सरकार ने 328 दवाओं के उत्‍पादन, बिक्री और वितरण पर लगाया प्रतिबंध

मंत्रालय ने कुछ शर्तों के साथ 6 एफडीसी के उत्‍पादन, बिक्री अथवा वितरण को भी प्रतिबंधित कर दिया है। ये अधिसूचनाएं तत्‍काल प्रभावी हो गई हैं।...

सरकार ने 328 दवाओं के उत्‍पादन, बिक्री और वितरण पर लगाया प्रतिबंध

Government imposes restrictions on the production, sale and distribution of 328 drugs

328 एफडीसी (फिक्‍स्‍ड डोज कांबिनेशन) दवाओं का उत्‍पादन, बिक्री और वितरण प्रतिबंधित

नई दिल्ली, 12 सितंबर। स्‍वास्‍थ्‍य एवं परिवार कल्‍याण मंत्रालय ने तत्‍काल प्रभाव से मानव उपयोग के उद्देश्‍य से 328 एफडीसी (फिक्‍स्‍ड डोज कांबिनेशन या निश्चित खुराक संयोजन) के उत्‍पादन, बिक्री अथवा वितरण पर प्रतिबंध लगा दिया है।

कुछ शर्तों के साथ मंत्रालय ने 6 एफडीसी के उत्‍पादन, बिक्री अथवा वितरण को भी प्रतिबंधित कर दिया है। 

इससे पहले भारत के राजपत्र में 10 मार्च, 2016 को प्रकाशित अपनी अधिसूचनाओं के जरिए औषधि और प्रसाधन सामग्री अधिनियम, 1940 की धारा 26ए के तहत मानव उपयोग के उद्देश्‍य से 344 एफडीसी के उत्‍पादन, बिक्री और वितरण पर केंद्र सरकार ने प्रतिबंध लगा दिया था। इसके बाद सरकार ने समान प्रावधानों के तहत 344 एफडीसी के अलावा पांच और एफडीसी को प्रतिबंधित कर दिया था।

उच्‍चतम न्‍यायालय में सरकार के निर्णय को चुनौती दी थी दवा निर्माताओं ने

हालांकि, इससे प्रभावित उत्‍पादकों अथवा निर्माताओं ने देश के विभिन्‍न उच्‍च न्‍यायालयों और उच्‍चतम न्‍यायालय में इस निर्णय को चुनौती दी थी।

माननीय उच्‍चतम न्‍यायालय द्वारा 15 दिसम्‍बर, 2017 को सुनाए गये अपने फैसले में दिये गये निर्देशों का पालन करते हुए इस मसले पर दवा तकनीकी सलाहकार बोर्ड द्वारा गौर किया गया, जिसका गठन औषधि और प्रसाधन सामग्री अधिनियम, 1940 की धारा 5 के तहत हुआ था। इस बोर्ड ने इन दवाओं पर अपनी रिपोर्ट केन्‍द्र सरकार को सौंप दी।

दवा तकनीकी सलाहकार बोर्ड ने की थी सिफारिश मानव स्‍वास्‍थ्‍य के लिए खतरनाक हैं एफडीसी

दवा तकनीकी सलाहकार बोर्ड ने अन्‍य बातों के अलावा यह सिफारिश भी की कि 328 एफडीसी में निहित सामग्री का कोई चिकित्सकीय औचित्य नहीं है और इन एफडीसी से मानव स्‍वास्‍थ्‍य को खतरा पहुंच सकता है।

बोर्ड ने सिफारिश की कि औषधि और प्रसाधन सामग्री अधिनियम, 1940 की धारा 26ए के तहत व्‍यापक जनहित में इन एफडीसी के उत्‍पादन, बिक्री अथवा वितरण पर प्रतिबंध लगाना आवश्‍यक है। छह एफडीसी के बारे में बोर्ड ने सिफारिश की कि इनके चिकित्‍सकीय औचित्‍य के आधार पर कुछ शर्तों के साथ इनके उत्‍पादन, बिक्री और वितरण पर प्रतिबंध लगाया जाए।

10 मार्च, 2016 को प्रतिबंधित किये गये 344 एफडीसी, जिनके बारे में दावा किया गया कि 21 सितम्‍बर 1988 से पहले इनका उत्‍पादन होता था, में से 15 एफडीसी को वर्तमान अधिसूचनाओं के दायरे से बाहर रखा गया है।

इससे पहले केन्‍द्र सरकार द्वारा गठित की गई एक विशेषज्ञ समिति ने भी इन एफडीसी पर गौर किया था और उसके बाद सिफारिशें पेश की थीं जो बोर्ड द्वारा की गई उपर्युक्‍त सिफारिशों के अनुरूप ही थीं।

केन्‍द्र सरकार ने विशेषज्ञ समिति और दवा तकनीकी सलाहकार बोर्ड द्वारा पेश की गई सिफारिशों पर गौर किया और इनके आधार पर यह निष्‍कर्ष निकाला गया कि देश में मानव उपयोग के उद्देश्‍य से इन 328 एफडीसी के उत्‍पादन, बिक्री और वितरण पर त्‍वरित ढंग से प्रतिबंध लगाना जनहित में आवश्‍यक है।

प्रतिबंध तत्काल प्रभाव से लागू

तदनुसार, स्‍वास्‍थ्‍य एवं परिवार कल्‍याण मंत्रालय ने औषधि और प्रसाधन सामग्री अधिनियम, 1940 की धारा 26ए के तहत मिले अधिकारों का उपयोग करते हुए 7 सितम्‍बर, 2018 को अपनी गजट (राजपत्र) अधिसूचनाओं के जरिए मानव उपयोग के उद्देश्‍य से 328 एफडीसी के उत्‍पादन, बिक्री अथवा वितरण पर प्रतिबंध लगा दिया है। मंत्रालय ने कुछ शर्तों के साथ 6 एफडीसी के उत्‍पादन, बिक्री अथवा वितरण को भी प्रतिबंधित कर दिया है। ये अधिसूचनाएं तत्‍काल प्रभावी हो गई हैं।

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