गिरिडीह, झारखंड: माओवादी विरोधी कार्यवाही के नाम पर पुलिस द्वारा आदिवासी-मजदूर की हत्या

संयुक्त टीम ने झारखंड के गिरिडीह जिले में नक्सली बताकर मारे गए मोतीलाल बास्के की मौत को पुलिस द्वारा आदिवासी-मजदूर की हत्या करार दिया है। ...

रांची। J.C.D.R, A.P.D.R., के साथ-साथ H.R.L.N. और विस्थापन विरोधी जन विकास आन्दोलन (VVJVA) की संयुक्त टीम ने झारखंड के गिरिडीह जिले में नक्सली बताकर मारे गए मोतीलाल बास्के की मौत को पुलिस द्वारा आदिवासी-मजदूर की हत्या करार दिया है। इस संबंध में जाँचदल ने एक रिपोर्ट जारी की है, जो निम्नवत् है -

अंतरिम जाँच रिपोर्ट

दिनांक 1 जून 2017 को झारखण्ड के गिरिडीह जिले के ढोलकट्टा गाव में एक गरीब आदिवासी ग्रामीण मजदूर की मुठभेड़ में हुई मौत की सत्यता की जाँज के लिए 1 और 2 जुलाई 2017 को स्थानीय जन संगठनों के आह्वान पर C.D.R.O. के अंतर्गत J.C.D.R, A.P.D.R., के साथ-साथ H.R.L.N. और विस्थापन विरोधी जन विकास आन्दोलन (VVJVA) की संयुक्त टीम ने इस इलाके का दौरा करते हुए अपने स्तर से इस घटना की प्रामाणिकता की जाँच करने हेतु मृतक की पत्नी, परिवार के अन्य सदस्यों, अन्य ग्रामीणों, स्थानिक जन प्रतिनिधियों, स्थानिक पत्रकार आदि के साथ भेंट कर जानकारी हासिल करते हुए पूरे घटना क्रम की वस्तुस्थिति का मुआयना किया.

इस घटना के सन्दर्भ में जाँच दल के समक्ष स्थानिकों ने निम्नलिखित बातों को उजागर करते हुए रखा.

  1. मृतक मोतीलाल बास्के की पत्नी पार्वती देवी के द्वारा दी गयी जानकारी के अनुसार उसका पति 2003 से चंद्रप्रभु टोंकी पर एक छोटा सा होटल चलाता था. और साथ ही साथ डोली मजदूर भी था. वह परिवार का एक मात्र जीविकोपार्जन करने वाला सदस्य था. दिनांक 1 जून 2017 को प्रतिदिन के भांति सुबह तकरीबन तीन बजे मोतीलाल लुंगी, गंजी पहन कर हाथ में कुल्हाड़ी लेकर दुकान खोलने के लिए चला गया. उस दिन पार्वती की तबियत ठीक न होने के चलते मोतीलाल के साथ नहीं गयी. उसके बाद दिन में पुलिस द्वारा यहाँ पर गोली बारी की गयी. मोतीलाल उस दिन घर नहीं लौटा. अगले दिन उसे मालूम चला कि उसके पति की मौत हो गयी है.इतना कहकर पार्वती देवी फूट-फूट कर रोने लगी.
  2. टिकू राम मुर्मू, उम्र 18 वर्ष के अनुसार पुलिसवालों ने उसे और शामलाल टुडू को बुला कर खेत के उस स्थान पर ले गए जहां पर मोतीलाल बास्के के शव को रखा गया था. पुलिस के दबाव के कारण मोतिलाल के शव को कंधे पर उठा कर कुछ दूरी पर खड़े ट्रेक्टर पर रखना पड़ा. इस दौरान मधुबन थाना प्रभारी द्वारा उसके साथ मारपीट भी किया गया. इसके बाद उन दोनों को जबरन ट्रेक्टर पर बैठा के थाना ले गया. टिकू राम ने थाना में जाकर थाना प्रभारी को मृतक मोतीलाल बास्के का पूरा विवरण - नाम, पता, काम-काज के बारे में विस्तृत जानकारी दी. उन दोनों को रात भर थाना में ही रखा गया. इस दौरान उन दोनों से लगभग 30 -35 लिखित एवं सफ़ेद कागजों पर हस्ताक्षर एवं अंगूठे का निशान लिया गया. अगला दिन सुबह ग्रामीण और स्थानीय जन प्रतिनिधि आने के बाद ही इन्ह दोनो को छोड़ा गया.
  3. सिकंदर हेम्ब्रम, प्रमुख, परिटांड प्रखंड के अनुसार मोतीलाल बास्के उस गाँव के प्रधान मंत्री आवास योजना का पहिला लाभक था. उसका कोई आपराधिक रिकॉर्ड नहीं था. वह यहाँ के स्थानीय आदिवासी धार्मिक संगठन और मजदूर संगठन समिति का सदस्य था. मोतीलाल बास्के की पुलिस द्वारा की गयी हत्या के विरुद्ध जब पीड़ित पक्ष को लेकर प्रथिमिकी दर्ज करवाने के हेतु थाना गया तो पुलिस ने पहले शिकायत लेने से इंकार कर दिया. जब उप आरक्षी अधीक्षक से मिले तो उसने शिकयत पत्र को अपने पास रख लिया, परन्तु शिकायत पत्र के छाया प्रति पर प्राप्ति हस्ताक्षर और थाना का मोहर नहीं दिया गया. जब प्राप्ति हस्ताक्षर और मोहर माँगा गया तो उप आरक्षी अधीक्षक ने कहा कि यहाँ पर किसी भी प्रकार के आवेदन अथवा शिकायत के लिए प्राप्ति नहीं दिया जाता है.
  4. निर्मल तुरी, मुखिया, मधुबन पंचायत एवं राजेश किस्कू, पत्नी श्री मति रश्मि देवी, वार्ड सदस्य, वार्ड संख्या 7 के अनुसार - मोतीलाल बास्के उन दोनों का पुराना परिचित था. वह बिलकुल निर्दोष है. यह मुठभेड़ फर्जी है और पुलिस और सी.आर.पी.एफ. (CRPF) ने मिलकर मोतीलाल की हत्या की है. राजेश किस्कू के अनुसार जब थाना में मोतीलाल के शव को देखा उस समय उसके शरीर के सामने के हिसे में कुल 11 गोली लगने के निशान थे. उसने यह भी कहा की साल 2003 में उसके चाचा छोटेलाल किस्कू को सुबह में बैठकर शौच करने के दौरान ही पुलिस ने सामने से आकर गोली चलाई थी, जिसके निशान आज भी दीखते हैं. पुलिस और सी.आर.पी.एफ. (CRPF) अभियान के नाम पर लगातार ग्रामीणों के साथ मार-पीठ और दुर्व्यवहार करती है.
  5. गाँव की है बुधनी देवी, यशो देवी, चंपा देवी, एवं मुनिया देवी के अनुसार महिलाओं के साथ पुलिस और सी.आर.पी.एफ. (CRPF) ने काफी बदतमीजी और छेड़खानी की.
  6. मोतीलाल मुर्मू के अनुसार उनके एवं अन्य कई घरों के अंदर भी पुलिस ने गोली चलाई. अनेक घर के आंगन में भी गोली चलाई गई.
  7. नाबालिग 16 वर्षीय अनीता (नाम बदला हुआ) के अनुसार पुलिस ने उसके हाथ पकड़े और पहने हुए कपड़े को खींचा. पुलिस ने कहा कि बाहर पत्थर के नीचे वर्दी छुपा कर यहाँ गमछा ओढ़ कर बैठी हो. उस पुलिस वाले ने धक्का देकर जबरन एकांत कमरे में ले जाने की कोशिश की. परंतु अनीता द्वारा जोरदार विरोध करने और चिल्लाने से पुलिसवालों ने उसे छोड़ दिया.

मोतीलाल की मौत पर थम नहीं पा रहा है जनाक्रोश

जमीन स्तर पर सामने आई सारी जानकारी और तथ्यों को इकठ्ठा कर जाँच दल निम्नलिखित निष्कर्ष पर पहुंचा-

  1. मोतीलाल बास्के का नक्सलियों के साथ कोई भी संबंध नही था. उसका नक्सली गतीविधियों से कोई लेना-देना नहीं था. उसके खिलाफ किसी भी थाना में किसी भी प्रकार का अपराधिक रेकॉर्ड नहीं है.
  2. मोतीलाल बास्के एक हॉटेल चलाता था और साथ में डोली मजदूर था. उसके पास भारत सरकार द्वारा जारी आधार कार्ड, वोटर कार्ड, BPL कार्ड था, उसके पास बैंक खाता भी था जिसके लेन देन का विवरण देखने से पता चलता है कि मोतीलाल की आर्थिक स्थिति भी अच्छा नहीं थी. इसके अलावा वह स्थानिक आदिवासी धार्मिक संगठन और मजदूर संगठन का सदस्य भी था
  3. घटना के दिन मोतीलाल बास्के उसी रस्ते से लौट रहा था जिस रस्ते से वह 2003 से लगातार प्रतिदिन आना-जाना करता था.
  4. बडे हथियारों से लगी एक या दो गोली किसी भी वक्ती को मार गिराने के लिये पर्याप्त होती है. जबकी मोतीलाल के शरीर के सामने के हिस्से में 11 गोली लगने के निशाण पाये गए, जो कि फर्जी मुठभेड़ की संभावना को व्यक्त करता है.
  5. टिकू राम मुर्मू उसी गाव का निवासी है अंतः उसी दिन यांनी 09/06/2017 को ही पुलिस थाना मे मोतीलाल के नाम , पता , कार्य का विवरण और प्रकृति आधी का पूरा ब्योरा ठाना प्रभारी के समक्ष दिया था. फिर भी पुलिस द्वारा नक्सली से मुठभेड़ के दौरण अज्ञात नक्सली को मार गिराए जाने का झूठा बयान जारी करना पुलिस एवं CRPF कि मंशा एवं पूरी कार्यवाही के उपर प्रश्नचिन्ह उपस्थित करता है. (11/06/2017 को समाचार पत्रों के माध्यम से डी.जी.पी. ने बयान दिया था कि मुठ्भेड़ में शामिल जवानों को पार्टी करने के लिये एक लाख आरक्षी अधीक्षक को दिया गया और आरक्षी अधीक्षक को जवानों को पुरस्कृत करणे के लिये 15 लाख रुपया दिये जाने की घोषणा की गई थी )
  6. प्रधान मंत्री आवास योजना के तहत घर बनाने के लिये मोतीलाल ने बैंक खाता में सरकार द्वारा 26 हजार रुपया का भुगतान किया गया था। यह प्रक्रिया सरकारी पदाधिकारियों द्वारा मोतीलाल एव उसके परिवार के संपूर्ण विवरण की जांच के पश्चात ही दिया गया था. इससे साबित होता है कि मोतीलाल साफ-सूत्र वक्ती था एवं वह किसी प्रकार से नक्सली संगठन का सदस्य नहीं था.
  7. ग्रामीणों के बयान एव घरों में लगी गोलियों के निशानों को देख कर पता चलता है कि गोलियां सिर्फ उसी तरफ से चलाई जा रही थीं जहां पर पुलिस मौजूद थी. दूसरी तरफ से कोई भी गोली नहीं चल रही थी. इसके अलावा इस स्थान पर लम्बे समय से कोई भी नक्सली घटना या गतिविधि नहीं हुई थी. इन तत्थों से यह आशंका पैदा होती है कि हकीकत में उस दिन नक्सलियों के साथ मुठभेड़ हुई भी थी या नहीं.
  8. अभियान के दौरान कोई भी महिला पुलिस अभियान में शामिल नहीं थी. पुरुष पुलिस बल द्वारा ग्रामीण आदिवासी महिलाओं के साथ बद्तमीजी, बदसलूकी,गाली-गलोच और छेड़खानी की गयी. कुछ माहिलाओं, जिसमें नाबालिक लड़की भी थी, को जबरन एकांत में ले जाने की कोशिश भी की गयी, परंतु महिलाओं के जोरदार विरोध के चलते पुलिस जवान अपने प्रयासों में सफल नहीं हो पाए.
  9. नक्सली दमन अभियान के नाम पर पहले भी निर्दोष ग्रामीणों पर पुलिस द्वारा गोली चलाई गयी. 09 जून 2017 को भी अभियान के नाम पर निर्दोष आदिवासी ग्रामीणों पर अकारण अत्याचार करते हुए पुलिस द्वारा पुरुष एव महिलाओं के साथ मार-पीट, गाली–गलोज एवं अभद्र व्यवहार किया गया.
  10. उप आरक्षी अधिकार के अनुसार यहाँ पर किसी भी प्रकार क आवेदन या शिकायत देने पर प्राप्ति हस्ताक्षर और मोहर नहीं दिया जाता है. यहाँ अपने आप न्यायोचित सरकारी कार्यप्रणाली का उल्लंघन है.
  11. इस प्रकार के अभियान से उस स्थल पर मौजूद विद्यालय में विधार्थियो का पढ़ना – पढ़ाना बाधित हुआ है. बच्चो में आज भी पुलिस और CRPF का आतंक बना हुआ है

एक आदिवासी की हत्या पर प्रशासन का जश्न और मीडिया का मोतियाबिन्द

सारे तत्थों एव घटना क्रम को देखते हुए जाँच दल निम्न मांगें करता है:

  1. मोतीलाल बास्के का तथाकथित मुठभेड़ में मारा जाना एक सुनियोजित फ़र्जी मुठभेड़ अथवा हत्या की आशंका देखते हुए इस घटना की तत्काल निष्पक्ष एवं न्यायिक जाँच स्वतंत्र एजेंसी द्वारा की जाए. जिसमे डी.जी.पी सहित झारखंड प्रशासनिक महकमे के किसी भी अधिकारी संम्मिलित न हो ताकि जाँच प्रभावित ना हो सके
  2. सारे प्रशासनिक पदाधिकारियों, जो इन ऑपरेशन के दौरान मोतीलाल के मृत्यु के विषय में झूठे बयान देकर इस घटना की लीपा-पोती करने में सम्मिलित हैं, उन पर तत्काल प्राथमिक केस दर्ज कर कानूनी कार्यवाही की जाये.
  3. सरकार द्वारा पीड़ित परिवार को अविलंब 25 लाख रुपया मुआवजा दिया जाए, और परिवार के किसी एक सदस्य को सरकारी नौकरी दी जाये.
  4. मृतक के अधूरे पड़े घर (प्रधानमंत्री आवास योजना के अंतर्गत) का निर्माण गति से पूरा दिया जाए ताकि उनके परिवार को रहने के लिए उपयुक्त जगह मिल सके.
  5. मृतक के तीन बच्चों की गुणात्मक शिक्षा की व्यवस्था की जाए.
  6. अभियान के दौरान महिलाओं के साथ की गई बदतमीजी और छेड़खानी के विरुद्ध उचित क़ानूनी कार्यवाही की जाये. महिला आयोग दोषी पुलिस के खिलाफ प्राथमिक केस दर्ज करे और नाबालिक के साथ किये गए छेड़छाड़ के खिलाफ POC 50 के अंतर्गत प्राथमिक केस दर्ज करवाने में मदद करे ताकि पीड़ित महिलायों को न्याय मिल सके.
  7. हर प्रकार का अभियान जहा पर महिलाए मौजूद हो को चलाते वक्त महिला पुलिस एव महिला पदाधिकारियों की उपस्थितियों को अनिवार्य किया जाये.
  8. सरकार के निर्देश के नुसार पुलिस एवं CRPF द्वारा नक्सली दमन अभियान के नाम पे बेकसूर आदिवासियों एवं जन साधारण पर किये जा रहे दमन, मार-पीठ, अत्याचार, प्रताड़ना एव महिलाओ के साथ छेड़खानी को तुरंत बंद किया जाये. और दोषी पर योग्य कार्यवाही की जाये.

जनता बनाम सेना : मोती लाल बास्के की मौत

जाँच दल समिति:

अशोक A.P.D.R.( for C.D.R.O.)

प्रवात सिंग रॉय A.P.D.R.( for C.D.R.O.)

उत्पल बसु, A.P.D.R.( for C.D.R.O.)

अल्का मिश्रा JCDR( C.D.R.O.).

दामोदर तुरी (विस्थापन विरोधी जन विकास आन्दोलन, V.V.J.V.A)

राजेश यादव (भाकपा माले. गिरदोह)

राजेश सिन्हा (भाकपा माले. गिरदोह)

विभद कुमार (स्वतंत्र पत्रकार)

मो. असगर (HRLN)

मनब चौधरी (J.C.D.R)

संजय, अजित रे (मजदूर संगठन समती)

 

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