सरकार करती है क्षयरोगियों की मदद, जानिए कैसे

देश में क्षयरोग (टीबी) की गंभीर समस्‍या है। जी हाँ, विश्व स्वाथ्य संगठन की एक फैक्ट शीट के मुताबिक आठ देशों में दुनिया भर के दो तिहाई टीबी मरीज हैं। ...

सरकार करती है क्षयरोगियों की मदद, जानिए कैसे

राष्ट्रीय क्षय रोग नियंत्रण कार्यक्रम

देश में क्षयरोग (टीबी) की गंभीर समस्‍या है। जी हाँ, विश्व स्वाथ्य संगठन की एक फैक्ट शीट के मुताबिक आठ देशों में दुनिया भर के दो तिहाई टीबी मरीज हैं। इनमें सबसे ज्यादा भारत में फिर चीन, इंडोनेशिया, फिलीपींस, पाकिस्तान, नाइजीरिया, बंग्लादेश और दक्षिणी अफ्रीका में हैं।

भारत में हर वर्ष करीब 22 लाख क्षयरोगी बढ़ जाते हैं। इनमें से करीब आठ लाख क्षयरोगी स्‍मीयर पॉजीटिव, अर्थात् ऐसे होते हैं जिनसे यह बीमारी दूसरों को होने का बहुत अधिक खतरा होता है। इसके एक रोगी से एक वर्ष में औसतन 10-15 लोगों को संक्रमण होता है।

हमारे देश में इस रोग से हर तीसरे मिनट में दो लोगों की और प्रतिदिन एक हजार लोगों की मौत होती है। डब्ल्यूएचओ के महानिदेशक डॉ टेड्रोस अधानोम गेबेरियस का कहना है कि दुनिया भर में क्षय रोग हर दिन पांच हजार लोगों को मारता है।

टीबी के मरीजों को सरकारी मदद से उपचार

भारत सरकार की अर्काइव पर उपलब्ध जानकारी के मुताबिक देश में वर्ष 1962 राष्ट्रीय क्षयरोग नियंत्रण कार्यक्रम (एनटीसीपी) शुरू किया गया था, लेकिन इसमें खास सफलता नहीं मिली। अत: कम से कम 85 प्रतिशत रोगियों के इलाज ओर 70 प्रतिशत रोगियों की पहचान करने के उद्देश्‍य से संशोधित राष्ट्रीय क्षयरोग नियंत्रण कार्यक्रम (आरएनटीसीपी) डॉट्स प्रणाली के साथ 26 मार्च, 1997 को शुरू किया।

संशोधित राष्ट्रीय क्षयरोग नियंत्रण कार्यक्रम - डॉट्स का उद्देश्‍य :

1. नए संक्रामक टीबी मामलों में उपचार दर 85 प्रतिशत बनाए रखना,

2. जनसंख्‍या में ऐसे मामलों की खोज दर 70 प्रतिशत हासिल करना।

3. आरएनटीसीपी चरणबद्ध रूप से लागू किया गया और 23 मार्च, 2006 तक यह पूर देश में लागू हो गया। यह कार्यक्रम विश्‍व बैंक, डीएएनआईडीए, डीएफआईडी, यूएसएआईडी, जीडीएफ और जीएफएटीएम की सहायता से देश में चरणबद्ध तरीके से क्रियान्‍वित किया जा रहा है।

भारत सरकार की अर्काइव पर उपलब्ध जानकारी के मुताबिक संशोधित क्षयरोग नियंत्रण कार्यक्रम देश के लिए बहुत अच्‍छा रहा। इसमें इलाज का औसत 85 प्रतिशत रहा और मृत्यु दर घटकर पांच प्रतिशत से भी कम हो गई। नब्‍बे प्रतिशत नए स्‍मीयर पॉजीटिव रोगियों को डीओटीएस (डॉट्स) के तहत निगरानी में रखा गया है। इस कार्यक्रम के तहत प्रतिमाह एक लाख से अधिक रोगियों का इलाज किया जाता है। 2007 में केवल हमारे देश में डीओटीएस के तहत 14.75 लाख रोगियों का इलाज किया जाता है। कार्यक्रम एनजीओ, निजी चिकित्‍सकों, कार्पोरेट जगत आदि सहित सार्वजनिक स्‍वास्थ्य प्रणाली के बाहर स्‍वास्थ्य सुविधा प्रदाताओं से प्रभावी भागीदारी चाहता है।

टीबी से बचाव के लिए टीकाकरण

डॉट्स के अलावा प्रत्‍येक बच्‍चे को टी.बी से प्रतिरक्षण के लिए अनिवार्य रूप से बी सी जी का टीका दिया जाता है। यह टीका बच्‍चे के जन्‍म से लेकर 15 दिन के भीतर कभी भी दिया जाता है।

चेन्‍नई स्थित क्षय रोग अनुसंधान केंद्र और बेंगलुरू स्थित राष्‍ट्रीय क्षय रोग संस्‍थान क्षय रोग के विस्‍तारित इलाज के संबंध में महत्‍वपूर्ण ज्ञान उपलब्‍ध कराया गया है।

भारत सरकार के REVISED NATIONAL TUBERCULOSIS CONTROL PROGRAMME की वेबसाइट https://nikshay.in/Home/Index# पर रजिस्टर करके टीबी के विषय में उचित जानकारी ली जा सकती है। निक्षय भारत सरकार द्वारा मई 2012 में शुरू किया गया पोर्टल है।  99 DOTS टोल फ्री नंबर 1800116666 है।

(नोट – यह समाचार चिकित्सकीय परामर्श नहीं हैयह आम जनता में जागरूकता के उद्देश्य से किए गए अध्ययन का सार है। आप इसके आधार पर कोई निर्णय नहीं ले सकतेचिकित्सक से परामर्श करें। )

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