए थे, पर आगे यह आन्दोलन निरन्तर चलाया जायेगा. 

जनसभा में जानकारी देते हुए सुरजागड़ पारंपरिक इलाखा गोटुल समिति के प्रतिनिधि एवं जिला परिषद् सदस्य सैनु गोटा ने कहा की, एटापल्ली के सुरजागड इलाखे में सुरजागड, बांडे, दमकोंडवाही, मोहंदी, गुडजुर क्षेत्र के साथ-साथ अन्य ११ जगह खदाने प्रस्तावित की गयी है. वर्त्तमान में सुरजागड में लॉयड्स मेटल्स एंड इंजीनियर्स इस कंपनी को लोह खदान का आवंटन किया गया है. और अभी सरकार ग्रामसभा का विरोध होते हुए भी सुरजागड़ के क्षत्र में ‘गोपानी” कंपनी को नए खनन पत्ते का आवंटन की प्रक्रिया चला रही है, जिसको हाल ही में FAC के आगे चर्चा के लिए रखा गया था. इन्ह सभी खनन क्षेत्रो को प्रस्तावित करते वक्त या मंजूरी देते हुए वन संवर्धन कानून १९८०, पर्यावरण अधिनियम १९८६, पेसा कानून १९९६, महाराष्ट्र ग्रामपंचायत अधिनियम १९५९ के प्रकरण ३ अ के कलम ५४, अनुसूचित जमती एवं अन्य पारंपरिक वन निवासी (वन हक्क मान्यता) अधिनियम २००६, खान एवं खनन अधिनियम और अन्य कानूनन प्रावधानों का उल्लंघन खुद प्रशासन और सरकार द्वारा किया जा रहा है. जो इन खदानों को गैरकानूनी बना देती है.

उपस्थित समुदायों को संबोधित करते हुए भामरागड पट्टी पारंपरिक समिति के प्रतिनिधि एवं जिला परिषद् सदस्य एड. लालसू नागोटी ने कहा कि सुरजगड़ और अन्य जगहों पर जहा ये खदानें प्रस्तावित हैं या जहां मंजूरी दी गयी है उन्ह जगहों पर हमारे ठाकुरदेव, तल्लोरमुत्ते, माराई सेडो, बंडापेन इन्ह देवतायो के पवित्र पहाड़ और जंगल हैं, जो कि यहां के स्थानीय आदिवासी एवं अन्य समुदायों की मुख्य सांस्कृतिक एवं धार्मिक विरासते हैं. इन्ह सभी प्रस्तावित खदानों से लगभग १५,९४६ एकड़ और लगभग ४० हजार एकड़ जंगल-जमीन खदान पूरक कामों के लिए नष्ट किया जायेगा. इससे सिर्फ सुरजागड़ क्षेत्र ही नहीं बल्कि एटापल्ली, भामरागड और अन्य तहसील के ग्रामसभाओं के लोगो का वनों पर आधारित शाश्वत रोजगार प्रभावित और ख़तम हो जायेगा. इन्ही कारणों से प्रस्तावित एवं आवंटित खदानों का हम एटापल्ली एवं भामरागड तहसील की ग्रामसभाए पुरजोर विरोध करते है.

सुरजागड़ क्षेत्र के साथ अन्य क्षेत्र से आये उपस्थित जनसमुदाय प्रतिनिधियों ने आरोप लगाया की, विकास और रोजगार के जुमलो द्वारा लोगो की सहानभूति पाकर राजनैतिक व्यक्ति एवं प्रशासन के अधिकारी सिर्फ दलाली कमाने हेतू पूंजीपतियों को गडचिरोली के बहुमूल्य संसाधन बेच रहे हैं. जनता ने ये मांग रखी कि अगर सरकार को स्थानीय युवाओं को अगर सच में रोजगार मुहैया कराना है तो गडचिरोली जिला में रिक्त सभी पदों को भरकर रोजगार के अवसर खोले जाये. और लघु वन उपजो पर आधारित शास्वत रोजगार के साधन निर्मित किये जाये.     

उपस्थित प्रतिनिधियो ने सरकार को इशारा दिया कि, आदिवासी जनता के पूजा स्थानों-पवित्र पहाड़ो और शाश्वत रोजगार को बचाने हेतु खनन विरोधी ग्रामसभा प्रस्तावों की तरफ ध्यान देकर तुरंत सभी खदानों के आवंटन रद्द किये जायें. अगर सरकार ऐसा नहीं करती है तो अपने जंगल को, वनों से मिलने वाले रोजगार को, हमारी संस्कृति-हमारे देव और पूजा स्थल बचाने के लिए ऐतिहासिक आन्दोलन खड़ा किया जायेगा.

उपस्थित समुदाय ने सुरजागड़ क्षेत्र में बढ़ाते सैनिकीकरण की जोरदार निंदा की. स्थानिको ने आरोप लगाया कि, सुरजागड़ एवं अन्य क्षेत्रों में निवास कर रहे आदिवासियों पर जो खनन का विरोध कर रहे हैं, उन पर पुलिस द्वारा दमन रुकने का नाम ही नहीं ले रहा है. कानूनों का दुरुपयोग कर पुलिस अलग-अलग तरीके से लोगों को प्रताड़ित करने का काम कर रही है. ग्रामसभाओं के अधिकारों को लेकर काम कर रहे लोगो पर मारपीट और दमन लादा जा रहा है. जिसके चलते आम जनता हताश और निराश जिन्दगी जीने को मजबूर हो गयी है. इन्हें सभी हालात से जनता के बीच असंतोष बढ़ता जा रहा है.  

आदिवासी एवं अन्य समुदायों की सांस्कृतिक, धार्मिक, सामाजिक प्रथा, परंपरा, बोलीभाषा, देवी-देवता, जल-जंगल-जमीन,संसाधन और वन आधारित शास्वत रोजगार और विकास के निर्मण के लिए गडचिरोली जिला की सभी खदाने रद्द कर दी जाये, इस प्रमुख मांग के साथ साथ - आदिवासी क्षेत्र की संस्कृती-परंपरा रक्षण, -पेसा-वन अधिकार कानून का ओर प्रभावी अमल, -जनता के लोकतांत्रित आन्दोलन पर पुलिसि दमन का विरोध. और अन्य मुद्दों को लेकर सभा में भूमिकाये रखी गयी और विस्थापन के खिलाफ आन्दोलन को और भी मजबूत बनाने का आवाहन किया गया. 

उप-विभागीय अधिकारी के साथ उपस्थित समुदाय ने अपने मुद्दे रखे. विभिन्न मुद्दों पर महाराष्ट्र के राज्यपाल एवं जिला अधिकारी के नाम ज्ञापन दिया गया.   

लोगों के भारी विरोध में भी शुरू की गयी ‘सुरजागड खदान’ में खनन प्रक्रिया को तुरंत बंद किया जाय, लोगो के सहमति बिना ‘लॉयड्स मेटल्स एंड इंजीनियर्स’ इस कंपनी से किये गए एम.ओ.यू. तत्कात रद्द किए जाय. 

दमकोंडवाही, बांडे, गुड़जुर, आगरी-मसेली खदानों और अन्य सभी प्रस्तावित खदाने और उसके जुड़े एम.ओ.यू. तत्कात रद्द किए जाय. और आगे स्थानीय लोगों की सहमति के बिना कोई भी नए एम.ओ.यू. हस्ताक्षर नहीं किया जाय.

गडचिरोली जिला में सविधान की 5वीं अनुसूची और पेसा कानून को सक्ती से लागू किया जाय. और ग्रामसभायों के सर्वभौम्य अधिकारों को मान्य किया जाये.

सामूहिक वन अधिकार प्रक्रिया को अछेसे अमल किया जाये, प्रलंबित सामूहिक एवं वयक्तिक दावो को तुरंत मंजूर किया जाये.

आदिवासियों के मौलिक अधिकार और प्राकृतिक परिवेश को सुरक्षा दी जाय. ‘माडिया गोंड’ इस आदिम जमती समूहों को वन अधिकार कानून में निहित ३.१.e के तहद ‘Habitate Rights’ (आवासीय एवं क्षेत्रित वन अधिकार) की प्रक्रिया को पूरा कर अधिकारों को मान्यता दी जाये.

पेसा, वन अधिकार कानून के अमल, ग्रामसभा के सक्षमीकरण के लिए काम कर रहे और जनविरोधी खनन के खिलाप लोकतांत्रिक संघर्ष कर रहे स्थानिको पर किये जा रहे पुलिसी दमन को तुरंत रोका जाये. गैरकानुनी गिरफ़्तारी और फर्जी केसेस की निष्पक्ष जाँच की जाये. बेगुनाहों को तुरंत रिहा किया जाये और फर्जी केसेस रद्द किये जाये. 

साथ ही शिक्षा और आरोग्य व्यवस्था सुचारू तरीके से चलायी जाये, किसानो के कर्ज को ख़त्म किया जाये, आदि मुद्दों एवं जनता के मांगो पर ज्ञापन दिया गया. 

आन्दोलन में जिला परिषद् सदस्य सैनु गोटा, जिला परिषद् सदस्य एड. लालसू नागोटी, भामरागड पं. समिति सभापति सुखराम मडावी, एटापल्ली पं. समिति सभापति बेबी लेकामी, भामरागड पं. समिति उपसभापति प्रेमिला कुड्यामी, एटापल्ली पं. समिति उपसभापति नितेश नरोटे, एटापल्ली पं. समिति सदस्य शिला गोटा, जिला परिषद् संजय चरडूके, भामरागड पं. समिति सदस्य गोई कोडापे, सुरजागड़ सरपंच कल्पना आलाम, नगरपंचायत उपाध्यक्ष रमेश गंपावर, माजी जिला परिषद् सदस्य अमोल मारकवार, नंदू मत्तामी प्रमुखतः से उपस्थित थे. एटापल्ली एवं भामरागड के विभिन्न क्षेत्रो से ग्रामीणों ने हजारो की तादात में हिस्सा लिया.

(एड. लालसू नागोटी व सैनु गोटा द्वारा जारी विज्ञप्ति) 

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